Thursday, Apr 09, 2020
host was handed over to the minister of trivendra government during the political crisis in mp

कमलनाथ सरकार के सियासी संकट के वक्त त्रिवेन्द्र सरकार के मंत्री को सौंपी गई थी मेजबानी

  • Updated on 3/23/2020

देहरादून, ब्यूरो : मध्यप्रदेश के सियासी संकट के दौरान दो निर्दलीय विधायक देहरादून स्थित एक रिसोर्ट में रहे। लगभग 11 दिन तक यहां रहे इन दोनों विधायकों की मेजबानी और निगरानी का जिम्मा त्रिवेन्द्र सरकार के एक कैबिनेट मंत्री को सौंपा गया था। इस मिशन की गोपनीयता बरकरार रखने के लिए भाजपा हाईकमान ने मेजबानी कर रहे उत्तराखण्ड सरकार के मंत्री की पीठ थपथाई है।

10 मार्च को मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार उस वक्त अस्थिर हो गई थी, जब कांग्रेस के 22 विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। इन सभी विधायकों को बंगलूरु के एक होटल में ठहराया गया था। कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रहे तीन विधायकों निलंबित विधायक रामबाई, संजीव सिंह कुशवाहा और समाजवादी पार्टी के विधायक राजेश शुक्ला की लोकेशन किसी को ढूंढे नहीं मिल रही थी। उस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि इन तीनों विधायकों को भाजपा नेताओं ने अगवा कर रखा और उन्हें करोड़ों रुपये रिश्वत की पेशकश की है।

हालांकि उसके तत्काल बाद बसपा से निलंबित विधायक रामबाई, संजीव सिंह कुशवाहा और समाजवादी पार्टी के राजेश शुक्ला ने रिश्वत की पेशकश और अगवा करने जैसे कांग्रेस के नेताओं के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। अब जबकि कमलनाथ 20 मार्च को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं। मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के बनने की पूरी संभावना बन गई है, यह बात सामने आ रही है कि इनमें से दो विधायक रामबाई और संजीव सिंह कुशवाहा उस समय सियासी हलचल के दौरान देहरादून में एक रिसोर्ट में रहे।

त्रिवेन्द्र सरकार के एक मंत्री ने 10 दिन तक उनकी देखभाल और रहने-खाने की व्यवस्था की। 21 मार्च को इन दोनों विधायकों को सुरक्षित भोपाल पहुंचाया गया। खास बात यह है कि इन दोनों विधायकों को विशेष विमान से देहरादून पहुंचाया गया था।

रमाबाई ने किया था सीएए का समर्थन
देहरादून। मध्य प्रदेश के पथेरिया से बहुजन समाज पार्टी की विधायक रमाबाई परिहार ने पार्टी लाइन से अलग जाते हुए सीएए कानून का समर्थन किया था। यही वजह रही कि रमाबाई की पार्टी ने कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने इस बारे में ट्वीट कर नाराजगी जताई थी।

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