Sunday, Oct 17, 2021
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मुझे 10 नोबेल पुरस्कार मिलने चाहिए: बाबा रामदेव

  • Updated on 5/29/2021

नई दिल्ली/ निशीथ जोशी। एलोपैथी बनाम आयुर्वेद को लेकर स्वामी रामदेव के बयान के बाद जो विवाद उठ खड़ा हुआ है, उस पर पंजाब केसरी/ नवोदय टाइम्स के लिए निशीथ जोशी से स्वामी रामदेव की दो टूक बातचीत।

सवाल: आयुर्वेद भारतीय चिकित्सा प्रणाली और विभिन्न देशों की देशी चिकित्सा प्रणाली और ऐलोपैथी में विवाद बहुत पुराना है। आपके ऐलोपैथी को लेकर दिए गए बयान के बाद हमारे देश में इसने तूल पकड़ लिया है। आपकी नजर में विवाद का मूल कारण क्या है? इसके निदान का मार्ग क्या है? क्या इस कारोना वायरस के संक्रमण काल में यह किसी भी तरह देश और समाज के हित में दिखता है?

रामदेव: देखिए..। पहली बात तो आईएमए और ऐलोपैथी द्वारा आयुर्वेद को निक्रिष्ट और नीचा दिखाने के अन्याय और असमानता के विरोध में यह विवाद है। आईएमए तो एक एनजीओ है। उसकी खिलाफत करने का कोई औचित्य नहीं है। ऐलोपैथी ने आयुर्वेद को हमेशा नीचा मान उसके और मानवता के साथ बड़ा अहित किया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ये लोग कहते हैं कि एलोपैथी बहुत बड़ा साइंस है। वो जिसे घटिया बता रहे हैं वह आयुर्वेद और नेचुरोपैथी भारत की परंपरागत चिकित्सा पद्धति या घरेलू उपचार है। उसके खिलाफ एक अभियान चलाया जा रहा है। हम कहते हैं कि इसको नीचा मत दिखाओ। कोराना काल में जिन लोगों की जान बची है, सबको पता है कि अस्पताल कम थे। ऑक्सीजन कम थी। दवाइयां भी कम थी। अस्पताल में जाने वाले लोगों की संख्या भी कम थी।

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उसके बावजूद घरों में बैठे लोग भी ठीक हो गये। उन्होंने योग, कपालभाती, अनुलोम-विलोम, व्यायाम जो बन सकता था किया। गिलोय और तुलसी का काढ़ा, अणु तेल, सरसों का तेल, श्वासरी- कोरोनिल का सेवन किया। 90 प्रतिशत लोगों ने परम्परागत तरीके से ही अपने को बचाया। जो अस्पतालों में भी गए, उनमें से भी करीब 90 प्रतिशत लोगों ने आयुर्वेद का इस्तेमाल किया। इसलिए, इस समय लोगों का आयुर्वेद की तरफ ध्यान दिलाना जरूरी है। क्योंकि जो लोग ज्यादा मात्रा में रेमडेसिविर और स्टोरायड ले रहे हैं। उनकी इम्यूनिटी कम हो रही है।

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उन पर वायरस अटैक भी ज्यादा हो रहा है। पोस्ट कोविड कम्पलीकेशन भी ज्यादा हो रहे हैं। इसलिए लोगों को बताना जरूरी है कि यदि आपको खुद को बचाना है तो योग- आयुर्वेद और नेचुरोपैथी के तरीकों को अपनाएं। मैं इस बात को विशेष महत्व के साथ कहना चाहता हूं कि अगर एमरजेंसी में लाइफ सेविंग ड्रग के तौर पर ऐलोपैथी ने जान भी बचाई है। यदि दस फीसदी लोगों की जान ऐलोपैथी ने बचाई तो 90 प्रतिशत लोगों की जान भारतीय सनातन परम्परा की जानकारी से बची है।

सवाल: ऐलोपैथ डाक्टरों का संगठन आईएमए ने चुनौती दी है कि आप आयुर्वेद के पांच विशेषज्ञ लेकर आएं। हम ऐलोपैथ के पांच विशेज्ञ लेकर आएंगे और सार्वजनिक तौर पर खुली बहस हो। क्या आप इसके लिए तैयार हैं?

