Friday, May 07, 2021
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भारत और नेपाल केे रिश्तें नया नक्शा आने से पहले कैसे रहे ?

  • Updated on 6/22/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत और नेपाल के रिश्ते आज अपने सबसे खराब दौर में से एक में है। हाल मे नेपाल ने भारत सरकार की चेतावनी के बाद भी भारत के उत्तराखण्ड राज्य के  लिपुलेख और कालापानी जैसे हिस्सों को नेपाल का हिस्सा बताकर एक नया विवादित नक्शा अपनी संसद से पास कर दिया है। जिससे दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं। लेकिन भारत और नेपाल के रिश्ते हमेशा ऐसे नहीं रहे हैं। भारत और नेपाल दो भाई की तरह है जो कभी लड़ते तो फिर एक साथ आ जाते हैं।  

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राजीव गांधी की भी मानी थी बात
इससे पहले भारत और नेपाल के बीच सभी तरह के सीमा विवाद का हल बात-चीत से निकलता रहा है। 1980 के दौरान तत्कालीन राजा बीरेन्द्र सिंह ने भारतीय सीमा के नजदीक 210 कि.मी. रोड़ बनाने के लिए पहले चीन को ठेका दिया था मगर जब बाद में प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इसे लेकर चिंता जताई थी तो उन्होंने यह ठेका भारत को दे दिया। 

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1962 चीन युद्ध में भी की थी मद्द
इसके अलावा 1962 के चीन युद्ध के दौरान नेपाल ने कालापानी क्षेत्र को अस्थायी तौर पर भारत को दे दिया था ताकि वह चीन को माकूल जवाब दे सके। ये सब चीजें बताती है कि भारत और नेपाल एक दूसर के रिश्ते शुरु से ही बेहद करीब रहे हैं और दोनों देश एक दूसरे की जरूरत को समझते भी हैं।  

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फिर भविष्य में सुधरेंगे रिश्ते
आजादी के बाद गंगा, जमुना, बागमती और काली नदी में बहुत पानी बह गया, पुराने मनोमालिन्य काफी मिट गए। जब 1962 में भारत पर चीनी हमला हुआ तो नेपाल नरेश ने भारत द्वारा लिपुलेख का वह इलाका अपने सैन्य बंदोबस्त के लिए इस्तेमाल करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई और इस बीच दोनों देशों के बीच धार्मिक पर्यटन, नेपाली राजवंश और भारत के रजवाड़ों के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते भी कायम रहे। जो भविष्य में फिर सुधरने की उम्मीद है।

 

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