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एमनेस्टी का बयान दुर्भाग्यपूर्ण, अवैध गतिविधियों के कारण UPA ने भी किया था बैनः गृह मंत्रालय

  • Updated on 9/30/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया (Amnesty International India) ने मंगलवार को कहा कि उसके खातों पर रोक लगाए जाने (फ्रीज) के कारण वह भारत में अपनी सभी गतिविधियों को रोक रहा है। उसने दावा किया है कि उसको निराधार आरोपों को लेकर लगातार निशाना बनाया जा रहा है। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गृह मंत्रालय ने कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल का बयान दुर्भाग्यपूर्ण, अतिरंजित और सच्चाई से परे है। इसके साथ ही मंत्रालय का कहना है कि गैरकानूनी गतिविधियों के चलते पिछली सरकारें भी संस्था पर रोक लगा चुकी हैं।

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संस्था के बयान गतिविधियों से ध्यान भटकाने का तरीका- मंत्रालय
मंत्रालय ने कहा कि मानवीय कार्यों और सत्ता से दो टूक बात करने के बारे में दिए गए 'मोहक बयान' और कुछ नहीं, बल्कि संस्था की उन गतिविधियों से सभी का 'ध्यान भटकाने का तरीका है', जो भारतीय कानून का सरासर उल्लंघन करते हैं। एमनेस्टी इंडिया ने एक बयान में कहा कि संगठन को भारत में कर्मचारियों को निकालने और उसके जारी सभी अभियान और अनुसंधान कार्यों को रोकने के लिए मजबूर किया गया है।

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एमनेस्टी को अवैध रूप से मिल रहा विदेशी धन- सरकार
संस्था ने कहा, भारत सरकार ने एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बैंक खातों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है, जिसके बारे में 10 सितंबर 2020 को पता चला था, इसलिए संगठन द्वारा किए जा रहे सभी कामों को रोक दिया गया है।' हालांकि, सरकार ने कहा है कि एमनेस्टी को अवैध रूप से विदेशी धन प्राप्त हो रहा है। प्रवर्तन निदेशालय ने 2018 में बैंगलुरू में एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुख्यालय की तलाशी की थी।  ये छापे विदेशी मुद्रा अधिनियम के कथित उल्लंघन के लिए किए गए थे। 

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एफसीआरए नियमों को किया गया अनदेखा
गृह मंत्रालय ने कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल को विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत सिर्फ एक बार अनुमति मिली थी, वह भी 20 साल पहले (19 दिसंबर, 2000 को)। उसके बाद बार-बार आवेदन के बावजूद तमाम सरकारों ने उसे एफसीआरए मंजूरी नहीं दी क्योंकि कानूनन वह पात्र नहीं था। हालांकि एमनेस्टी ब्रिटेन ने एफसीआरए नियमों को दरकिनार कर भारत में पंजीकृत चार कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के रास्ते काफी धन भेजा।

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एमनेस्टी पर यूपीएम सरकार में भी लगी थी रोक
एफसीआरए के तहत गृह मंत्रालय की मंजूरी के बगैर एमनेस्टी (भारत) को भी विदेशों से बहुत बड़ी राशि मिली।      मंत्रालय ने कहा, ‘इस तरह गलत रास्ते से धन मंगवाना कानून के प्रावधानों का उल्लंघन है।'  गृह मंत्रालय ने कहा कि एमनेस्टी की इन्हीं गैरकानूनी गतिविधियों के कारण पिछली सरकारों ने भी विदेशों से चंदा पाने की संगठन की अर्जी बार-बार खारिज की।  इस कारण एमनेस्टी को उस दौरान भी एक बार भारत में अपनी गतिविधियां बंद भी करनी पड़ी थीं।  

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बीजेपी नेता ने दी कानून के दायरे में काम करने की सलाह
इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि एमनेस्टी इंटरनेशनल कई अवैध गतिविधियों में शामिल था और इसे मर्यादा पर भाषण करने का कोई अधिकार नहीं है। पार्टी नेता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि भारत में कोई भी संगठन काम कर सकता है लेकिन इसे कानून के दायरे में रहना होगा। ईमानदारी का चोला ओढ़ कर गलत काम करने के लिये हम किसी भी भारतीय अथवा विदेशी संगठन को अनुमति नहीं दे सकते हैं।

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एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने कहा
संगठन ने दावा किया कि एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया और अन्य मुखर मानवाधिकार संगठनों, कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों पर हमले केवल विभिन्न दमनकारी नीतियों और सत्य बोलने वालों पर सरकार द्वारा निरंतर हमले का विस्तार है।  एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने कहा, 'भारत सरकार द्वारा मानवाधिकार संगठनों पर निराधार और प्रेरित आरोपों को लेकर लगातार किए जा रहे हमलों की कड़ी में यह नयी घटना है। संगठन ने कहा कि वह सभी भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पूर्ण पालन करता आया है। 

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