रामदेव: हम हर चुनौती के लिए तैयार हैं। हम उनको नीचा नहीं दिखाना चाहते। हम उनसे यही कहते हैं कि ऐलोपैथी की जितनी जरूरत है, उतना ही उपयोग करो। इमरजेंसी के लिए, सर्जरी के लिए, बीमारियों को कंट्रोल करने के लिए ऐलेपैथी की आवश्यकता है तो उसे अपना लीजिये। उन्होंने टीबी, पोलियो का भी इलाज ढूंढ लिया है। उसके आगे उनके पास कुछ है नहीं।

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सवाल: हमारे वेदों में एक वेद है, जिनमें मानव शरीर और जीवन के उपचार के लिए प्राकृतिक प्रद्धति की औषधियों का वर्णन है। वह कौन सा वेद है और उसमें किस किस रोग का कैसे कैसे निदान किया गया है, यह भी बताया गया है। क्या इसे हमारे ऋषि -मुनियों को रिसर्च पेपर नहीं माना जाना चाहिए। क्या आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान से प्रमाणित नहीं किया जा सकता। अगर कर सकते हैं तो आयुर्वेद के सभी लोग मिलकर करते क्यों नहीं ?

रामदेव: देखो, अथर्वेद आयुर्वेद का मूल है। हमारे चार वेद मूल हैं। अथर्वेद में वन औषधियों. शारीरिक, मानसिक और अति मानस रोगों का भी वर्णन है। समस्या यह है कि ये हमारे ऋषियों के ज्ञान को प्रमाण मानते ही नहीं हैं। भारत के डॉक्टर भी ऋषियों के ज्ञान में प्रमाणित नहीं मानते। ये तो एक तरह से दुराग्रह है, कुंठा है भारत के प्रति। इनसे मुक्त होना चाहिए।

सवाल: इसको आधुनिक विज्ञान से प्रमाणित क्यों नहीं किया जाता?

रामदेव: हमारे ऋषि मुनियों ने करीब एक हजार वनस्पतियों, जड़ी- बूटियों के जो भी गुण धर्म लिखे हैं, वे आधुनिक विज्ञान के सारे पैरामीटर पर 100 प्रतिशत खरे हैं। ये हमने कर के दिखा दिया है। इसके रिसर्च पेपर हमने अंतरराष्ट्रीय जनरल्स में प्रकाशित किए है। और अभी भी हमारा रिसर्च चल रहा है। पतंजलि के पास दुनियां को सबसे बड़ा रिसर्च सेट अप है। इसी के आधार पर हम अपनी बात कह रहे हैं।

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सवाल: आचार्य बालकृष्ण जी ने एक बात कही कि भारत मे क्रश्चयनिटी फैलाने के मकसद से आपको और आयुर्वेद को टारगेट किया जा रहा है। क्या आप इससे सहमत हैं? इसका आधार क्या है?

रामदेव: आईएमए को हम इसलिए टारगेट नहीं करना चाहते क्योंकि यह अंग्रेजों के समय का बना एनजीओ है। इसमें प्रारंभ से ही ईसाई मत को मानने वाले लोगों का प्रभुत्व है। इससे भी हमें आपत्ति नहीं है। लेकन वह जब यह कहते हैं कि इस समय कनवर्जन का सबसे बड़ा मौका है। आईएमए के मंच का उपयोग करें और लोगों को अपने मजहब की तरफ आकर्षित करें। किसी भी संस्था के अध्यक्ष को ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए। हमने कभी भी इस तरह की बातें नहीं की। कभी धर्म परिवर्तन की बात भी नहीं की। मैने जीवन परिवर्तन की बात की। यह तो ओझापैथी हो गई। आईएमए का अध्यक्ष यह कहे कि हम कनवर्जन में भरोसा रखते हैं। वे ऐलोपैथी को ओझापैथी बनाने पर क्यों तुले हैं?

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सवाल: आप पर 1000 करोड़ की मानहानि का नोटिस भेजा गया है। 15 दिनों में आपको अपने बयान का खंडन लिखित रूप करने और इसका विडियो भी जारी करने को कहा है। क्या आप ऐसा करने जा रहे हैं?

रामदेव:  1000 करोड़ का मानहानि तो मुझे करना चाहिए। क्योंकि कौन सा आदमी ऐसा है जिसकी एक हजार करोड़ की कीमत होगी।

सवाल: आप पर देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की जा रही है। ये विवाद कहां जा रहा है? इसके परिणाम क्या होंगे?

रामदे‍व: यदि स्वामी रामदेव देशद्रोही है तो देशभक्ति की परिभाषा क्या है? मैंने करीब 20 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रूप से अपने शिविरों के माध्यम से योग सिखाया है। सवा सौ करोड़ लोग मेरे योग-आयुर्वेद से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभान्वित हुए हैं। इन लोगों को शांति दी है, रोगमुक्त किया है। उनके जीवन में प्रेरणा दी है। उनके जीवन में प्रकाश दिया है। मैं यह कहना चाहता हूं कि यदि स्वामी रामदेव कोरोड़ों लोगों की सेवा कर और भारत माता के गीत गा कर भी देशद्रोही है तो देशभक्त कौन होगा? आरोप लगाने वालों के लिए कहना चाहूंगा कि जिनकी देशद्रोही की दृष्टि है उनकी जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि।

सवाल: उनकी मांग है कि कोरोनिल के जो भ्रामक विज्ञापन हैं, उन्हें 72 घंटे के अंदर हटा दिये जाएं। इसमें क्या कहेंगे?

