Wednesday, Jul 06, 2022
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जींद में धरना खत्म हुआ तो गाजीपुर बॉर्डर पर क्यों भावुक हो यह शख्स, जानिए पूरी कहानी

  • Updated on 12/14/2021

नई दिल्ली/टीम डिजीटल। मंगलवार को हरियाणा के जींद में बद्दोवाल टोल पर राकेश टिकैत ने जैसे ही धरना खत्म करवाया। गाजीपुर बॉर्डर पर एक शख्स अचानक भावुक हो उठा। जींद के गांव पोंकरी खेडी के रहने वाले और भाकियू के जींद जिला प्रेस प्रवक्ता रामराजी दुल बीते 3 फरवरी से गाजीपुर बॉर्डर पर धरने का हिस्सा हैं। इससे पहले वह टीकरी बॉर्डर पर धरना दे रहे थे। लेकिन रामराजी दुल का नाता इस आंदोलन से कहीं ज्यादा बाबा टिकैत से है। वह उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं। जो चौधरी महेन्द्र टिकैत के साथ 1999 में उस यूरोपीय दौरे का हिस्सा थे। जहां भारतीय किसानों ने डब्ल्यूटीओ का विरोध किया था। जर्मनी में बाबा टिकैत का हुक्का सुलगाते अपना फोटो वो आज भी अपने सीने से लगाकर रखते हैं।

जींद में अग्रेज आए थे मदद मांगने

रामराजी दुल बताते हैं कि 20 फरवरी 1999 को जींद में ही उस रैली का आयोजन हुआ था। जिसमें अंग्रेज भारत के किसानों से मदद मांगने आए थे। जिसके बाद किसानों ने यूरोप जाकर प्रदर्शन करने का संकल्प लिया था। जिसके बाद 20 मई 1999 को वह बाबा टिकैत के साथ यूरोप के लिए रवाना हुए। उस वक्त हवाई जहाज में हुक्का ले जाने को लेकर काफी विवाद हुआ था। लेकिन बाबा टिकैत हुक्का अपने साथ ले जाकर ही माने थे। रामराजी के पास भी अखंड ज्योति के रखरखाव का जिम्मा है। 28 जनवरी की घटना के बाद वह जींद से 2 क्विंटल घी इसी अखंड ज्योति के लिए लेकर अपने साथ आए थे। अब आंदोलन की जब समापन की ओर है तो वह बार-बार भावुक हो जाते हैं। वह जींद में जल रही एक और अखंड ज्योति की शाखा के साथ बुधवार को सिसौली जाएंगे। 

पिता ने दिया बलिदान तो बेटे आगे बढाया संघर्ष 
इस साल का पहला दिन कड़ाके की ठंड के बीच गाजीपुर बॉर्डर से पहली बार खबर आई कि एक किसान ने आंदोलन के दौरान दम तोड़ दिया। बागपत के रहने वाले गलतान सिंह ने 1 जनवरी 2021 को अपने प्राण गंवा दिए। उनके साथ वहां मौजूद बेटा मोनू बड़े भारी मन से अपने पिता के पार्थिव शरीर को लेकर चला गया। लेकिन पिता की मौत के 2 महीने बाद मोनू 6 ट्रैक्टरों के साथ वापस लौटा और फिर से आंदोलन के समर्थन में जुट गया। मोनू तभी से लगातार गाजीपुर बॉर्डर पर है और आज वापस अपने घर लौटेगा। मोनू का कहना है कि किसानों की जीत ही उनके पिता के लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। किसान संतुष्ट होकर वापस जा रहे हैं। इससे उनके पिता की आत्मा को शांति मिलेगी। 
 

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