Monday, Nov 18, 2019
increase in number of arthritis patients in aiims

एम्स में बढ़ी ऑर्थराइटिस मरीजों की तादाद, प्रदूषण को बताया कारण

  • Updated on 11/5/2019

नई दिल्ली/ अंकुर शुक्ला। देश के सबसे बड़े अस्पताल (Hospital) और शोध संस्थान एम्स में ऑर्थराइटिस (गठिया) मरीजों की तादाद बढ़ गई है। डॉक्टरों (Doctor) के मुताबिक रियूमेटोलॉजी विभाग से संबंधित मरीजों की तादाद करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ा हुआ रिकॉर्ड किया गया है। 

प्रदूषण ने बढ़ाई 25 प्रतिशत मरीजों की संख्या 
प्रदूषण (Pollution) का स्तर बढ़ने से गठिया के मरीजों में जोड़ों में दर्द की शिकायत बढ़ रही है। एम्स (AIMS) के रुमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. उमा कुमार के मुताबिक दिवाली (Diwali) के बाद से एम्स में जोड़ों में दर्द की शिकायत के साथ आने वाले मरीजों की संख्या लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ गई है। डॉ. उमा के मुताबिक जिन मरीजों को पहले से गठिया है दवा लेने से उनमें दर्द और अन्य लक्षण कम हो जाते हैं, लेकिन प्रदूषण का बढ़ा हुआ स्तर ऐसे मरीजों के लक्षण बढ़ा देता है। बताया गया कि ऐसा पाया गया है कि लंबे समय तक प्रदूषण में रहने वाले लोगों को गठिया जैसी ऑटोइम्यून बीमारी (Autoimmune disease) का जोखिम भी बढ़ जाता है। 

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सांस फूलने की समस्या भी हुई तेज 
आमतौर पर प्रदूषण का स्तर बढऩे के साथ ही सांस और दमा के मरीजों को विशेष ख्याल रखने के परामर्श दिए जाते हैं, लेकिन राजधानी में प्रदूषण की स्थिति ऐसी हो चली है कि सामान्य लोगों को भी सांस फूलने की समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। 

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प्रोफेसर जुगल किशोर
विशेषज्ञों के मुताबिक पहले तो सांस फूलने की समस्या सामने आती है। फिर मरीज सर्दी-जुकाम और सिरदर्द की शिकायत करते हैं। सफदरजंग अस्पताल (Hospital) के सामुदायिक मेडिसिनि विभाग के निदेशक और एचओडी प्रोफेसर जुगल किशोर के मुताबिक प्रदूषित वातावरण में नेजल इंजरी को जोखिम रहता है। इसके कारण सांस से संबंधित परेशान, सर्दी-जुकाम आदि की समस्या हो सकती है। 

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खून में घुल जाते हैं सूक्ष्म कण 
डॉक्टर के मुताबिक पीएम 2.5 और एक माइक्रॉन जितने सूक्ष्म आकार के कण सांस के साथ शरीर के अंदर चले जाते हैं और खून में घुल जाते हैं। शरीर का प्रतिरोधी तंत्र इन्हें बाहरी तत्व समझकर इनसे लड़ने के लिए एंटी बॉडीपैदा करने लग जाता है। जिसके बाद यह एंटीबॉडी घुटनों या अन्य जोड़ों की कोशिकाओं पर भी हमला करने लगते हैं। नतीजतन, प्रदूषण के स्तर में बढ़ोत्तरी के बाद ऑर्थराइटिस के मरीजों में इससे संबंधित लक्षणों में तेजी आने लगती है। मरीजों में जोड़ों में दर्द (Joint Pain), जकड़न और सूजन की समस्या बढ़ जाती है। 

 

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