Thursday, May 23, 2019

रियायती जमीन पर बने स्कूलों को निर्देश, सरकार से पूछकर ही बढ़ेगी फीस

  • Updated on 4/5/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जो स्कूल सरकार द्वारा दिए गए रियायती दरों की जमीन पर बने हैं उन स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले दिल्ली सरकार से हरहाल में पूछना होगा। जांच में पाया कि 150 स्कूलों के पास सरप्लस पैसा है इसलिए उसी पैसे से टीचरों की सैलरी बढ़ाई जाए। यह बात दिल्ली सरकार के उप मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने कही। वह पत्रकारों से बात कर रहे थे। 

मनीष ने बताया, 325 स्कूल डीडीए की जमीन पर बने है। 265 स्कूल ने फीस बढ़ाने की मांग की। 60 स्कूलों ने आवेदन नहीं किया जबकि 32 स्कूलों ने अपनी मांग वापस ले ली। उन्होंने कहा, जिन स्कूलों ने सरकार से पूछे बिना फीस बढ़ोतरी की तो फिर सरकार उन स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।

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उन्होंने कहा, 233 स्कूलों की जांच की गई। इनमें पाया गया कि 150 स्कूलों के पास सरप्लस पैसा है। इसलिए वे उसी पैसे से टीचरों की सैलरी बढ़ाएं। इस बाबत आदेश 17 अक्तूबर 2017 को ही दिए जा चुके हैं। साफ कहा गया कि टीचरों की सेलरी बढ़ाई जाए लेकिन, स्कूल अपने फंड से ही दें।

मतलब ये की टीचर्स की सेलरी बढ़ाने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने कहा, मेरी जानकारी में आया है कि कई बड़े स्कूल हैं जो फीस बढ़ाने के लिए परिवारवालों पर दबाव बना रहे हैं।

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उन्होंने बताया, वसंत कुंज के एक स्कूल में 40 करोड़ रुपये सरप्लस है और भी कई स्कूल में करोड़ों सरप्लस हैं। जिनके पास सरप्लस है उन्हें ही फीस बढ़ाने से रोका गया है। प्राइवेट स्कूल सिस्टम भी दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। पर वो कमाई का जरिया नहीं हो सकता। हम ऐसा नहीं होने देंगे।

निजी स्कूलों की अंतरिम शुल्क बढ़ोतरी पर रोक
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आप सरकार (Aam Aadmi Party) की याचिका पर राष्ट्रीय राजधानी के निजी गैर वित्तपोषित स्कूलों द्वारा शुल्क में अंतरिम बढ़ोतरी पर 8 अप्रैल तक रोक लगा दी। आप सरकार ने अपनी याचिका में इन स्कूलों की अंतरिम शुल्क बढ़ोतरी को अनुमति देने के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी है।

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न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर और न्यायमूर्ति आई.एस. मेहता की पीठ ने नोटिस जारी करके ‘एक्शन कमेटी अनएडिड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स’ से जवाब मांगा। बड़ी संख्या में निजी स्कूल इस संगठन के सदस्य हैं।

दिल्ली सरकार ने बीते मंगलवार को उच्च न्यायालय में उसके एकल न्यायाधीश की पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें राष्ट्रीय राजधानी के निजी गैर वित्तपोषित स्कूलों को शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतन पर सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए शुल्क में अंतरिम बढ़ोतरी करने की अनुमति दी थी। 

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