Wednesday, Jun 26, 2019

मतदान से रिजल्ट तक, जानिए कैसे और कहां होती है EVM की सुरक्षा

  • Updated on 5/22/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 2019 के लोकसभा चुनाव के मतदान की गणना 23 मई को होगी और उसी दिन नतीजे भीआएंगे। एग्जिट पोल्स ने भारतीय जनता पार्टी (BJP)के फिर से आने के संकेत दिए हैं। जिसके बाद विपक्षी राजनीतिक दल ईवीएम को लेकर फिर से शिकायतें कर रहे हैं। 
बिहार, हरियाणा और यूपी में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ तथा ईवीएम बदलने की खबरें भी लगातार आ रही है।
क्या सच में वोटिंग के बाद ईवीएम के रखरखाव में वाकई में कोई लापरवाही होती है?

वोटिंग से काउंटिंग तक, कहां और कितनी सुरक्षा में रखी जाती हैं EVM

मतदान के बाद कहां-कहां जाती है EVM
एक ईवीएम तीन यूनिट से मिलकर बनी होती है। पहली कंट्रोल यूनिट, दूसरी बैलट यूनिट और तीसरी VVPAT कंट्रोल और बैलट यूनिट को 5 मीटर लंबी एक केबल से जोडा जाता है। कंट्रोल यूनिट बूथ में मतदान अधिकारी के पास रखी होती है जबकि बैलेटिंग यूनिट वोटिंग मशीन के अंदर होती है जिसका इस्तेमाल वोटर के द्वारा कीया जाता है। 

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पूर्व में भी ईवीएम में छेड़छाड़ को लेकर कई सवाल उठाए जा चुके हैं। जिस पर चुनाव आयोग ने साफ किया है कि टेंपरिंग evm से छेडछाड़ संभव नहीं है परन्तु फिर भी राजनीतिक दल इस चीज को मानने को तैयार नहीं हो रहे हैं। चुनाव आयोग की मानें तो ईवीएम पूरी तरह से चिप से बनी होती है और इसके साथ किसी भी तरीके से छेडछाड़ नहीं की जा सकती है।

वोटिंग से काउंटिंग तक, कहां और कितनी सुरक्षा में रखी जाती हैं EVM

एक बार Close होने पर  EVM नहीं करती काम 
प्रत्येक बूथ में मतदान के बाद मतदान वहां के अधिकारी को ईवीएम पर लगा 'Close'बटन दबाना होता है। आपको बता दें 'Close'बटन दबाने के बाद ईवीएम मशीन पूरी तरह से बंद हो जाती है और इसके बाद EVM का कोई बटन काम नहीं करता है। यह बटन दबाते ही ईवीएम की स्क्रीन पर पोलिंग क्लोज टाइमिंग और पड़ने वाले टोटल वोट काउंट हो जाते हैं। जिसके बाद वहां मौजूद अधिकारी तीनों यूनिट को अलग कर देते हैं।

वोटिंग से काउंटिंग तक, कहां और कितनी सुरक्षा में रखी जाती हैं EVM

उम्मीदवारों के सामने पैक होती है ईवीएम
वोटिंग के बाद मशीन को कैरिंग बैग में डाल दिया जाता है। प्रेक्षक अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी, एसपी, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, अनुविभागीय अधिकारी, पार्टियों के उम्मीदवारों कि उपस्थिति में ईवीएम को सील बंद किया जाता है। तीनों EVM मशीनों पर पोलिंग बूथ का पूरा पता और पीठासीन अधिकारी के दस्तखत होते हैं। 
इस प्रक्रिया के दौरान हर पार्टी के दो एजेंट मौजूद रहते हैं। इसमें एक मुख्य एजेंट और दूसरा रिलीवर रहता है। किसी भी पोलिंग बूथ पर एक मुख्य अधिकारी और तीन मतदान अधिकारी होते हैं।

वोटिंग से काउंटिंग तक, कहां और कितनी सुरक्षा में रखी जाती हैं EVM

अचूक सुरक्षा के घेरे में रखी जाती है ईवीएम
वोटिंग के बाद चुनाव आयोग के दिशानिर्देश का पालन कर ईवीएम को सघन सुरक्षा घेरे में स्ट्रांग रूम तय लाया जाता है तथा मशीन को कड़ी सुरक्षा के घेरे में रखा जाता है। बूथ से लेकर स्ट्रांग रूम तक पहुंचने में ईवीएम की सुरक्षा में पैरामिलिट्री फोर्स, पीएसी के जवान और लोकल पुलिस शामिल होती है। ओर साथ ही कार्यपालिका मजिस्ट्रेट और चुनाव अधिकारी भी वहीं होते हैं। स्ट्रांग रूम से पहले ईवीएम एकत्रित करने के लिए विधान सभा के अनुसार सेंटर बनाए जाते हैं। जहां पर चुनाव अधिकारी को अपने-अपने बूथ की ईवीएम जमा करवाना होता है।

वोटिंग से काउंटिंग तक, कहां और कितनी सुरक्षा में रखी जाती हैं EVM

आपको बता दें की ईवीएम में किसी भी तरीके से छेड़छाड़ होना संभव नहीं है। ईवीएम को सघन सुरक्षा में पोलिंग बूथ से स्ट्रांग रूम तक लाया जाता है। स्ट्रांग रूम में ऑब्जर्वर, अभ्यर्थियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ रिटर्निंग ऑफिसर और सहायक रिटर्निंग ऑफिसर की मौजूदगी में मशीनों सील बंद कर दिया जाता है। वहीं जिस कमरे में ईवीएम रखी जाती है, उसके दरवाजे पर डबल लॉक लगाने के बाद एक 6 इंच की दीवार भी बनाई जाती है। और इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वीडियोग्राफी भी की जाती है। 

वोटिंग से काउंटिंग तक, कहां और कितनी सुरक्षा में रखी जाती हैं EVM

स्ट्रांग रूम के बाहर जवानो द्वारा तीन लेयर की सुरक्षा होती है। पहले लेयर में पैरामिलिट्री फोर्स, पीएसी के जवान और फिर राज्य पुलिस के जवान तैनात होतै हैं। ये जवान 24 घंटे अलग-अलग शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं। स्ट्रांग रूम के एरिया को एक तरह छावनी बना दिया जाता है। जवान यहां तंबू लगाकर रहते हैं और ड्यूटी देते हैं। इतना ही नहीं प्रत्याशी को किसी भी प्रकार की कोई शंका न हो इसलिए उनके प्रतिनिधियों के रहने के लिए भी तंबू-टेंट की व्यवस्था जिला निर्वाचन आयोग की ओर से की जाती है। इसके अलावा स्ट्रांग रूम के बाहर सीवीटीवी कैमरे भी लगाए जाते हैं जिनकी मॉनिटरिंग के लिए रूम में गार्ड्स तैनात होते हैं। जहां पावर बैकअप की भी व्यवस्था की जाती है।

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