Saturday, Apr 20, 2019

लोकसभा चुनाव: त्रिशंकु संसद हुई तो इन क्षेत्रीय दलों पर होगा खास ध्यान

  • Updated on 4/15/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कुछ चुनावी सर्वेक्षणों में अनुमान लगाया गया है कि लोकसभा चुनाव (Lok Sabha elections) में भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले राजग को बहुमत से कुछ कम सीटें मिल सकती हैं। यदि यह अनुमान सही होता है तो केंद्र में सरकार के गठन में क्षेत्रीय दलों (Regional parties) की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी।

वाईएसआर कांग्रेस, टीआरएस, बीजद और सपा-बसपा गठबंधन पर रहेगा विशेष ध्यान

इसे लेकर वाईएस जगनमोहन रेड्डी (YS Jagan Mohan Reddy) के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस (YSR Congress), के चंद्रशेखर राव (K Chandrasekhar Rao) के नेतृत्व वाली टीआरएस (TRS) (तेलंगाना राष्ट्र समिति), ओडिशा (Odisha) के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) की पार्टी बीजद (BJD) और बसपा-सपा (BSP-SP) गठबंधन पर विशेष ध्यान रहेगा। इन दलों ने राजग और कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग से बराबर दूरी बनाई हुई है।

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तृणमूल कांग्रेस और तेदेपा की भी केंद्र में सरकार के गठन में हो सकती है भूमिका

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) और आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) के नेतृत्व वाली तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की भी केंद्र में सरकार के गठन में भूमिका हो सकती है। बनर्जी और नायडू द्वारा भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने का भी प्रयास हो रहा है। इसे लेकर उन्होंने कांग्रेस से भी मेलजोल बनाया हुआ है।

एक ओर ममता बनर्जी भाजपा पर तीखा हमला बोल रही हैं, वहीं वह कांग्रेस को भी निशाना बना रही हैं। वहीं बसपा-सपा द्वारा भाजपा की कड़ी आलोचना तो की ही जा रही है, चुनाव पूर्व गठबंधन से अलग रखकर कांग्रेस को भी महत्व नहीं दिया गया है। ये क्षेत्रीय दल लोकसभा की 543 सीटों में से करीब 180 पर चुनाव लड़ रहे हैं।

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कितनी महत्वपूर्ण होगी क्षेत्रीय पार्टी की भूमिका

सरकार के गठन में उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होगी, यह उनके द्वारा जीती जाने वाली सीटों पर निर्भर करेगा। त्रिशंकु संसद (Hung Parliament) की स्थिति में बुहत सी संभावनाएं उत्पन्न हो जाएंगी। गैर-कांग्रेसी व गैर-भाजपाई दलों के नेता ऐसी स्थिति को पसंद कर सकते हैं। जगनमोहन रेड्डी ने इस महीने के प्रारंभ मेें कहा था कि वह त्रिशंकु संसद की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे कि उन्हें आंध्र प्रदेश के लिए बेहतर डील करने में मदद मिले।

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