Friday, Apr 19, 2019

‘मुफ्त नशे व उपहार दे कर’ राजनीतिज्ञ खरीद रहे लोगों का ईमान

  • Updated on 3/30/2019

जब भी चुनाव निकट आते हैं तो सभी पाॢटयां मतदाताओं के लिए प्रलोभनों का पिटारा खोल देती हैं। जहां सत्तारूढ़ दलों की सरकारें कर्मचारियों के लिए विभिन्न रियायतों की घोषणा करती हैं वहीं आम लोगों को टैलीविजन, साडिय़ां, लैपटॉप, मंगलसूत्र, चावल, आटा और यहां तक कि सैनेटरी नैपकिन तक जैसी चीजें मुफ्त बांटी जाती हैं।

चुनावों के अवसर पर लोगों को उपहार बांटने का सिलसिला दक्षिण भारत से शुरू होकर सारे देश में फैला। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री स्व. जयललिता के गुरु एम.जी. रामचंद्रन ने चुनावों से पूर्व मतदाताओं के लिए तरह-तरह के उपहार देने का सिलसिला सबसे पहले शुरू किया था। 

हालांकि चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों पर किसी भी रूप में मतदाताओं को उपहारों के वितरण पर रोक लगा रखी है परंतु राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों पर इसका कोई असर नहीं और यह सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है। 

अधिक बुरी बात यह है कि चुनावों में मतदाताओं को लुभाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा ऐलानियां तौर पर विभिन्न उपहारों की घोषणा करने के अलावा गुपचुप रूप से अन्य वस्तुओं के साथ-साथ तरह-तरह के नशे बांटने का सिलसिला भी जोरों से चल पड़ा है।

इस बारे में एसोसिएशन फार डैमोक्रेटिक रिफाम्र्स (ए.डी.आर.)  नामक एन.जी.ओ. द्वारा 534 लोकसभा क्षेत्रों में करवाए गए एक सर्वेक्षण में शामिल 2.7 लाख लोगों में से 41.34 प्रतिशत लोगों ने कहा कि चुनाव में शराब, नकदी और अन्य वस्तुओं का वितरण संबंधित उम्मीदवार के पक्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  

चुनाव आयोग ने 10 मार्च को देश में 11 अप्रैल से शुरू होकर 19 मई तक सात चरणों में करवाए जाने वाले लोकसभा एवं 4 राज्यों के विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी।

इसके साथ ही चुनाव आयोग ने चुनावों में काले धन का इस्तेमाल पकडऩे और लोगों को अनुचित रूप से उपहार देने पर रोक लगाने के लिए देश में हजारों प्रेक्षक तथा चलती-फिरती निगरानी टीमें तैनात कर दी थीं ताकि निष्पक्ष चुनावों को सुनिश्चित किया जा सके।

परिणामस्वरूप चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की तिथि 10 मार्च से 28 मार्च तक देश में मतदाताओं को लुभाने के लिए बांटी जाने वाली 673 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की वस्तुएं चुनाव आयोग ने जब्त की हैं। 

इनमें 202 करोड़ रुपए नकद, 113 करोड़ रुपए मूल्य की शराब और 163 करोड़ रुपए की विभिन्न प्रकार की 2420.15 किलो नशीली वस्तुएं, 173 करोड़ रुपए की मूल्यवान धातुएं सोना-चांदी आदि तथा ट्रकों में लदी 21 करोड़ रुपए की अन्य वस्तुएं शामिल हैं।

2014 के चुनावों की तुलना में यह बरामदगी खतरनाक हद तक अधिक है। उन चुनावों में कुल 313 करोड़ रुपए मूल्य की वस्तुएं ही जब्त की गई थीं।

10 से 28 मार्च की अवधि के बीच सर्वाधिक 92.45 करोड़ रुपए मूल्य के नशीले पदार्थ पंजाब में और इसके बाद 19.86 करोड़ रुपए मूल्य के नशीले पदार्थ उत्तर प्रदेश में पकड़े गए। पंजाब में 26 मार्च तक पुलिस ने तस्करी के 44 मामलों में 58 लोगों को गिरफ्तार करके 14084 लीटर अवैध शराब जब्त की। 

जब्त किए गए नशों में हैरोइन, अफीम और ब्राऊन शूगर से लेकर तनाव दूर करने वाली (एंटी डीप्रैसेंट) दवाएं तक शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान चुनाव आयोग ने 17 करोड़ रुपए मूल्य की नशीली वस्तुएं ब्राऊन शूगर, स्मैक, अफीम, गांजा, कोकीन, हैरोइन व अन्य तनाव दूर करने वाली दवाएं जब्त की थीं।

नशाबंदी वाले राज्यों गुजरात में चुनाव आयोग ने 26 मार्च तक 4.77 करोड़ रुपए मूल्य की 1.74 लाख लीटर शराब और बिहार में 20 लाख रुपए मूल्य की शराब जब्त की है। झारखंड, मेघालय, मिजोरम में अभी तक एक करोड़ रुपए की नशीली वस्तुएं जब्त की गई हैं।  

उक्त बरामदगी से स्पष्टï है कि न सिर्फ चुनावों के दौरान मतदाताओं को सब तरह के उपहार देने का सिलसिला अत्यधिक बढ़ चुका है बल्कि इससे यह भी स्पष्टï होता है कि नशे के लालच में लोग सारे उसूल भूल बिकने के लिए तैयार हो जाते हैं। 

यह बरामदगी और बढ़ेगी क्योंकि अभी तो मतदान की प्रक्रिया सम्पन्न होने में लगभग 50 दिनों का समय पड़ा है लिहाजा संबंधित अधिकारियों को इस मामले में और सख्ती बरतने की आवश्यकता है ताकि इस खतरनाक रुझान पर रोक लगाई जा सके।                                                                                                                               —विजय कुमार

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