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इस तरह से भारत ने किया ई-लोकतंत्र में प्रवेश, जानें बैलेट बॉक्स से EVM तक का पूरा सफर

  • Updated on 5/22/2019

नई दिल्ली/अनामिका सिंह। तकनीकी ज्ञान ने जीवन को काफी सुलभ कर दिया है चाहे वो इंसान के रोजमर्रा के घरेलू काम हो या फिर दफ्तर की कार्यप्रणाली। समय की बचत तकनीक के चलते ही संभव हो पाई है। तभी तो एक राज्य में करीब डेढ़ महीने तक होने वाले चुनावों में अब जहां चुनाव प्रचार का समय घटा है, वहीं तकनीक ने वोट डालने से लेकर वोट गिनने तक के समय को निश्चित कर दिया है।

1952 से शुरू हुआ बैलेट बॉक्स से मतदान अब ईवीएम के जरिए ई-लोकतंत्र में प्रवेश कर गया है। भारत में ई-लोकतंत्र तक की कहानी यदि आपको जाननी है तो उसके लिए आपको कश्मीरी गेट स्थित राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय में बने म्यूजियम में एक बार जरूर जाना चाहिए। इस म्यूजियम की शुरूआत साल 2016 में की गई थी। 

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मालूम हो कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए भारत में आम इंसान के हाथ में एक ताकत दी गई है, जिसे मताधिकार कहा जाता है। इसी मताधिकार को प्रयोग करने की कहानी आप कश्मीरी गेट स्थित दिल्ली चुनाव आयोग के कार्यालय में जाकर जान सकते हैं।

जहां आपको तरह-तरह के बैलेट बॉक्स से ईवीएम तक की इतिहास की पूरी जानकारी हो जाएगी। देश में लोकतंत्र की बहाली के साथ ही चुनावों में लगातार आने वाले बदलावों को यहां तस्वीरों व मॉडल के जरिए बताया गया है। यहां साल 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव के दौरान प्रयोग में लिया गया बैलेट बॉक्स जहां देखने को मिलेगा, वहीं उसके बाद साल 1962, 1977, 1984 व 1993 में बैलेट बॉक्स के बदलाव के इतिहास की संपूर्ण जानकारी मिलेगी।

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बता दें कि साल 2004 में हुए आम चुनाव में करीब 10.75 लाख ईवीएम के इस्तेमाल के साथ भारत ई-लोकतंत्र में प्रवेश कर गया था। हालांकि भारत में ईवीएम का सबसे पहला प्रयोग साल 1982 में केरल के परूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के 50 मतदान केंद्रों पर हुआ था, लेकिन 1983 में ईवीएम मशीनों को इस्तेमाल में नहीं लाया गया।

1988 में ईवीएम मशीन के प्रयोग को वैधानिक रूप देने के लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में नई धारा-61ए जोड़ी गई, जिसके बाद चुनाव आयोग को ईवीएम मशीनों के प्रयोग का अधिकार मिला।

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जब टेंट व झोपड़े में होता था मतदान
इस म्युजियम में कई राजनीतिज्ञों के इतिहास के साथ ही आपको पहले लोकसभा चुनाव से लेकर हाल ही में हुए चुनाव के कई चित्र देखने को मिल जाएंगे। मजे की बात यह है कि जहां आज मतदान के दौरान सुरक्षा इतनी चाक-चौबंद रखनी पड़ती है, वहीं उस दौरान मतदान झोपड़े में बने मतदान केंद्र पर हुआ 
करते थे। 

हर प्रत्याशी पर होता था एक बैलेट बॉक्स
म्युजियम में लगी फोटो से आपको एक हैरान कर देने वाली कहानी भी पता चलेगी कि किस तरह पहले एक प्रत्याशी के लिए एक बैलेट बॉक्स पोलिंग स्टेशन में रखा जाता था। यानि यदि 20 प्रत्याशी हुए तो हर पोलिंग स्टेशन पर 20 बॉक्स रखे जाएंगे और उनके सामने चुनाव चिह्न का चित्र लगाया जाएगा।

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