Saturday, Apr 01, 2023
-->
hindu side very strong in gyanvapi case: alok kumar

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष अत्यंत मजबूतः आलोक कुमार

  • Updated on 9/16/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। ज्ञानवापी, काशी में शाृंगार गौरी पूजन के अधिकार को लेकर हिंदू समाज संघर्ष कर रहा है जबकि मुस्लिम समाज विरोध दर्ज कराता रहा है। विश्व हिंदू परिषद का स्पष्ट मानना है कि यदि हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष बातचीत के जरिए सद्भावपूर्ण तरीके से मसले का हल निकालते तो बात कुछ और होती। लेकिन, अब मामला कोर्ट में है और जो भी निर्णय होगा उसे स्वीकार करना चाहिए। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने ज्ञानवापी को लेकर उठे विवाद के साथ- साथ मथुरा सहित अन्य विषयों पर नवोदय टाइम्स/पंजाब केसरी के लिए अकु श्रीवास्तव से खुलकर बात की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश:

ज्ञानवापी वाद में स्थिति क्या है और इससे आगे क्या फर्क पड़ेगा?
ये प्रारंभिक मोड़ है। मामले के गुण- दोष के आधार पर आगे सुनवाई होनी है। मुस्लिम पक्ष का तर्क यह था कि मुकदमा प्लेसिस ऑफ वर्शिप एक्ट से बाधित है, इसलिए यह चलना ही नहीं चाहिए और इसको बिना किसी और सुनवाई के खारिज कर दिया जाए। हमने लड़ाई के पहले मोर्चे को पार कर लिया। साक्ष्य और कानून हमारे पक्ष में है और हमको विजय प्राप्त होगी।

1993 के पहले ज्ञानवापी में पूजा होती थी, क्या इस तरह के साक्ष्य हैं?
मैं आपको कहूं कि इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि मंदिर की दीवार जो सड़क के साइड पर है और उसमें जो मूर्तियां बनी हुई हैं, उन मूर्तियों की नियमित पूजन की अनुमति थी, बाद में पूजा बंद करा दी गई। लेकिन, अब भी वर्ष में एक बार वहां पूजा होती है। इस वाद में जब निर्णय होगा तो यह साक्ष्य महत्वपूर्ण होगा कि वहां शिवलिंग प्राप्त हुआ है। बेसमेंट के खंभे पर हिंदू धार्मिक प्रतीक चिन्ह हैं। मेरा मानना है कि हिंदू पक्ष बहुत मजबूत है। 

1991 का प्लेसेस ऑफ वर्शिप कानून से यह मामला भिन्न कैसे है?
सुप्रीम कोर्ट में भी जज साहब ने टिप्पणी की है कि जिस संपत्ति का विवाद है उस संपत्ति की प्रकृति क्या है, यह पता करने के लिए मुकदमा चलाया जाए। 1947 में क्या प्रकृति थी, जब इस प्रश्न को सबूत के आधार पर सुलझाया जा सकता है तो हमारे पास जो प्रमाण हैं हम उसे पेश करेंगे। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी इस बात के अनुकूल थी कि मुकदमा चलना चाहिए।

इस निर्णय के बाद भी यह कहना है कि मुकदमा एक्ट से बाधित है, यह केवल जिद है। कोर्ट ने कहा कि जाकर सर्वे करो तो हाई कोर्ट में इसके विरुद्ध इंतजामिया कमेटी के वकील गए थे, खुद कोर्ट में गए, वहां निर्णय हो गया कि सर्वे होना चाहिए। तब इंतजामिया कमेटी ने यह कहना शुरू किया कि हम नहीं मानेंगे।

कुछ ऐसा ही उन्होंने हिजाब के मामले में कर्नाटक में एसेंसियल प्रैक्टिस है, इस आधार पर रिट फाइल की थी और रिट खारिज हो गई तो बोल रहे हैं कि हम नहीं मानेंगे। जबकि सुप्रीम कोर्ट में कह रहे हैं कि एसेंसियल प्रैक्टिस है यह मामला क्यों उठाया, उठाया तो खुद इन्होंने था। इसलिए जब कोर्ट में कोई मामला लगाते हैं तो इस श्रद्धा के साथ लगाना चाहिए कि याचिका पर न्यायालय का निर्णय हम स्वीकारेंगे।

अयोध्या के बाद आपने भी माना था कि अब ऐसी चीजें नहीं होंगी, लेकिन फिर क्यों हालात बदलते जा रहे हैं?
आप बिलकुल ठीक कह रहे हैं, लेकिन मैंने कहा था कि अभी नहीं होंगी। नहीं होगा, ऐसा नहीं कहा था। अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनकर तैयार हो जाए उसके बाद करेंगे। हमको उतावलापन नहीं है, लेकिन यदि शिवजी को उतावलापन हो तो हम क्या करें! जैसे मैं कह रहा हूं कि सर्वे का ऑर्डर हो गया पहले मलबा हुआ फिर पिलर्स हुए फिर जो वाटर हौज था, वहां मछलियां तैर रही थीं।

