Sunday, Oct 02, 2022
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दूरी का माप बदला तो लोग भूल गए कोस मीनार 

  • Updated on 4/27/2022

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। एक कहावत काफी मशहूर है कि कोस-कोस पर पानी बदले, आठ कोस पर बानी। लेकिन क्या कभी आपने इस कोस का मतलब समझने की कोशिश की है। नहीं, तो हम बताते हैं कि कोस दूरी को मापने की एक इकाई होती थी, जिससे यात्रियों को पता चलता था कि वो कितनी दूरी पर या किस इलाके में मौजूद हैं। यात्रियों की सहूलियत के लिए एक तय दूरी पर कोस मीनार बनाई जाती थी। लेकिन जब दूरी मापने का तरीका बदला तो लोग इस कोस मीनार को भी भूल गए। वक्त के थपेड़ों और लोगों की निरसता के चलते कई जगहों पर कोस मीनार गायब हो गई या टूट गई तो कई राज्यों में लोगों ने कोस मीनार पर अवैध कब्जा कर लिया। लेकिन दिल्ली की एकमात्र कोस मीनार को अब साउथ दिल्ली नगर निगम ने संरक्षित करने का फैसला लेते हुए, हाल ही में जारी अपनी संरक्षित इमारतों की सूची में जारी किया है। परंतु आपको ये मालूम है कि ये कोस मीनार कहा स्थित है और इसे किसने बनाया है। तो आइए हम बताते हैं इससे जुड़ा इतिहास।
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चिडिय़ाघर में स्थित है कोस मीनार
वर्तमान में दिल्ली में कोस मीनार चिडिय़ाघर के बीचों-बीच स्थित है। जोकि शेरशाह सूरी की राजधानी पुराना किला के करीब ग्रैंड ट्रांक रोड पर स्थित है। गोल आकार में बनी इस कोस मीनार की ऊंचाई करीब 30 फीट है और इसे लाल ईंटों व चूना पत्थरों से बनाया गया है। ये यात्रियों को रास्ता दिखाया करती थी। लेकिन सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि दिल्ली का चिडिय़ाघर धूमने आने वाले पर्यटकों को भी इतिहास में प्रमुख स्थान रखने वाली कोस मीनार की अधिक जानकारी नहीं है। कभी शेरशाह सूरी के शासनकाल में इन्हीं कोस मीनारों को देखकर सैनिकों को राजधानी व जहां भी उन्हें भेजा जाता था उस स्थान का वो पता लगा पाते थे। सही मायने में यह मुगलों द्वारा प्रयोग में लाया जाने वाला मुख्य मार्ग था, जिससे वो दिल्ली से लाहौर तक आया-जाया करते थे।
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शेरशाह सूरी ने करावाया था निर्माण
बता दें कि शेरशाह सूरी ने अपने शासनकाल (1540-45) में जब ग्रैंड ट्रांक रोड का निर्माण करवाया तो यात्रियों को सड़क की दूरी व किस जगह वो खड़े हैं इसकी जानकारी देने के लिए दिल्ली, करनाल, कुरूक्षेत्र, पानीपत, लुधियाना, अंबाला, पेशावर, अमृतसर व दिल्ली-आगरा राजमार्ग पर कोस मीनार का निर्माण करवाया था। 


भारत का चमत्कार कहलाती थीं कोस मीनार
शेरशाह सूरी या उसके बाद आने वाले कई यूरोपीय यात्रियों ने अपने संस्मरण में कोस मीनार का जिक्र किया है। सर थॉमस रो जोकि एक यूरोपीय यात्री थे उन्होंने कोस मीनारों को भारत का चमत्कार बताया है। जबकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) इसे भारत की राष्ट्रीय संचार प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग बताता है।
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जाने एक कोस मीनार से दूसरे मीनार की दूरी
संस्कृत में कोस की दूरी का अर्थ एक योजन का एक चौथाई कहा गया है जो दूरी को मापने की एक प्राचीन भारत की इकाई है। जोकि करीब 2 मील या 3.22 किलोमीटर दूरी होती है। यानि एक कोस मीनार से दूसरी कोस मीनार की दूरी 3.22 किलोमीटर की थी। 

जाने भारत में कितनी बची हैं कोस मीनार
वर्तमान में भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व इकाईयों की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली को अपना चुका है। ऐसे में संचार का प्रमुख साधन होने के बाद भी कोस मीनारें लोगों की जरूरतों ही नहीं बल्कि स्मृतियों से भी गायब हो गई हैं। बता दें कि वर्तमान में एएसआई की कुछ वर्षों पहले जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में करीब 110 कोस मीनारें बची हैं। जिसमें सर्वाधिक मीनारें हरियाणा में हैं जिनकी संख्या 49 है। इसके अलावा लुधियाना में 5, मथुरा में 9 है। 
 

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