Monday, Apr 23, 2018

इतिहास गवाह है, जालन्धर में नए चेहरों के बीच हो सकती है जंग कांग्रेस लगातार 4 बार जीती

  • Updated on 1/11/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अकाली दल ने आखिरी बार 1996 के चुनाव में यह सीट जीती थी। उस वक्त दरबारा सिंह पार्टी के उम्मीदवार थे। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार उमराव सिंह को हराया था। 1998 के चुनाव में भी जालन्धर में गैर-कांग्रेसी उम्मीदवार इंद्र कुमार गुजराल की जीत हुई थी।

वह जनता दल की टिकट पर चुनाव लड़े थे और उन्हें अकाली दल का समर्थन हासिल था लेकिन 1999 के बाद हुए 4 चुनावों में अकाली दल जालन्धर सीट जीत नहीं पाया है। इस दौरान पार्टी ने नरेश गुजराल, हंसराज हंस और पवन कुमार टीनू जैसे अपने बड़े चेहरे मैदान में उतार कर देख लिए हैं लेकिन तीनों को हार का मुंह देखना पड़ा।

लिहाजा अगले चुनाव में अकाली दल किसे मैदान में उतारेगा यह सबसे बड़ा सवाल होगा। दूसरी तरफ कांग्रेस के सांसद चौ. संतोख सिंह को दोबारा मैदान में उतारने को लेकर भी पार्टी के अपने राजनीतिक कारण हो सकते हैं। 1985 के बाद कांग्रेस ने कभी भी अपने विजेता उम्मीदवार को दोबारा मैदान में नहीं उतारा है।

कांग्रेस की तरफ से सिर्फ रजिन्द्र सिंह स्पैरो ही 1980 और 85 में लगातार 2 बार सांसद बने थे। उनसे पहले लगातार 3 बार सांसद रहने का रिकार्ड स्वर्ण सिंह के नाम पर है। यदि पार्टी चौ. संतोख सिंह को दोबारा मैदान में उतारती है तो पार्टी 33 साल पुरानी अपनी रणनीति को दोबारा दोहराएगी। 

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