मुसलमानों ने कहा कि तुम तो हिंदू हो मछलियां मर जाएंगी यदि पानी निकाला तो, पीडब्ल्यूडी ने एक दूसरा टैंक बनाया और पानी वहां निकाल दिया। शिवजी प्रकट हो गए, तो जल्दी तो उनको थी। बाहर लोगों ने भी देखा कि प्रत्यक्ष शिवजी हैं। रात तक पूरे देश ने मान लिया कि अब तो शिवजी प्रकट हो गए उनकी पूजा करेंगे। फिर न्यायालय ने भी सुरक्षा का आदेश दे दिया। 

इस मामले में कोर्ट का जो फैसला होगा क्या वह पूरी तरह से मान्य होगा?
हमने इस बात की स्पष्ट घोषणा की है कि हमारा यह अभियान कानून के अंतर्गत होगा, संपूर्ण रूप से अहिंसक होगा और संवैधानिक व्यवस्थाओं के अंतर्गत जो निर्णय होंगे, उनको हम स्वीकारेंगे। 

क्या विवाद बातचीत के जरिये हल नहीं कर सकते हैं?
बातचीत करने से हम लोगों ने कभी मना नहीं किया। प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के समय में भी हमने बातचीत को तब तक जारी रखा जब तक दो बैठकों में प्रतीक्षा करने के बाद भी मुस्लिम पक्ष नहीं आया। सुप्रीम कोर्ट ने भी समिति बनाई थी, हमने चर्चा की। हम तैयार हैं दूसरे पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई है क्या? कौन आगे आएगा चर्चा करने के लिए, यदि ऐसा कोई प्रस्ताव होगा तो हम बात करने के लिए तैयार हैं। जमायते इस्लामिक हिंद के जनरल सेक्रेटरी हैं मदनी, टीवी पर उनका इंटरव्यू देखा जिसमें उन्होंने अच्छी बात कही कि काशी के विवाद को सुलझाने के दो ही तरीके हैं, बातचीत से हल हो या फिर कोर्ट से। बातचीत से हल हो इसका कोई रास्ता दिख नहीं रहा, लिहाजा दोनों पक्ष को कोर्ट का फैसला मानना होगा।

कई स्थलों पर पूजा को लेकर विवाद है, यह सिलसिला कब थमेगा?
यह तो समाज का विवेक और दोनों पक्षों का व्यवहार ही तय करेगा। मैं समझता हूं कि औरंगजेब ने मथुरा के बारे में जो फरमान जारी किए थे सब लोगों को उसकी पीड़ा है। इस पीड़ा का कितना और कैसे शमन किया जा सकता है, इसके लिए दोनों पक्षों को सद्भाव से आपस में बातचीत करके ही रास्ता निकालना चाहिए। 

2024 मकर संक्रांति पर विराजेंगे रामलला

मैं विश्व हिंदू परिषद में हूं, इसलिए मुझे हर घटना के पीछे वोट और चुनाव नहीं दिखते। मंदिर जल्द से जल्द बने, रामलला अपने जन्म स्थान पर मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हों और हम उनका पूजन करें, यही कामना है। ऐसा कौन सा वर्ष है जिनमें महत्वपूर्ण चुनाव नहीं होते? चुनाव हों या न हों, परंतु मकर संक्रांति 2024 को मैं पूरे देश को निमंत्रित करता हूं कि उस दिन जो 500 साल पुराना स्वप्न है उसे पूरा करो, श्रीराम जन्म भूमि पर बने हुए श्रीराम मंदिर में आकर रामलला के दर्शन करो। सीता रसोई में बना हुआ प्रसाद ग्रहण करो, सरयू में स्नान करो, हनुमान लला से मिलो। चुनाव तो आते-जाते रहते हैं, चुनावों से रामलला के विराजमान होने का कोई लेना-देना नहीं। 

वीएचपी सड़क पर आकर बाध्य नहीं कर रहा
मथुरा में सिविल जज ने कहा था कि वहां के मुकदमे प्लेसिस ऑफ वर्शिप एक्ट से बाधित हैं और खारिज कर दिए थे, जिला जज ने कहा था कि बाधित नहीं है, चलेंगे। इसलिए इस बार यह जो सारा विषय चल रहा है यह विश्व हिंदू परिषद का नेतृत्व नहीं है बल्कि समाज जा रहा है कोर्ट में और कोर्ट निर्णय कर रही है, हम सड़क पर आकर बाध्य नहीं कर रहे हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.