Saturday, Jul 20, 2019

भारत-अमरीका कारोबार एक नाजुक मोड़ पर

  • Updated on 6/29/2019

जून को जापान के ओसाका में जी-20 सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi)और अमरीका (America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  (Donald Trump) के बीच वार्ता हुई, जिसमें अमरीका और भारत के बीच आयात शुल्क (Import duty) को लेकर भी बातचीत हुई। ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी को लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में जीत की बधाई दी। ऐसे में अब ये संकेत उभर रहे हैं कि भारत और अमरीका के बीच कारोबार को लेकर जो विवाद हैं, उनके लिए दोनों देश मिलकर समाधान खोजेंगे।
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गौरतलब है कि इस समय अमरीका की चीन के बाद अब भारत के साथ भी ट्रेडवॉर की आशंका बढ़ गई है। 27 जून को अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि भारत ने वर्षों से अमरीका के खिलाफ भारी आयात शुल्क लगा रखा है और पिछले दिनों इसे और बढ़ा दिया है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि भारत सीमा के आर-पार डाटा के प्रवाह को रोक रहा है और उसने ई-कॉमर्स पर जो सख्त नियम बनाए हैं, उससे भारत में अमरीकी कम्पनियों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। इसी तरह 26 जून को भारत आए अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा था कि आयात शुल्क के मामले पर भारत और अमरीका के बीच मतभेदों को दूर करना जरूरी है।  
भारत द्वारा लगाए गए शुल्क

उल्लेखनीय है कि लगभग एक वर्ष पूर्व भारत ने अमरीका से आयात होने वाली बादाम, अखरोट और दालों समेत 29 महत्वपूर्ण कृषि एवं औद्योगिक जिंसों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की जो घोषणा की थी, उसे 8 बार आगे टालने के बाद अब 16 जून से प्रभावी कर दिया गया है। इससे पहले अमरीका ने भारत से इस्पात एवं एल्युमीनियम आयात पर क्रमश: 25 प्रतिशत और 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया था। भारत ने अमरीका से शुल्कों में रियायत देने का आग्रह किया था लेकिन अमरीका ने ऐसी रियायत भारत को नहीं दी, जबकि मैक्सिको व कनाडा को दी गई है।  


भारत ने अमरीका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद भी पिछले एक वर्ष से लगातार काफी धैर्य दिखाया और उसे कोई न कोई रास्ता निकलने की उम्मीद थी लेकिन इस बीच 5 जून से अमरीका द्वारा भारत को सामान्य तरजीही व्यवस्था (जी.एस.पी.) के तहत दी जा रही आयात शुल्क रियायतें खत्म कर दिए जाने का कदम उठाया गया। ज्ञातव्य है कि जी.एस.पी. व्यवस्था के तहत अमरीका विकासशील लाभार्थी देश के उत्पादों को अमरीका में बिना आयात शुल्क प्रवेश की अनुमति देकर उसके आॢथक विकास को बढ़ावा देता है। इसी परिप्रेक्ष्य में भारत को वर्ष 1976 से जी.एस.पी. व्यवस्था के तहत करीब 2000 उत्पादों को शुल्क मुक्त रूप से अमरीका में भेजने की अनुमति मिली हुई थी। अमरीका से मिली व्यापार छूट के तहत भारत से किए जाने वाले करीब 5.6 अरब डॉलर यानी 40 हजार करोड़ रुपए के निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगता था।

 

आंकड़े बता रहे हैं कि जी.एस.पी. के तहत तरजीही के कारण अमरीका को जितने राजस्व का नुक्सान होता है, उसका एक-चौथाई भारतीय निर्यातकों को प्राप्त होता था। अमरीका की आपत्ति डोनाल्ड ट्रम्प ने बार-बार कहा कि भारत के  साथ आयात शुल्क रियायतों पर व्यापार एक मूर्खतापूर्ण कारोबार है। इसी परिप्रेक्ष्य में पिछले मई माह में अमरीका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस अमरीका की 100 कम्पनियों के प्रतिनिधियों के साथ भारत आए और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु सहित व्यापार संगठनों से उच्च स्तरीय बातचीत करके भारत द्वारा अमरीकी उत्पादों पर लगाए जा रहे अधिक आयात शुल्क पर जोरदार आपत्ति प्रस्तुत की। 

