Thursday, Aug 11, 2022
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कोरोना काल में समझ आई पर्यावरण संरक्षण की अहमियत : परिहार

  • Updated on 6/5/2022

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। कोरोना काल में हमें पर्यावरण संरक्षण की अहमियत समझ में आई है। लोगों ने तुलसी, एलोवेरा के पौधे लगाने शुरू कर दिए हैं और ऑक्सीजन उत्सर्जित करने वाले पौधों को लगाने की होड़ लग गई है जबकि आदिकाल से ऐसे औषधीय पौधे लगाने पर जोर दिया जाता रहा है। उक्त बातें गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (आईपीयू) में विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान आईपीयू के कुलसचिव शैलेंद्र सिंह परिहार ने कही। इस दौरान डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया की कार्यक्रम प्रमुख डॉ. सजल वोहरा, वल्र्ड ऐनिमल प्रोटेक्शन इंडिया के कंट्री डायरेक्टर गजेंद्र कुमार, डब्ल्यूएपी की ओर से निधि मोहन, प्रो. रीटा सिंह व प्रो. पी भट्टाचार्य भी मौजूद रहे।
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अडैप्ट टू ग्रीन थीम पर लघु वृतचित्र भी दिखाया गया
इस अवसर पर आईपीयू ने प्लास्टिक से बने बेकार के सामानों को चुन-चुनकर पूरे परिसर से हटाया। यही नहीं ऐसे खाद्य सामान की प्रदर्शनी लगाई गई जो बने तो प्लांट से थे पर नॉनवेज जैसा स्वाद दे रहे थे। इस दौरान अडैप्ट टू ग्रीन थीम पर एक लघु वृतचित्र भी दिखाई गई व दर्जन औषधीय पौधें कैंपस में लगाए गए। परिहार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को आज की भागम भाग की जिंदगी में आउट ऑफ फोकस न होने दें, इसे अपने दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। प्रतिदिन किए गए छोटे-छोटे प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव हो सकता है। उन्होंने कहा कि आईपीयू के कुलपति पद्मश्री प्रो. महेश वर्मा के प्रयासों से आज द्वारका कैंपस पूरी तरह ग्रीन कैंपस में तब्दील हो गया है।

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