रामदेव: कोई भी भ्रामक विज्ञापन नहीं है। कोरोना की दवाई के रूप में अबतक कोरोनिल को ही मान्यता मिली है। अपने आपको सर्वशक्तिमान मानने वाली माडर्न साइंस ने अब तक कोरोना की दवाई नहीं खोजी है। मेरा प्रतिप्रश्न यह है कि ये पेरासिटामोल क्यों दे रहे हैं? क्या इसका क्लिनिकल ट्रायल हुआ है? मेरा मानना है कि एक भी दवाई का क्लिनिकल कंट्रोल ट्रायल नहीं हुआ है। बहुत खतरनाक बात कह रहा हूं। कहीं ऐसा तो नहीं कि कोरोना मैनेजमेंट के लिए जो दवाइयां दी जा रही है उन्हीं से इम्यूनिटी कम होकर लोगों में बैक्टीरिया, फंगस हो रहा हो।

शरीर के अंदर एंटीबॉडीज का जो पूरा का पूरा तूफान खड़ा हो रहा है यह भी दवाओं के रिएक्शन से ही हो रहा है। मैं आरोप नहीं लगा रहा हूं। यह सवाल है। इस पर शोध होना चाहिए। इस पर गंभीर रूप से सोचना चाहिए। अनुसंधान के कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए। बिना क्लीनिकल कंट्राल ट्रायल के ऐलोपैथी में दवाई दी जा रही है। इसके तात्कालिक और दीर्घकालिक क्या दुष्प्रभाव हो रहे हैं। मैं कोई भ्रम नहीं फैला रहा हूं। इन प्रभावों को लेकर ऐलोपैथी को दोबारा सोचना चाहिए। उनको आत्म मूल्यांकन करना चाहिए।

सवाल: क्या किसी चिकित्सा पद्धति को स्टूपिड या दिवालिया साइंस आप कह सकते हैं? और क्या कोई आयुर्वेद को सुडो साइंस कह सकता है।

रामदेव: बिलकुल नहीं कहना चाहिए। ना तो आयुर्वेद को सुडो साईंस कहना चाहिए और ना ऐलोपैथ को स्टूपिड साइंस कहना चाहिए। मेरा यह वक्तव्य नहीं था। मैं इसे अपना विचार नहीं मानता। किसी ने मुझे व्हाट्सएप भेजा। मैं उसे पढ़ रहा था। इसके बावजूद मैंने खेद जता दिया। अपना वक्तव्य भी वापस ले लिया। फिर, क्या वे स्वामी रामदेव को फांसी पर लटकाना चाहते हैं? हद होती है। हमने यह बात खत्म कर दी। हां, प्रश्न मैंने जरूर पूछे। प्रश्न पूछना प्रगतिशील समाज की पहचान है। इसमें मैंने क्या अनसाइंटिफिक कर दिया।

सवाल: स्वामी जी ऐसा तो नहीं, कि पहली बार आपके बयान को लेकर विवाद हुआ है। पहले भी आपके बयानों पर विवाद होता रहा है। जैसे कालेधन पर, राजनीतिक मुद्दों पर। कौन हैं वे लोग, जो विवाद खड़ा कर देते हैं और क्यों?

रामदेव: भारत में पांच तरह की ताकतें हैं। उसमें एक है भारत और भारतीयता विरोधी ताकतें। वो मुझे पसंद नहीं करती। मुझसे नफरत करती है। क्योंकि उन्हें भारत और भारतीयता पर गौरव पसंद नहीं है। उनकी ऐसी ट्रेनिंग हुई है। उनके भीतर एक कुंठा है। उनको द्वेष है। नफरत है उनको भारत से। जिनको भारत से नफरत है, उनको रामदेव से कैसे प्यार हो सकता है? दूसरा, पूरा ड्रग इंडस्ट्रीज है। ड्रग माफिया कहो या फार्मा इंडस्ट्रीज कहो। यह काफी शक्तिशाली है। तीसरी सो कॉल्ड जो कम्यूनिस्ट हैं। ये लोग, पता नहीं क्यों, मेरी जान के दुश्मन बने हैं।

सवाल: यही लोग कहते हैं कि पतंजलि की दवाओं की बिक्री कम हुई है। आप अपनी दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए यह सब कर रहे हैं। क्या ऐसा कुछ है?