 


रॉस ने कहा कि भारत का औसत आयात शुल्क 13.8 फीसदी है। यह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा है। आयात शुल्क बाधाओं के कारण ही भारत अभी अमरीका का 13वां बड़ा एक्सपोर्ट मार्कीट है जबकि भारत का सबसे ज्यादा निर्यात अमरीका को होता है। स्थिति यह है कि  2018 में अमरीका का कुल व्यापार घाटा 621 अरब डॉलर रहा जिसमें से भारत के साथ उसका व्यापार घाटा 21 अरब डॉलर रहा। ऐसे में अमरीका भारत सहित उन विभिन्न देशों में अमरीकी सामान के निर्यातों में आ रही नियामकीय रुकावटों को दूर करना चाहता है ताकि अमरीका के व्यापार घाटे में कमी आ सके।

 


भारत का कहना है कि उसके राष्ट्रीय हित व्यापार के मामले में सर्वोच्चता रखते हैं। भारत के लोग भी जीवन जीने के बेहतर मानकों की अपेक्षा रखते हैं। यदि भारत अमरीका के सभी उत्पादों को आयात संबंधी मापदंडों की अवहेलना करते हुए आसानी से भारत में आने देगा तो उससे भारत के घरेलू उद्योग-कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, साथ ही भारत के सांस्कृतिक मूल्यों को भी ठेस पहुंचेगी। नि:संदेह इस समय अमरीका से जी.एस.पी. के तहत आयात शुल्क छूट समाप्त करने के बाद भारत से अमरीका को किए जाने वाले कुछ वस्तुओं के निर्यात अवश्य प्रभावित होंगे। 

 


निर्यात संबंधी चुनौती अमरीका द्वारा भारत से आयात को दी जा रही तरजीह बंद करने के बाद अब भारत से निर्यात किए जाने वाले कपड़े, रैडीमेड कपड़े, रेशमी कपड़े, इमिटेशन ज्वैलरी, प्रोसैस्ड फूड,  फुटवियर, प्लास्टिक प्रोडक्ट, कैमिकल प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग उत्पाद, हैंड टूल्स, साइकिल के पुर्जों जैसी औद्योगिक इकाइयों के सामने मुश्किलें मुंह बाए खड़ी हैं। इन उद्योगों में कार्यरत हजारों लोगों के समक्ष नौकरियां जाने की ङ्क्षचताएं भी खड़ी होंगी। निर्यात संगठनों की फैडरेशन फियो ने कहा है कि जी.एस.पी. के तहत लाभों के समाप्त होने के कारण ऐसी सुविधा प्राप्त भारतीय निर्यातकों को सरकार की वित्तीय मदद की जरूरत होगी तभी वे अमरीकी बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहेंगे। 

 


चाहे 27 जून को डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत द्वारा बढ़ाए गए आयात शुल्क पर आपत्ति उठाई है और डाटा संरक्षण पर भारत के कड़े रुख से नाराजगी जताई है, फिर भी, चूंकि अमरीका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार वाला देश है, अतएव भारत को उसके साथ कारोबार की विभिन्न संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए वाणिज्यिक और कूटनीतिक वार्ता के लिए कदम आगे बढ़ाने होंगे। हम आशा करें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ट्रम्प के साथ कारोबार संबंधों की ऐसी नई रणनीति पर आगे बढ़ेंगे जिससे भारत-अमरीका कारोबार बेहतरी की नई डगर पर आगे बढ़ सके।

      

भारत ने अमरीका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद भी पिछले एक वर्ष से लगातार काफी धैर्य दिखाया और उसे कोई न कोई रास्ता निकलने की उम्मीद थी लेकिन इस बीच 5 जून से अमरीका द्वारा भारत को सामान्य 
तरजीही व्यवस्था के तहत दी जा रही आयात शुल्क रियायतें खत्म कर दिए जाने का कदम उठाया गया। 
लेखक: डा. जयंतीलाल भंडारी

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