Monday, Jan 24, 2022
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hindu jain demanded right to worship in qutub minar kmbsnt

हिंदू और जैन कुतुब मीनार में मांग रहे पूजा का अधिकार, साक्ष्य के साथ किया मंदिर होने का दावा

  • Updated on 12/9/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। हिंदुओ (Hindu) और जैनों (jain) ने अब दिल्ली स्थित कुतुब मिनार (qutub minar) में पूजा के अधिकार की मांग करते हुए दिल्ली के साकेत कोर्ट में केस दर्ज किया है। दावा किया जा रहा है कि कुतुब मीनार परिसर में स्थित कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद हिंदुओं और जैनों के 27 मंदिरों को तोड़कर बनाया गया है। अब हिंदू और जैन वहां पर अपने देवताओं की मूर्तियों को फिर से स्थापित करना चाहते हैं। इसके लिए भगवान विष्णु और भगवान ऋषभदेव की ओर से केस दर्ज किया गया है।   

इस मामले को स्वीकार करने को लेकर मंगलवार को दिल्ली के साकेत कोर्ट में सिविल जज नेहा शर्मा की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुवाई हुई। अब इस मामले में 24 दिसंबर को अगली सुनवाई होगी। बता दें कि कुल 5 लोगों की ओर से ये मुकदमा दर्ज किया गया है। जिसमें पहले याची  तीर्थकर भगवान ऋषभदेव हैं, जिनकी तरफ से हरिशंकर जैन ने और दूसरे याचिकाकर्ता भगवान विष्णु हैं, जिनकी ओर से रंजना अग्निहोत्री ने केस दर्ज किया है।

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सरकार और एएसआ को इस केस में बनाया प्रतिवादी
वहीं भारत सरकार और भारत पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को इस केस में प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में लिखा गया है कि कुतुब परिसर में स्थित कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद को हिंदू और जैनों के 27 मंदिरों को तोड़कर उनके मलबे से बनाया गया है। दावा किया गया है कि वहां पर आज भी देवी देवताओं की खंडित मूर्तियां मौजूद हैं। जानरकारी के लिए आपको बता दें कि मुहम्मद गोरी के कमांडर कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसको बनवाया था। 

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अयोध्या मामले के फैसले का दिया हवाला
याचिका में लिखा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 25 व 26 में मिले धार्मिक आजादी के अधिकारों के तहत तोड़े गए मंदिरों की पुनर्स्थापना के लिए ये केस दर्ज किया गया है। मंगलवाल को केस की सुनवाई के दौरान हरिशंकर जैन ने कहा कि उनके दावे की पुष्टि करने के लिए ऐतिहासिक और एएसआइ के साक्ष्य मौजूद हैं। 

याचिका में अयोध्या मामले के फैसले का हवाला भी दिया गया है।  जिसमें कहा गया था कि पूजा करने वाले अनुयायियों को देवता की संपत्ति संरक्षित करने के लिए केस दर्ज करने का अधिकार है। कोर्ट से मांग की गई है कि  केंद्र सरकार को निर्देश दें कि वो एक ट्रस्ट का गठन करे, जो वहां देवताओं की पुनर्स्थापना करके उनकी पूजा-अर्चना का प्रबंधन और प्रशासन देखे।

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