Friday, Apr 10, 2020
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दुनिया को कोरोना में झोक ड्रोन्स से हिंद महासागर में नजर रख रहा था चीन, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

  • Updated on 3/26/2020

नई दिल्ली/ टिम डिजिटल। दुनिया में कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर लगभग 197 देश मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इस वायरस की शुरुआत चीन (China) में हुई थी। उस समय सभी देशों ने उनके साथ हमदर्दी जताई कई देशों ने तो संक्रमण का सामना कर रहे चीन की मदद के लिए व्यवस्थाएं भी की, जिसमें भारत भी शामिल था। वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी महामारी झेलने के बावजूद चीन की नजर 200 देशों पर बनी हुई थी हाल ही में इंटरनेशनल बिजनेस मैगजीन फॉर्ब्स ने दावा किया है कि चीन ने अपने रिसर्च शिप शियांगयग्याघोंघ को 6 दिसंबर के मध्य में करीब एक दर्जन अंडर वाटर ड्रोन हिंद महासागर में छोड़े थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले महीने ही चीन ने सेविंग ड्रोन वापस इकट्ठा कर लिया। इंट्रोंस ने हिंद महासागर में करीब 3400 से ज्यादा जगह की निगरानी रखी है।

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सब सबमरीन और एंटी सबमरीन वेलफेयर ऑपरेशन के लिए सर्वे
जब यह जानकारी भारत के पास पहुंची तो भारत ने चीन के इस हरकत का संज्ञान लिया है आमतौर पर इस तरह के अंडर वॉटर सर्वे समुद्र में खदान ढूंढने और अन्य व्यापारिक कार्यक्रमों के लिए किए जाते हैं, लेकिन चीन अब तक इस क्षेत्र में अपना प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि उसका यह सर्वे सब सबमरीन और एंटी सबमरीन वेलफेयर ऑपरेशन के लिए भी हो सकता है। चीन का प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय और शयन और इकोनामिक लॉजी रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए यह सर्वे करता रहता है रिपोर्ट के अनुसार चीनी अंडर वॉटर ड्रोन जाहिर तौर पर समुद्र विज्ञान से जुड़ा हुआ है।

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नौसेना की खुफिया जानकारी के लिए भी होता है ड्रॉन का इस्तेमाल
बता दें कि पहले भी चीन इस तरह से प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय एसोसिएशन और इकोनामी इकोलॉजी रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए ऐसे सर्वे करता रहा है रिपोर्ट के मुताबिक रिपोर्ट के अनुसार बताया जा रहा है कि चीनी यह चीनी अंडर वाटर ड्रोन समुद्र विज्ञान से जुड़ी डाटा को जुटाने में लगे थे और लगातार इस डाटा को शिव पर भेज रहे थे बता दें कि आमतौर पर ऐसे डाटा नौसेना की खुफिया जानकारी के तौर पर भेजा जाता है।

वहीं बात करें भारतीय नौसेना के सूत्रों की तो उनके मुताबिक फॉर्ब्स की इस रिपोर्ट की विश्वसनीयता का दावा नहीं कर सकते हैं, लेकिन भारत के नौसेना लगातार हिंद महासागर में चीनी रिसर्च स्विफ्ट को ट्रैक करने में लगी हुई है इसके लिए p8i long-range मैरिटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट के साथ युद्ध पोतों की भी सहायता ली जाती रही है।

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समुंद्र विज्ञान से जुड़े डाटा जुटाने में लगे हैं देश
एक रिपोर्ट के अनुसार किसी भी समय 4 से 5 चीनी रिसर्च शिप हिंद महासागर की निगरानी के लिए तैयार रहते हैं बताया जा रहा है कि यह सिर्फ लगातार समुंद्र विज्ञान से जुड़े डाटा जुटाने में लगे रहते हैं जिसमें वह इस तरह के डाटा जुट आते हैं, जैसे समुद्र का तापमान, इसमें नमक की मात्रा आदि। यह जानकारियां नेविगेशन और सबरीन से जुड़े ऑपरेशन में अहम होती हैं ऐसे जानकारियों से देश अपनी सब सबमरीन के लिए सबसे बेहतर रूट तलाश का है।

वहीं अन्य सूत्र की बात करें तो अगर कोई चीनी शिप सिर्फ भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र में आता है और संगठित सैन्य गतिविधियां करता पाया जाता है तो उसे चेतावनी के साथ सीमा से बाहर भेज दिया जाता है। बता दें कि भारत का जेड 200 नॉटिकल मील में फैला है 9 सितंबर 2019 में चीन के सियान वन रिसर्च विप को अंडमान निकोबार से पीछा करके बाहर कर दिया था।

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