Thursday, Apr 15, 2021
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ड्रैगन इस बार नहीं कर पाएगा कोई गुस्ताखी, भारतीय सेना ऐसे कर रही फिंगर 3 से निगरानी

  • Updated on 2/25/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। चीन (China)और भारत दोनों ने ही अपनी सेना को पूर्वी लद्दाख के पैंगौग इलाके से वापिस बुला लिया है। जिसके बाद वहां पर शांति का माहौल है लेकिन भारतीय सेना इस बार चीन पर भरोसा नहीं कर सकती है। इसलिए फिंगर 3 जहां पर भारतीय सेना अभी भी तैनात है वहां  से भारतीय जवानों ने पूरे इलाके पर पैनी नजर बना रखी है। 

चीन नहीं कर सकता कोई गुस्ताखी
भारतीय सेना ऐसा इसलिए भी कर रही है क्योंकि चीना के पिछले कारनामे हर किसी ने देखें है। इसलिए सेना इस बार चीन को गुस्ताखी करने का कोई मौका नहीं देना चाहती है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक फिंगर 3 की ऊची पहाड़ियों से सेना चोबीसों घंटे नजर रखे हुए हैं। इसके साथ ही दूरबीन और नाइट विजन उपकरण और अत्याधुनिक ड्रोन भी तैनात किए गए हैं।

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सेना प्रमुख ने कहा ये
 थल सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने बुधवार को कहा कि पैगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से भारत और चीन की सेनाओं के पीछे हटने से 'अंतिम परिणाम बहुत अच्छा' रहा और दोनों पक्षों के लिए यह लाभकारी स्थिति है। साथ ही उन्होंने जोर दिया कि अभी लंबा रास्ता तय करना है और अगला कदम तनाव कम करना है।उन्होंने कहा कि लद्दाख गतिरोध के दौरान चीन और पाकिस्तान के बीच 'साठगांठ' के कोई संकेत नहीं मिले लेकिन भारत ने केवल दो को ध्यान में रख कर नहीं बल्कि ढाई मोर्चे के लिए दूरगामी योजना बना रखी है। वह आधे मोर्चे का हवाला आंतरिक सुरक्षा के लिए दे रहे थे।     

दोनों पक्षों ने मिलकर काम किया
 उन्होंने कहा कि गतिरोध की शुरुआत से ही भारत की तरफ से सभी पक्षों ने मिलकर काम किया। नरवणे ने 'विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन' द्वारा आयोजित एक वेबिनार में कहा कि पूर्वी लद्दाख में लंबित अन्य मुद्दों के समाधान के लिए भी रणनीति बनायी गयी है। उन्होंने कहा कि सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू हो गयी लेकिन भरोसे की कमी है। सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया 10 फरवरी को शुरू हुई थी। उन्होंने कहा, 'जो भी हम कर रहे हैं हम सतर्क होकर कर रहे हैं। हमें सावधान रहना होगा। विश्वास की कमी है। जब तक विश्वास नहीं बनेगा, निश्चित तौर पर हमें सतर्क रहना होगा और एलएसी के दोनों ओर हर गतिविधि पर नजर रखनी होगी।'

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अभी तय करना है लंबा रास्ता
नरवणे ने कहा, 'हमें अभी लंबा रास्ता तय करना है। हमें तनाव घटाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। इसके बाद आगे के कदम उठाए जाएंगे।' उन्होंने कहा कि गतिरोध की शुरुआत से ही राजनीतिक स्तर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्षों से वार्ता की। उन्होंने कहा, 'हम सब साथ थे। हमने वह योजना तैयार की जिस पर हमने चर्चा की थी कि कैसे आगे बढ़ना चाहिए। जो भी योजना बनायी गयी थी, उसके नतीजे मिले हैं। अब तक हमने जो भी हासिल किया वह बहुत अच्छा है।

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पूरी हुई हथियार को पीछे ले जाने की प्रकिया
 पिछले सप्ताह दोनों देशों की सेनाओं ने ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से सैनिकों और हथियारों को पीछे ले जाने की प्रक्रिया संपन्न की। नरवणे ने कहा कि पूर्वी लद्दाख के क्षेत्र में देपसांग इलाके में, उत्तरी सीमा से लगे अन्य क्षेत्रों में कुछ मुद्दे बाकी हैं। उन्होंने कहा, 'लेकिन उसके लिए हमारे पास रणनीति है। क्या हमारे पास भविष्य में बातचीत करने के लिए कुछ भी है। हां, निश्चित तौर पर। लेकिन वह रणनीति क्या होगी और समझौते पर क्या प्रगति होगी, यह देखना होगा।'

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