Monday, Jun 21, 2021
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चीन को साइड कर भारत बन सकता है सप्लाई चेन का पहिया मगर राह में हैं ये बड़ी बाधाएं

  • Updated on 5/27/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस के संकट के बीच दुनियाभर के देशों ने चीन से मुंह मोड़ लिया है। चीन को वैश्विक स्तर पर आलोचनाओं के साथ-साथ अब कारोबारी रूप से भी देश नजरअंदाज कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि दुनियाभर की कंपनियां चीन को छोड़ कर दूसरे देशों में इंवेस्ट करने की सोच रही हैं। इस बीच अनुमान है कि भारत चीन की जगह ले सकता है।

वहीँ, माना जा रहा है कि इस महामारी ने भारत को एक मौका दिया है कि ग्लोबल सप्लाई चेन का मुख्य हिस्सा बन सके लेकिन विशेषज्ञों की माने तो ये इतना आसान नहीं होगा इसके लिए भारत को कई बड़े बदलाव और मेहनत करनी होगी।

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भारत बड़ा बाजार
भारत कई मायनों में चीन से पीछे है लेकिन भारत के पास बड़ी जनसंख्या और बड़े बाजार हैं। भारत में ह्यूमन रिसोर्स की कमी नहीं है और भारत में कम इंवेस्ट करके ज्यादा कमाया जा सकता है। यहां के बाजार दूसरे देशों को अपनी फैक्ट्री लगाने को आकर्षित कर रहे हैं।

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चीन से उठेगी निर्भरता
चीन दुनियाभर के देशों का सप्लाई चेन है और बेहद जरूरी सामान सभी बड़े बड़े देशों को सप्लाई करता है, जिनमें भारत और अमेरिका भी शामिल हैं, लेकिन कोरोना ने चीन की इस भूमिका को बिगाड़ कर रख दिया है। विशेषज्ञों की माने तो कोरोना के कारण दुनियाभर के देश किसी एक देश पर निर्भर होने के नुकसान और उस पर से निर्भरता कम करने के बारे में सोचने पर मजबूर कर देगी।

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भारत के लिए ये 4 सुधार जरूरी
-भारत में जमीन अधिग्रहण और श्रमिक कानून में सुधार की मांग की गई है, ताकि विदेशी कंपनी इंवेस्ट कर सकें। दरअसल, भारत में काम जमाने के लिए दूसरे देश चाहते हैं कि भारत में जमीन के अधिकारों को लेकर आने वाले पेचीदगियां खत्म हों और श्रम कानून में सुधार किया जाए।

-भारत में बिजली की खपत और उसके दाम काफी ज्यादा हैं। इसके साथ ही माल ढुलाई की लागत भी अधिक है। कोई भी विदेशी कंपनी भारत आने से पहले चाहेगी कि इन दोनों मुद्दों पर सोचा जाए और लागत को कम करने पर सबसे पहले ध्यान दिया जाए।

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- विदेशी कंपनियां मानती है कि भारत ने अपने नेट वर्क को सुधारने के लिए काम किया है लेकिन इसे इंटरनेशनल लेवल का बनाने के लिए सड़क और कर सुधार की आवश्यकता है। ऐसा करने से विदेशी कंपनियों की कॉस्ट और सेविंग हो सकेगी।

-वर्ल्ड बैंक ने भारत को ‘आसानी से व्यापार’ करने वाले देशों की लिस्ट में जगह दी है लेकिन अभी भी भारत में काफी सुधार होना बाकी हैं। विशेषज्ञों की माने तो भारत को आगे भी बिजनेस करने की रैंकिंग में और सुधार करना होगा और इससे जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान देकर उनमें सुधार करना होगा।

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