Thursday, May 19, 2022
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In the meeting of Chief Ministers, PM Modi said - take care of people''s livelihood

मुख्यमंत्रियों की बैठक में PM मोदी ने कहा- लोगों की आजीविका का रखें ध्यान

  • Updated on 1/14/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को राज्यों से अपील की वे कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर कोई भी रणनीति बनाते समय इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि सामान्य लोगों की आजीविका व आर्थिक गतिविधियों को कम से कम नुकसान हो और अर्थव्यवस्था की गति भी बनी रहे। सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेस के जरिए संवाद के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के अन्य स्वरूपों के मुकाबले ओमीक्रोन का संक्रमण ‘कई गुना’ तेजी से बढ़ रहा है और देश के वैज्ञानिक व स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ इसका लगातार अध्ययन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘यह बात साफ है कि हमें सतर्क रहना है, सावधान रहना है। भय का वातावरण ना बने, इसका भी ध्यान रखना ही होगा।’ उन्होंने कहा कि आने वाले त्योहारों के मौसम के मद्देनजर लोगों के साथ ही प्रशासन की भी मुस्तैदी में कमी नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘संक्रमण को हम जितना सीमित रख पाएंगे, परेशानी उतनी ही कम होगी।’

महामारी से लड़ने  के लिए भारत की तैयारियों का विस्तृत ब्योरा देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के नए स्वरूप ओमीक्रोन से लड़ने के अलावा देश को इस वायरस के भविष्य में सामने आने वाले किसी भी स्वरूप से निपटने के लिए भी तैयार रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘कोरोना से इस लड़ाई में हमें एक और बात का बहुत ध्यान रखना होगा। अब हमारे पास लड़ाई का दो वर्ष का अनुभव है। देश की तैयारी भी है। सामान्य लोगों की आजीविका और आर्थिक गतिविधियों को कम से कम नुकसान हो। अर्थव्यवस्था की गति भी बनी रहे। कोई भी रणनीति बनाते समय हम इन बातों को ध्यान में रखें।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि इसलिए स्थानीय स्तर पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करना बेहतर होगा। उन्होंने कहा, ‘जहां से संक्रमण के अधिक मामले आ रहे हैं... जहां जहां से ज्यादा से ज्यादा और तेजी से मामले आ रहे हैं, वहां जांच हो, यह सुनिश्चित करना पड़ेगा। इसके अलावा हमें सुनिश्चित करना होगा गृह पृथकवास में भी ज्यादा से ज्यादा उपचार हो।’ ज्ञात हो संक्रमण के तेजी से बढ़ रहे मामलों को देखते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में राज्यों द्वारा तरह- तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। कई राज्यों ने रात्रीकालीन कर्फ्यू लगाए हैं तो कुछ राज्यों ने सप्ताहांत कर्फ्यू  घोषित किए हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा कि घरों में पुथकवास से जुड़े दिशानिर्देशों को सरकारें जारी करती रहे और इसमें समय समय पर सुधार भी करें। उन्होंने कहा कि इस दौरान ‘टेस्टिंग, ट्रैकिंग और ट्रीटमेंट (परीक्षण, निगरानी और उपचार)’’ की व्यवस्था जितनी बेहतर होगी उतना ही अस्पतालों में जाने की आवश्यकता कम होगी। देश में जारी टीकाकरण अभियान का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अग्रिम मोर्चे के र्किमयों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों को एहतियाती खुराक जितनी जल्दी लगेगी, उतना ही देश के स्वास्थ्य देखभाल ढांचे पर कम बोझ पड़ेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कि आज भारत लगभग 92 प्रतिशत वयस्क जनसंख्या को टीकों की पहली खुराक दे चुका है और लगभग 70 प्रतिशत लोगों को दोनों खुराक दे चुका है। इतना ही नहीं, सिर्फ 10 दिनों के भीतर ही भारत अपने लगभग तीन करोड़ किशोरों का भी टीकाकरण कर चुका है। कोरोना के खिलाफ जीत का विश्वास प्रकट करते हुए उन्होंने कहा, ‘यह भारत के सामथ्र्य को दिखाता है और इस चुनौती से निपटने की हमारी तैयारी को भी दिखाता है।’

उन्होंने शत- प्रतिशत टीकाकरण के लिए ‘हर घर दस्तक’ अभियान को और तेज करने पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के अधिकतर विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का कोई भी स्वरूप हो टीका ही ‘सबसे कारगर हथियार’ है और भारत में बने टीके तो दुनिया भर में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘यह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।’

वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से हुए इस संवाद में राज्यों में कोरोना के संक्रमण और इसके मद्देनजर उनकी तैयारियों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्रियों ने अपने- अपने विचार भी प्रस्तुत किए। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया, कैबिनेट सचिव राजीव गौबा के अलावा विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों व केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्रियों ने कोविड-19 की लगातार लहरों के दौरान उनके नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री को उनके समर्थन और मार्गदर्शन एवं केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की गई धनराशि के लिए धन्यवाद दिया, जो राज्यों में स्वास्थ्य देखभाल की अवसंरचना को बढ़ावा देने में बहुत सहायक रही। बैठक में मुख्यमंत्रियों ने बिस्तरों की संख्या, ऑक्सीजन की उपलब्धता आदि में वृद्धि जैसे कदमों के माध्यम से संक्रमितों के बढ़ते मामलों से निपटने की तैयारियों के बारे में बात की।

पीएमओ के मुताबिक कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु में संक्रमितों की संख्या के बढऩे और अपार्टमेंट में संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए किए गए उपायों के बारे में जानकारी दी वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने आगामी उत्सवों के कारण राज्य में संक्रमितों की संख्या में संभावित वृद्धि और इससे निपटने के लिए प्रशासन की तैयारी के बारे में चर्चा की।तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा कि राज्य इस कोविड-लहर के खिलाफ लड़ाई में केंद्र के साथ खड़ा है।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कुछ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में फैली गलत धारणाओं के बारे में बात की, जिससे टीकाकरण कार्यक्रम में कुछ समस्याएं हुई हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने टीकाकरण अभियान में ‘कोई छूट न जाए’ को सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे विभिन्न कदमों के बारे में जानकारी दी वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से ऑक्सीजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए दी गयी धनराशि और अवसंरचना-समर्थन के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

पीएमओ के मुताबिक असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने कहा कि एहतियाती खुराक जैसे कदम आत्मविश्वास को बहुत अधिक बढ़ाने वाले साबित हुए हैं। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने कहा कि राज्य टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।     यह बैठक ऐसे समय में हुई जब देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। बृहस्पतिवार को देश में कोरोना वायरस के 2,47,417 नए मामले आए हैं। ओमीक्रोन स्वरूप के 5,488 मामले हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे तक अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश में ओमीक्रोन स्वरूप के एक दिन में 620 मामले आए जो अब तक का सर्वाधिक है। वर्ष 2020 में महामारी की शुरुआत होने के बाद से प्रधानमंत्री कई बार मुख्यमंत्रियों के साथ बैठकें कर स्थिति की समीक्षा कर चुके हैं।

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