Saturday, Nov 27, 2021
-->
iit delhi has developed multi usable ppe kits aljwnt

आईआईटी दिल्ली ने विकसित की कई बार इस्तेमाल योग्य पीपीई किट

  • Updated on 5/20/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ चिकित्सकीय सेवा में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी) दिल्ली के कपड़ा और फाइबर इंजीनियरिंग विभाग ने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) कवर ऑल विकसित की है।

यह बॉडी सूट ऐसा है जिसका 3 बार इस्तेमाल किया जा सकता है। आईआईटी (IIT Delhi) में इसे विकसित करने वाली टीम ने दावा किया है कि बाजार में मिल रहीं 500 ग्राम वजन तक की किट के मुकाबले ये काफी हलकी है। इस किट का वजन मात्र 300 ग्राम है। इस किट की बाहरी सतह पर पानी और तेल का कोई असर नहीं पड़ेगा।

कचरा मुक्त शहर की रेटिंग में दिल्ली को मिले 3 स्टार, जानें कौन से हैं 5 स्टार वाले शहर

कपड़ा व फाइबर इंजीनियरिंग विभाग आईआईटी दिल्ली के प्रो. एमिरेट्स डॉ. एसएम इश्त‍ियाक और उनके स्टूडेंट डॉ बिस्वारंजन दास साइंटिस्ट 'डी' व असिस्टेंट डायरेक्टर DMSRDE (DRDO) कानपुर ने पीपीई किट का ये एडवांस वर्जन तैयार किया है। ये पीपीई किट सरकार के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के सभी मानकों पर खरा उतरता है।

दिल्ली में कोरोना से कितनी मौत? सरकार की माने तो 106, जबकि दफनाए गए 410 ! रिपोर्ट तलब

डॉ  इश्तियाक ने कहा कि पीपीई कवर ऑल का उन्नत संस्करण जो हमने विकसित किया है वह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में एक सुधारित उत्पाद के रूप में उभरने के लिए तैयार है। ये कई विशेष कार्यात्मक सुविधाओं को बेहतर बनाता है, साथ ही अतिरिक्त सुविधा के साथ आवश्यकताओं को भी पूरा करता है।

बिना एसी के खिड़की डाउन करके चलेंगी ओला-उबर, राइड से पहले लेनी होगी मास्क सेल्फी

उन्होंने कहा कि इसमें बड़ी चुनौती ये रही है कि हम ऐसा पीपीई बनाएं जो ब्रीथेबल यानी सांस लेने में आरामदायक और सुकून पहुंचाने वाला हो । जो कोरोना वॉरियर इसे पहने उसके लिए हमने सुनिश्चित किया है कि सांस की पर्याप्त मात्रा उन तक पहुंच सके ताकि वह इसे पहनने के बाद भी अनुभव कर सकें।

यहां पढ़ें कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.