Monday, Aug 02, 2021
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india after the highway now china also out of energy sector rkdsnt

हाइवे के बाद अब ऊर्जा क्षेत्र से भी चीन आउट

  • Updated on 7/3/2020


नई दिल्ली/शेषमणि शुक्ल। लद्दाख सीमा पर चल रहे तनाव के बीच भारत में चीन के बॉयकाट की प्रक्रिया और गति पकड़ती जा रही है। हाइवे प्रोजेक्ट के बाद अब भारत ने ऊर्जा सेक्टर में भी चीनी कंपनियों और चीनी उपकरणों पर बैन लगाने का फैसला लिया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए शुक्रवार को ऐलान किया कि ऊर्जा क्षेत्र में चीन के उपकरणों का उपयोग नहीं किया जाएगा। 

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उन्होंने राज्यों से चीन से इलेक्ट्रानिक उपकरणों का आयात नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान को भारत ने प्रायर रेफरेंस कंट्री की सूची में डालने का फैसला लिया है। उन्होंने राज्यों से भी इस दिशा में कदम उठाने को कहा है। उन्होंने कहा कि काफी कुछ हमारे देश में बनता है। इसके बावजूद हम बड़ी मात्रा में चीन से बिजली उपकरणों की खरीद करते हैं। लेकिन अब यह सब नहीं चलेगा। 

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चीन से ऊर्जा उपकरणों के आयात पर रोक का ऐलान

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के  आत्मनिर्भर भारत अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि अब भारत में बने उपकरणों का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाए। चीन से आयात कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उपयोग होने वाले चीनी उपकरणों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी बढ़ाने का फैसला किया है। कस्टम ड्यूटी में 25 फीसदी बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है, जो एक अगस्त से प्रभावी हो जाएगा जो अगले साल बढ़ा कर 40 फीसदी कर दिया जाएगा। मालूम हो कि देश में सौर ऊर्जा में लगने वाले उपकरणों का करीब 80 फीसद हिस्सा चीन और बाकी देशों से आयात किया जाता है। 

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2018-19 में ही करीब 71000 करोड़ का बिजली उपकरण विदेशों से आयात किया गया, जिसमें अकेले चीन से 21000 करोड़ का सामान आया था। आर.के. सिंह ने ऊर्जा क्षेत्र में साइबर अटैक के खतरे को लेकर भी आगाह किया।
लद्दाख के गलवान घाटी में 15-16 जून को चीनी सैनिकों के साथ हुई खूनी झड़प में 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद देश में चीन के सामानों के बहिष्कार की आवाज उठी है। कुछ संगठन इसे एक मुहिम के तौर पर चला रहे हैं। 

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वहीं केंद्र सरकार भी चीन को लेकर कई सख्त कदम उठा रही है। केंद्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दो दिन पहले ही हाईवे प्रोजेक्ट में चीनी कंपनियों की नो एंट्री का ऐलान किया था। इसके पहले रेलवे ने भी चीनी कंपनियों को बाहर करने के लिए अपनी कई निविदाएं निरस्त कर दी और बीएसएनएल-एमटीएनएल ने भी 4जी नेटवर्क में चीनी उपकरणों के उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया है और 5जी नेटवर्क में चीन की कंपनियों को शामिल होने से रोकने के लिए पूरी प्रक्रिया में ही बदलाव का फैसला लिया है।

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