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india and china will demolish new structures built after april may sohsnt

शांति बहाली प्रक्रिया पर आगे बढ़े भारत-चीन, अप्रैल-मई के बाद बने नए ढांचे करेंगे ध्वस्त

  • Updated on 11/13/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर भारत-चीन (India-China) के बीच जारी गतिरोध अब समाप्त होता नजर आ रहा है। यहां दोनों देश के सैनिकों के पीछे हटने को लेकर बातचीत का सिलसिला लगातार जारी है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील इलाके में अप्रैल और मई महीने के बाद बनाए गए ढांचों को हटाने पर सहमति व्यक्त की है। इसके साथ ही फिंगर क्षेत्रों में दोनों देशों के सैनिकों द्वारा किसी भी प्रकार की पैट्रोलिंग न किए जाने पर भी सहमित बनी है। 

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त्रि-स्तरीय प्रक्रिया पर बनी सहमति 

सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारत और चीन के बीच तनाव घटाने के लिए समयबद्ध तरीके से गतिरोध वाले सभी स्थानों से हथियारों और सैनिकों को पीछे हटाने के संबंध में त्रि-स्तरीय प्रक्रिया पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय हिस्से चुशूल में छह नवंबर को भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच आठवें दौर की उच्चस्तरीय सैन्य वार्ता के दौरान प्रस्ताव पर गहन विचार हुआ।

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तनाव कम करने की दिशा में हुई बातचीत- श्रीवास्तव
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने अपने जवाब में पिछले दौर की सैन्य वार्ता के बाद भारतीय और चीनी सेनाओं द्वारा जारी किए गए संयुक्त प्रेस बयान का हवाला दिया। उन्होंने कहा,'ठोस, समग्र और रचनात्मक बातचीत हुई और दोनों पक्षों ने भारत-चीन इलाके में पश्चिमी सेक्टर में एलएसी से लगे गतिरोध वाले सभी स्थानों पर तनाव कम करने के लिए बातचीत की।' श्रीवास्तव ने कहा, 'भारत और चीन के बीच सैन्य और राजनयिक माध्यम से संवाद बनाए रखने और वरिष्ठ कमांडरों की बैठक में हुई चर्चा को आगे बढ़ाने, लंबित मुद्दे के समाधान पर सहमति बनी है। वे जल्द ही अगले दौर की बैठक के लिए सहमत हुए।'

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अगले कुछ दिनों में होगी नौवें दौर की वार्ता
सैन्य स्तर पर नौवें दौर की वार्ता अगले कुछ दिनों में होने की संभावना है। पूर्वी लद्दाख में विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों में भारतीय सेना के करीब 50,000 जवान तैनात हैं क्योंकि गतिरोध सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के बीच हुई वार्ता के अब तक ठोस परिणाम नहीं निकल सके हैं। अधिकारियों के मुताबिक चीन ने भी इतने ही जवान तैनात कर रखे हैं। दोनों पक्षों के बीच मई की शुरुआत में गतिरोध आरंभ हुआ था। थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने बीते मंगलवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारतीय और चीनी सेना पूर्वी लद्दाख में सैनिकों के पीछे हटने और तनाव घटाने के संबंध में किसी ठोस समझौते पर पहुंचेंगी।

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