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ऐतिहासिक स्मारक बंद होने से घुटनों पर आई होटल इंडस्ट्री

  • Updated on 6/30/2020

नई दिल्ली/अनामिका सिंह। देश के राजस्व को मजबूत बनाने में पर्यटन क्षेत्र का अपना विशेष स्थान है लेकिन अनलॉक 2‐0 के बाद भी पर्यटन क्षेत्र को बिल्कुल राहत नहीं मिल रही है। हालात यह है कि ऐतिहासिक इमारतों के बंद होने व इंटरनेशनल फ्लाईट्स पर रोक के चलते होटल इंडस्ट्री तो पूरी तरह घुटनों पर आ गई हैं। हाल यह है कि बंद पडे होटलों का हाउस टैक्स, बिजली बिल व पानी बिल ने होटल मालिकों की कमर पूरी तरह तोड दी है।

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बता दें कि भारत की संस्कृति और परंपराओं सहित हमारे देश की वास्तुकला भारत के अन्य राज्यों के सैलानियों को ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी हमेशा से आकर्षित करती रही है। लालकिले में रोजाना देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या 6 से 8 हजार रहती है जबकि वीकेंड में 9 से 12 हजार तक पहुंच जाती है। वहीं कुतुबमीनार में 7 से 10 हजार, हुमायूं मकबरा में 8 से 12 हजार व पुराना किला में 6 से 8 हजार पर्यटक इसे देखने आते हैं। मार्च से बंद ऐतिहासिक स्मारकों की टिकट से इकट्ठा होने वाला राजस्व का नुकसान जहां हो रहा है वहीं होटल इंडस्ट्री से जुडे लोगों व ऐतिहासिक स्मारकों पर टूरिस्ट गाईड का काम करने वाले लोगों के सामने दो वक्त की रोटी की समस्या पैदा हो गई है।

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दिल्ली में होटल इंडस्ट्री से होने वाला नुकसान करीब 15 हजार करोड रूपए बताया जा रहा है। दरअसल दिल्ली में आने वाले सभी टूरिस्ट करोलबाग, पहाडगंज व कनॉट प्लोस स्थित होटलों में रूकते थे, वहीं बिजनेस के लिए अन्य प्रदेशों से आने वाले लोग भी यहां बिजनेस मीटिंग से लेकर आराम के लिए रूका करते थे जोकि अब बिल्कुल बंद हैं।  मालूम हो कि दिल्ली में करीब 3 हजार छोटे-बडे होटल हैं जिनमें 75 हजार कमरे हैं जोकि अकसर 80 से 90 फीसदी लॉकडाउन से पहले भरे रहते थे।
 

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घुटनों तक आ चुकी है होटल इंडस्ट्री: संदीप खंडेलवाल 
दिल्ली होटल एंड रेस्टोरेंट ऑर्नर एसोसिएशन अध्यक्ष संदीप खंडेलवाल का कहना है कि होटल मालिक डिप्रेशन में जा रहे हैं उसमें भी जिन्होंने लीज पर होटल लिए हैं उनके हालात काफी खराब हैं। होटल इंडस्ट्री पर होटल मालिक के अलावा धोबी, बिजली मैकेनिक, खाना सप्लाई करने वालों सहित कई लोगों की आजीविका निर्भर करती है। हमने पर्यटन मंत्री से अपील की है कि बंद होटलों का लाखों रूपए आया बिजली-पानी का बिल माफ किया जाए क्योंकि अब होटल इंडस्ट्री घुटनों पर आ गई है।

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क्या कहते हैं होटल मालिक
करोल बाग स्थित होटल लिवासा इन के मैनेजर संतोष कुमार ने कहा कि हमेशा 90 फीसदी भरा रहने वाला हमारा होटल लॉकडाउन से लेकर अनलॉक 2‐0 तक खाली है। काफी नुकसान झेलना पड रहा है। होटल सार्थक पैलेस के मालिक राजेश कुमार ने कहा कि टूरिज्म के चलते होटल इंडस्ट्री फलती-फूलती है वो बिल्कुल ठप है अब सरकार को इस ओर भी देखना चाहिए।
 

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क्या कहते हैं टूरिस्ट गाईड: 
ज्ञानचंद आर्या कुतुबमीनार में गाईड हैं उनका कहना है कि हमारा कोई और इनकम सोर्स नहीं है, ना लोन मिलता है ना फंड होता है पूरा काम विजिटर्स पर होता है। दिल्ली में अगर ऐतिहासिक स्मारकों को खोल दिया जाए तो घर चलाना आसान हो जाएगा। वहीं प्रभाष कुमार ने कहा कि परिवार चलाना मुश्किल हो गया है, अब कुछ ओर काम ढूंढ रहे हैं वो भी नहीं मिल रहा। स्मारकों पर भी सेनेटाइजर टनल लगाकर इन्हें खोला जाना चाहिए।

 

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