Friday, May 27, 2022
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in the 365 of 2021, only 29 days could take clean air.

2021 के 365 में केवल 29 दिन ही स्वच्छ हवा ले सके राजधानी वासी

  • Updated on 1/27/2022

नई दिल्ली/पुष्पेंद्र मिश्र। राजधानी दिल्ली के 34 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों से जनवरी का जो वायु स्वच्छता सूचकांक मौसम विभाग को मिल रहा है वह गंभीर से बहुत खराब श्रेणी में दर्ज हो रहा है। राजधानी में 2050 के बाद जनवरी 2022 में सर्वाधिक बारिश भी दिल्ली के वातावरण को सांस लेने योग्य स्वच्छ नहीं बना सकी। राजधानी में रहने वाले लोगों को पूरे वर्ष में मिलने वाले कुल सांस लेने योग्य दिनों की बात करें तो यह 2019 में 23 दिन, 2020 में 50 दिन व 2021 में मात्र 29 दिन रहे हैं।

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2020 के लॉकडाउन में साफ हुई हवा 2021 में फिर हो गई खराब 
दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति पर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट के अविकल सोमवंशी कहते हैं कि दिल्ली में एक बार फिर से पीएम 2.5 का वार्षिक स्तर 2020 के मुकाबले बढ़ गया है। जोकि चिंताजनक है। 2020 में जहां पीएम 2.5 का वार्षिक स्तर 97 हो गया था वह 2021 में बढक़र 109 पहुंच गया है। पुराने आंकड़े में 12 अंक की बढ़ोत्तरी हुई है। ऐसे हालात जनवरी 2022 के पहले हफ्ते तक जारी रहे हैं। जबकि यही पीएम 2.5 2019 में 110 के वार्षिक स्तर पर था। कोविड-19 के कारण लगे लॉकडाउन ने इसमें 2020 में जो सुधार किया था वह 2021 में बरकरार नहीं रह सका। 

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2021 में 3 महीने से अधिक बहुत खराब श्रेणी में रही हवा 
हालांकि दिल्ली में रहने वाले लोगों को 2021 में 2019 के मुकाबले प्रदूषण के अति गंभीर श्रेणी वाले कम दिनों का सामना करना पड़ा। 2019 में वातावरण अति गंभीर श्रेणी में वर्ष में 36 रहा था वहीं 2021 में यह घटकर वर्ष में 27 दिन रहा। हालांकि लॉकडाउन के कारण 2020 में मात्र 20 दिन ही अति गंभीर श्रेणी में दर्ज किए गए थे। अविकल के मुताबिक दिल्ली में नवम्बर से जनवरी तक प्रति वर्ष प्रदूषण बहुत खराब की श्रेणी में रहता है।

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बहुत खराब प्रदूषण स्तर से दिल्ली को फरवरी में राहत मिलने की उम्मीद
फरवरी में इससे राहत मिलनी शुरू हो जाती है। 2021 में प्रदूषण के कारण बहुत खराब दिनों की संख्या में भी बीते वर्षों की अपेक्षा वृद्धि देखने को मिली है। 2019 में जहां मात्र 72 दिन ही बहुत खराब की श्रेणी में दर्ज थे यह संख्या 2021 में बढक़र 94 दिन हो गई है। अविकल कहते हैं कि सांस लेने योग्य अ'छे दिनों की संख्या में गिरावट हुई है। ये सभी अ'छे दिन भी मानसून के महीनों के बीच के हैं।
 

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