Wednesday, Oct 27, 2021
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मुख्यमंत्रियों से जुड़े मामले सुलटाने का कांग्रेस पर बढ़ा दबाव

  • Updated on 9/13/2021

नई दिल्ली/शेषमणि शुक्ल। भाजपा के एक के बाद एक मुख्यमंत्री बदलने के चलते कांग्रेस पर भी मुख्यमंत्रियों से जुड़े मामले सुलटाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़, राजस्थान और पंजाब में पार्टी के भीतर से ही मुख्यमंत्री बदलने की मांग उठ रही है। पंजाब में काफी हो-हल्ला हो चुका है, जहां अगले साल के शुरुआत में विधानसभा चुनाव है।

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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर को हटाने की मांग पार्टी के भीतर जोर पकड़ती दिख रही है। पार्टी का एक खेमा चुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू को सीएम चेहरा बनाने की मांग कर रहा है। राज्य के कुछ मंत्रियों ने इस मसले पर राज्य प्रभारी हरीश रावत से मुलाकात भी की थी। इन नेताओं का दावा था कि कैप्टन के नेतृत्व में चुनाव में उतरी पार्टी तो उसे भारी नुकसान तय है। उसके पीछे वे तमाम तर्क दे रहे हैं। हालांकि रावत ने यह कहते हुए मामले को टाल दिया कि वे पार्टी हाईकमान को इस बारे में अवगत कराएंगे। लेकिन महीना बीत जाने के बाद भी कोई समाधान नहीं दिखा।

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इसी तरह राजस्थान में पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमे के विधायक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को हटाने की मांग कर रहे हैं। बीते साल पायलट अपने खेमे के विधायकों के साथ मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावत भी कर चुके हैं, लेकिन हाईकमान की समझाईश और आश्वासन के बाद उन्होंने कांग्रेस में बने रहने का फैसला किया था। पायलट खेमे ने जिन मुद्दों पर असंतोष जताया था, उस पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। हाल के दिनों में कांग्रेस महासचिव संगठन, के.सी. वेणुगोपाल और पार्टी के राज्य प्रभारी अजय माकन ने जयपुर का दौरा कर विधायकों की राय ली थी। उसके बाद भी गहलोत और पायलट के बीच चल रही तनातनी का कोई समाधान नहीं दिखा।

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छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव के बीच का विवाद भी हाईकमान के पास ही अटका पड़ा। बघेल का ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद से सिंहदेव मुख्यमंत्री पद के लिए दावा ठोकते दिख रहे हैं। बात बढ़ते-बढ़ते दिल्ली तक आ पहुंची और राहुल गांधी को दखल देनी पड़ी। बघेल और सिंहदेव को दिल्ली तलब किया गया, लेकिन हाईकमान कोई फैसला ले पाता, इसके पहले ही बघेल ने विधायकों और अपने समर्थकों का हुजूम दिल्ली बुलाकर शक्ति प्रदर्शन कर दिया। उसके बाद से हाईकमान ने चुप्पी साध रखी है।

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राजस्थान और छत्तीसगढ़ में 2023 में विधानसभा चुनाव है, इसलिए अभी थोड़ा वक्त है, लेकिन पंजाब में तो विधानसभा चुनाव को अब छह-सात महीने ही बचे हैं। जल्द होई फैसला नहीं हुआ तो नेताओं की आपसी खींचतान कांग्रेस की सत्ता में वापसी की मंशा पर पानी फेर सकता है। जबकि इसके उलट सत्ता बनाए रखने को भाजपा ने पहले उत्तराखंड में चार महीने में तीन मुख्यमंत्री बदले, फिर कर्नाटक में बी.एस. येदुरप्पा से कुर्सी छीनी और अब गुजरात में विजय रुपानी को चलता कर दिया। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री बदलना सत्ता विरोधी लहर निष्प्रभावी करने की भाजपा की रणनीति का हिस्सा है। कांग्रेस ऐसी कोई रणनीति अपनाएगी या नहीं, यह देखना होगा।

 

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