Monday, Mar 25, 2019

6 अलगाववादियों की सुरक्षा ली वापस, जानिए कौन हैं ये अमन के सौदागर!

  • Updated on 2/18/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू-कश्मीर में मीरवाइज उमर फारूक समेत छह अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा रविवार को वापस ले ली गई। यह फैसला पुलवामा आतंकवादी हमले के मद्देनजर लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि मीरवाइज के अलावा अब्दुल गनी भट, बिलाल लोन, हाशिम कुरैशी, फजल हक कुरैशी एवं शबीर शाह को दी गई सुरक्षा वापस ले ली गई है।

इन नेताओं को दी गई सुरक्षा को किसी श्रेणी में नहीं रखा गया था लेकिन राज्य सरकार ने कुछ आतंकवादी समूहों से उनके जीवन को खतरा होने के अंदेशे को देखते हुए केंद्र के साथ सलाह-मशविरा कर उन्हें खास सुरक्षा दी थी। हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने 1990 में उमर के पिता मीरवाइज फारूक की तथा 2002 में अब्दुल गनी लोन की हत्या कर दी थी। पाकिस्तान समर्थक नेता सैयद अली शाह गिलानी एवं जेकेएलएफ के प्रमुख यासिन मलिक को कोई सुरक्षा नहीं दी गई थी। 

जिन छह अलगाववादी नेताओं से सुरक्षा वापस लेने की बात सामने आई है ये सभी पिछले कई सालों से राज्य व केंद्र सरकार से केवल इस बात की सौदेबाजी करते रहे हैं कि ये आतंकियों से बातचीत में मध्यस्थता कर सकते हैं, पर ऐसा हो नहीं रहा। आईये जानते हैं कौन हैं ये अमन के सौदागर?

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फजल हक कुरैशी
आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस (एम) का नेता है। 4 दिसम्बर 2009 को उसकी हत्या का प्रयास किया गया था। 70 के दशक में अलगाववादी गतिविधियों में रहा। गिरफ्तार हुआ। 1975 में जब कश्मीर एकॉर्ड लागू हुआ तो सभी मुकदमे वापस ले लिए गए। 80-90 के दशक में आतंकियों से जुड़ा रहा। 1991 में गिरफ्तार हो गया और लंबे समय तक जेल में रहा। हिजबुल का पदाधिकारी भी रहा। 

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अब्दुल गनी बट
प्रोफेसर है और मुस्लिम कांफ्रेंस कश्मीर के अध्यक्ष हैं। एकीकृत हुर्रियत कांफ्रेंस के चेयरमैन भी रहे हैं। मीरवाइज वाली हुर्रियत से जुड़े रहे हैं और उसके प्रवक्ता भी हैं। आतंकियों ने उनके भाई की हत्या कर दी थी। 

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हाशिम कुरैशी
कट्टर आतंकी संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के संस्थापकों में से एक। 1984 में फांसी चढ़ाए गए मकबूल बट का नजदीकी है। इसने 1971 में इंडियन एयरलाइंस के विमान गंगा को हाईजैक कर लाहौर में उतारा था। 1994 में जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक लिबरेशन पार्टी का गठन किया। काफी समय वह पाकिस्तान में रहा फिर हालैंड चला गया और 20 साल पहले भारत लौटा। 

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बिलाल गनी लोन
पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन व जे एंड के सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहे सज्जाद गनी लोन के भाई हैं। पीपुल्स कांफ्रेंस का गठन गनी के पिता अब्दुल लोन ने 1978 में किया था। उनकी आतंकियों ने हत्या कर दी थी। 2002 में हुए चुनाव में अलगाववादी खेमे में विवाद हुआ तो हुर्रियत दो फोड़ हो गई और पीपुल्स कांफ्रेंस भी बिलाल व सज्जाद में बंट गई। 

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मीरवाइज उमर फारुक
आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी गुट के चेयरमैन हैं। उनके पिता मौलवी फारुक की 1990 में हत्या कर दी गई थी। दुनिया के 500 प्रभावशाली मुसलमानों में उनकी गिनती होती है। सबसे ज्यादा सुरक्षा उमर को ही दी गई है। डीसीपी रैंक का अफसर उनकी सुरक्षा देखता है। इसके स्टाफ के पास आईपैड व आईफोन रहते हैं। डेढ़ दर्जन नौकर हैं। आलीशान घर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अखरोट की लकड़ी से बना फर्नीचर घर में है। 

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शब्बीर शाह
इसका पहलगाम में होटल है। जिसकी कीमत 3 से 5 करोड़ के बीच है। नेशनल इंवेस्टिगेटिव एजैंसी के डोजियर में हुर्रियत नेता शाह के पास सर्वाधिक, लगभग 19 संपत्तियां हैं। होटल, प्लाट व दुकानें इसमें शामिल हैं। शब्बीर को कश्मीर का मंडेला कहा जाता है। कई बार जेल गए हंै। 2016 के बाद से आतंकी फंडिंग के आरोप में तिहाड़ में बंद हैं। परिवार को छह पुलिसकर्मियों की सुरक्षा है और एक वाहन भी सरकारी मिला हुआ  है। 

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