Thursday, May 23, 2019

मेट्रो Phase-4 को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार में बढ़ा टकराव, AAP ने बोझ बढने का लगाया आरोप

  • Updated on 4/3/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मेट्रो फेज चार को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली सरकार ने चौथे फेज के तहत बनने वाले कॉरिडोर के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित धनराशि देने से इंकार कर दिया है।

दिल्ली सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार ने चौथे फेज के तहत बनने वाले कॉरिडोर की निर्माण लागत में अचानक दिल्ली सरकार की हिस्सेदारी बढ़ा दी है जो संघीय ढांचे के खिलाफ  है।

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दिल्ली सरकार ने मंगलवार को कहा कि उसकी ओर से नहीं बल्कि केंद्र द्वारा दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण में अड़चन नहीं डाली गई है। परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने मेट्रो को वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 26 मार्च को ही 200 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं।

दिल्ली सरकार ने मेट्रो के चौथे चरण में केंद्र सरकार पर एकतरफा बदलाव कर देने का आरोप लगाया है। परिवहन मंत्री का कहना है कि तीनों कॉरिडोर के लिए पहले दिल्ली सरकार की तरफ  से लगभग 5000 से 5200 करोड़ रुपए की देनदारी तय हुई थी। लेकिन केंद्र सरकार ने इसमें अचानक बढ़ोतरी करके इसे 7800 करोड़ कर दिया है।

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बजट में मेट्रो कॉरिडोर के लिए जो धनराशि तय हुई थी दिल्ली सरकार उससे ज्यादा नहीं दे सकती। कहा गया है कि केंद्र ने मेट्रो के चौथे चरण के जिन 3 कॉरिडोर को मंजूरी दी है उसके भूमि अधिग्रहण का जिम्मा दिल्ली सरकार पर डाल दिया है जो उचित नहीं है।

परिवहन मंत्री ने कहा है कि दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण के सभी 6 कॉरिडोर को मंजूरी दी थी। लेकिन इसके बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली कैबिनेट द्वारा स्वीकृत 6 में केवल 3 कॉरिडोर को मंजूरी दी और इस बारे में दिल्ली सरकार से कोई सलाह-मशविरा तक नहीं किया गया।

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उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिए जाने के बाद भारत सरकार को एकतरफा बदलाव नहीं करना चाहिए। दिल्ली सरकार का स्पष्ट रुख है कि भारत सरकार को दिल्ली मेट्रो के सभी 6 कॉरिडोर को भी मंजूरी देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि चौथे चरण के अनुमोदन का मुद्दा काफी समय से चल रहा था। 

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