रामदेव: मैं अगर ये कहूं कि पतंजलि की दवाओं की बिक्री बढ़ गई तो इनको मिर्ची लगेगी। क्योंकि ऐलोपैथी में कोविड बीमारी का क्योर नहीं था। कोविड होने के बाद पूरी आयुर्वेद इंडस्ट्री का लगभग सौ प्रतिशत ग्रोथ हो गया। आयुर्वेद की छोटी-छोटी कंपनियां भी 25 से 100 फीसदी की ग्रोथ पर है। यह आरोप निराधार है। 

सवाल: आरोप है कि आपने बीमारियों और इलाज को लेकर जो दावे किये है वह अवैज्ञानिक है। आप कैंसर के इलाज का दावा करते हैं। तो आपको इसकी खोज के लिए नोबल पुरस्कार मिलना चाहिए। क्या? कोई ऐसे केसेस है जिनके कैंसर ठीक हुए हैं?

रामदेव: कैंसर ठीक हुए हैं। ऐसे 1000 से ज्यादा केस हैं। मेरे पास योग के करीब 10 करोड़ से ज्यादा लोगों का डेटा उपलब्ध है। आयुर्वेद का भी करीब 5 करोड़ लोगों का डेटा है। हर तरह का डेटा बेस हमारे पास उपलब्ध है। ये कहते हैं नोबल पुरस्कार मिलना चाहिए, पर नोबल पुरस्कार में भी लॉबिंग होती है। अगर ईमानदारी से पुरस्कार दिया जाये तो स्वामी रामदेव को अलग- अलग 10 नोबल पुरस्कार दिए जाने चाहिए। अलग- अलग खोज के लिए। जिनमें हैपेटाइटिस, फैटी लीवर और लिवरसोरोसिस के लिए मिलना चाहिए। बीपी को क्योर करने के लिए। हमने योग से ठीक कर दिया। मैंने प्रोस्टेट केंसर को 10 दिनों में क्योर कर दिया।

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अस्थमा, आर्थराइटिस के लिए नोबल मिलना चाहिए। मैंने मेंटल डिसऑर्डर का एक सस्टेनेबल ट्रीटमेंट खेाज लिया है। इसके लिए मुझे नोबल मिलना चाहिए। योग कराके मानव का शारीरिक परिवर्तन किया है। करोड़ों लोगों की जीवन शैली बदली है। नॉन वायलेंस की प्रतिष्ठा की। मजहब, जाति, हर तरह के भेदभाव को तोड़कर मैंने सभी को एकत्व सहअस्तित्व में बांधा। यह एक नोबल कार्य है। मेरे लिए नोबल पुरस्कार से बढ़ कर करोड़ो लोगों का प्यार है। किसी नोबल पुरस्कार विजेता से ज्यादा पूरी दुनिया मुझे जानती है।

सवाल: स्वामी जी। क्या विदेशों में भी योग और आयुर्वेद बहुत प्रचलित है।

रामदेव: विदेशों में योग और आयुर्वेद बहुत लोकप्रिय हो रहा है। और आने वाले 25-50 सालों में आयुर्वेद से ऐलोपैथी रिप्लेस हो जाएगी।

सवाल: क्या आप मानते हैं कि ये फार्मा कंपनियों की बिजनेस की लड़ाई है?

रामदेव: यह बिजनेस की लड़ाई नहीं, मेरे सत्य की लड़ाई है। बिजनेस में मैं उनसे कैसे जीत सकता हूं। फार्मा कंपनी वाले 200 लाख करोड़ का काम पूरी दुनियां में करते हैं। आर्थिक धरातल पर हम इनसे नहीं जीत सकते। सत्य, सेवा और न्याय के धरातल पर ही हम जीतेंगे। भ्रातियां फैलाकर ये लोग मेरे ऊपर केस ठोकने की बात तो करते हैं। फार्मा इंडस्ट्री और ड्रग माफिया के खिलाफ 2 से ज्यादा पुस्तकें अमेरिका में बड़े डॉक्टरों के द्वारा लिखी गई है। क्या इनके ऊपर भी ये लोग मुकदमा करेंगे। उन पर बैन लगवाएंगे? उनको भी मानवता का शत्रु घोषित करेंगे?

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सवाल: आपके विरोधी आपको कहते हैं कि आपको योग गुरु कहा जाए या विवादों का गुरु कहा जाए या विवादों का बाबा रामदेव कहा जाए? आपको क्या कहा जाए? निदान क्या है? ये जो झगड़ा खड़ा हुआ है इसका हल करने का रास्ता क्या है?

रामदेव: मैं स्वामी रामदेव हूं। मैं अपने आपको ऋषि परंपरा का, योग- आयुर्वेद और नेचुरोपैथी और सनातन संस्कृति का प्रतिनिधि और उत्तराधिकारी मानता हूं। मेरी विरोधियों की अनर्गल बातें मेरे व्यक्तित्व और मेरे योगदान को नहीं बदल सकती। जो मेरे ऊपर छींटाकशीं करे रहे हैं, जरा पूछा जाए कि उनका राष्ट्र निर्माण में सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक और अध्यात्मिक क्षेत्र में क्या योगदान है?

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