Wednesday, Aug 04, 2021
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China को सबक सिखाने के लिए PM मोदी का लद्दाख जाना एक ट्रेलर, पूरी पिक्चर का सोच तिलमिलाया ड्रैगन

  • Updated on 7/4/2020

नई दिल्ली/प्रियंका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख दौरे के दौरान जिस तरह से गर्जना भरी है उसकी गूंज बीजिंग तक सुनाई दी है। भले ही पीएम मोदी ने अपने संबोधन के बीच चीन का एक बार भी नाम नहीं लिया लेकिन उसके बावजूद चीन को ये अच्छे से समझ में आ गया है कि भारत अब झुकने वाला नहीं है।

इसका पता इस बात से चलता है कि पीएम मोदी के लेह दौरे के बीच ही चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से ये बयान भी आ गया था कि दोनों देशों को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे सीमा पर हालत बिगड़ें।

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तिलमिला गया चीन
पीएम के संबोधन का असर इस कदर चीन पर पड़ा है कि चीन बौखला गया है। पीएम मोदी के इनडायरेक्ट शब्द चीन पर चोट कर गये और वो तिलमिला गया है। चीनी विदेश मंत्री ने इसकी भड़ास निकालते हुए भारत को नसीहत दे डाली। जबकि चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स को की खबरें पढ़ कर ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि तीर एक दम सही जगह बैठा है।

पीएम की रणनीतिक यात्रा
पीएम मोदी ने अचानक लेह जाने का नहीं सोचा था बल्कि ये सभी कुछ योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। आपको याद हो तो खबरों से ये बात बाहर आई थी कि लेह दौरे के एक दिन पहले ही पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से फोन पर बात की थी और इस बातचीत में एक  बड़े रक्षा सौदे को मंजूरी मिली थी। इस सौदे के तहत रूस से 33 नए लड़ाकू विमान खरीदे गए हैं। इसके बाद पीएम की यात्रा उन्हें जमीनी तौर पर सभी जानकारी और सेना की तैयारियों से अवगत कराती है।

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अमेरिका ने दिया साथ
इसी के साथ अमेरिका की तरफ से भारत के चीनी एप्स पर बैन लगाने पर तारीफ मिली। साथ ही अमेरिकी सीनेट में भारत को फिफ्थ जनरेशन के फाइटर प्लेन दिए जाने का बिल भी पेश हुआ। अमेरिका चाहता है कि भारत से उसके सम्बंध वैसे ही हों जाएं जैसे इजराइल और अमेरिका के हैं।

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इन घटनाओं पर भी डाले नजर
आपको शायद याद हो तो संयुक्त राष्ट्र में पहली बार भारत ने हांगकांग को लेकर बयान दिया था और उसी में चीन को भी खरी-खरी सुनाई थी। जापान और भारत की नौसेना ने संयुक्त युद्धाभ्यास किया था और फ्रांस भी राफेल की पहली खेप भेजने को है। ये भी याद होगा कि पीएम मोदी और ट्रंप के बीच फोन पर बात हुई थी और फिर अमेरिका ने एशिया के अपने मित्र देशों की मदद के लिए सेना तैनात करने की घोषण की थी।

इतना ही नहीं, उसके एक माह पहले  भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हिन्द महासागर में चीन की घुसपैठ को रोकने के लिए एक दूसरे के सैन्य ठिकानों को मुश्किल समय में इस्तेमाल करने का  ऐतिहासिक समझौता हुआ था।

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चीन की घेराबंदी
इन सभी घटनाओं को याद करते हुए ये समझा जा सकता है कि चीन की घेराबंदी अब चरम पर है और इसमें भारत का साथ अमेरिका, जापान, फ्रांस और कई मित्र देश दे रहे हैं। इतना ही नहीं, भारत की गर्जना से न सिर्फ चीन बल्कि टोक्यो, वाशिंगटन, पेरिस, केनबरा, ताइपेई तक सुनाई दे रही है। जैसा कि पीएम मोदी ने कहा कि ये विस्तारवाद का नहीं बल्कि विकासवाद का युग है। तो अब दुनिया देखेगी कि भारत चीन को उसी के हथकंडे से चारों खाने चित कर सकता है।

यहां पढ़ें भारत-चीन विवाद से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें

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