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international day of democracy despite the obstacles the public believes in democracy

International Day of Democracy: बाधाओं के बावजूद जनता का कायम है लोकतंत्र पर विश्वास

  • Updated on 9/15/2019

नई दिल्ली/प्रियंका अग्रवाल। आजादी की लड़ाई के दौरान ही हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने लोकतांत्रिक सरकार की रूपरेखा बना ली थी। पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे असफल देशों के बीच आज 70 साल के बाद भी लोकतंत्र कायम है तो इसलिए कि वैशाली गणराज्य से लेकर महान अशोक के कल्याणकारी राज्य की अवधारणा तक भारतीय समाज में लोकतंत्र की जड़ें काफी गहरी हैं।

ऐसा नहीं कि लोकतंत्र की राह में बाधाएं नहीं आईं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा इमरजेंसी लगा कर संविधान द्वारा आम जनता को दिए गए मौलिक अधिकारों को खत्म कर दिया जाना हिंदुस्तान के लोकतांत्रिक इतिहास में काले अध्याय के तौर पर दर्ज हो चुका है। लेकिन इसके साथ ही दिल्ली के रामलीला मैदान से जय प्रकाश नारायण द्वारा सिंघासन खाली करो कि जनता आती है... का उद्घोष लोकतंत्र के प्रति आम आदमी के समर्पण को साबित करता है। 

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भारत के लोकतंत्र ने बदलते समय के साथ खुद को ढाला है। बीते कुछ समय से आप एक शब्द सुन रहे है लोकतंत्र की हत्या, संविधान की हत्या...। अक्सर अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में जब कोई बात अपने पक्ष में नहीं होती तो हम ऐसा जोर-जोर से चिल्लाने लगते हैं। खास तौर पर पिछले कुछ सालों ऐसा काफी देखने को मिला रहा है। निराशावादियों की माने तो कभी यह खतरे में आ जाता है और कभी इससे छेड़छेड़ हो जाती है। कभी लोकतंत्र की हत्या हो जाती है तो कभी किसी दिन को लोकतंत्र को काला दिन करार दिया जाता है। 

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इन सबके बावजूद देश के सबसे कमजोर और जरूरतमंद लोगों का इसमें विश्वास बरकरार है और लोकतांत्रिक सरकारें अपनी कल्याणकारी योजनाओं के सहारे देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में पड़ाव दर पड़ाव मंजिल की ओर बिना थके बढ़ती जा रही हैं। लोकतंत्र की ही महिमा है कि आज देश की आधी आबादी, समाज के दबे-कुचले तबके उन सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं जो हमारे पड़ोसी देशों के लोगों को मयस्सर तक नहीं है।

आजादी पाने के बाद पिछले 70 सालों में भारत ने बहुआयामी सामाजिक और आर्थिक प्रगति की है। वहीं भारत ने विश्व समुदाय के बीच एक आत्मनिर्भर, सक्षम और स्वाभिमानी देश के रूप में अपनी जगह बनाई है। सभी समस्याओं के बावजूद अपने लोकतंत्र के कारण वह तीसरी दुनिया के अन्य देशों के लिए एक मिसाल बना रहा है। उसकी आर्थिक प्रगति और विकास दर भी अन्य विकासशील देशों के लिए प्रेरक तत्व बने हुए हैं।

स्वतंत्रता के बाद भारत की शीर्ष 5 उपलब्धियां:

1. आधी आबादी की बढ़ी शक्तिः भारत की आजादी से लेकर पीएम पद तक हर जगह महिला ने अपनी सुझबूझ अपना लोहा मनवाया है। आजादी के बाद भारत दुनिया का ऐसा पहला देश बना है जिसकी प्रमुख एक महिला रहीं- श्रीमती इंदिरा गांधी। यहां तक कि हमारे यहां पर पंचायतों में भी महिलाओं ने बाजी मारी है। भारत का कोई ऐसा पद नहीं होगा जिस पर महिला ने काम नहीं किया होगा। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और नेता विपक्ष समेत भारत में महिलाओं ने कई उच्च सरकारी पदों पर काम किया है। भारत के इतिहास  में रानी लक्ष्मी बाई ने भी अपनी बहादुरी का परचम लहराया।

2. शिक्षा और डिजिटल इंडियाः 15 अगस्त 1947 को आजाद होने के बाद से ही भारत लगातार शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव करता आ रहा है। जिसके कारण भारत की साक्षरता दर 12 प्रतिशत से बढ़कर 74.04 प्रतिशत पहुंच गई है। भारत इस क्षेत्र में काफी तेजी से विकास कर रहा है। अब पुरुषों के साथ- साथ महिलाओं को भी इस क्षेत्र में बराबर का अधिकार दिया गया है। हमने डिजिटल के क्षेत्र में भी काम करना शुरु कर दिया। हमने अंतरिक्ष में भी प्रयोग करने शुरु कर दिए है। हाल ही में हमने चांद पर अपना चंद्रयान 2 भेजा है जो काफी हद तक सफल रहा।

3. अर्थव्यवस्था में हुआ काफी बदलाव: भारत अर्थव्यवस्था के मामले में एशिया में तीसरे नंबर पर आता है। हर साल भारत की अर्थव्यवस्था में काफी बदलाव होते रहते हैं। साल 2016 में हमारे देश की अर्थव्यवस्था 57 लाख करोड़ रुपये हो गई थी। हम हर जगह आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि हम जितना आत्मनिर्भर होंगे उतना ही हमारे देश का आर्थिक विकास होगा। भारत दाल के मामले में सबसे आगे है वहीं अगर चीनी की बात करें तो भारत चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

4. मतदान का अधिकारः भारत दुनिया का एक मात्र ऐसा देश है जहां हर उस व्यक्ति को वोट देने का अधिकार है जो भारत का नागरिक है। वहीं अगर अन्य देशों की बात करें तो अमेरिका में हर दूसरा व्यक्ति मतदान नहीं दे सकता है। अमेरिका में इस अधिकार को पाने के लिए सरकार द्वारातय किए गए कई पड़ावों को पार करना होगा। जब भारत आजाद हुआ तो भारत सरकार ने 560 रियासतों को अपने में मिला लिया जो उस वक्त दुनिया का सबेस बड़ा विलय था। इतने बड़े विलय होने के बाद भी हमारे देश में किसी तरह की हिंसा नहीं हुईं।

5. प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष के कार्यक्रमः रक्षा तकनीक और अंतरिक्ष तकनीक पर करीब-करीब शून्य आत्मनिर्भरता के बावजूद, आज हम इस क्षेत्र के सबसे उन्नत राष्ट्रों में से एक हैं। वर्ष 1975 में भारत ने पहले अंतरिक्ष उपग्रह का डिजाइन तैयार किया था। इस उपग्रह का नाम महान भारतीय ज्योतिषाचार्य और गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था। इसके अलावा मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने वाला भारत दुनिया का चौथा देश और अपने पहले ही प्रयास में सफल रहने वाला पहला देश बन चुका है। भारत ने अपने पहले ही प्रयास में चंद्रमा की पड़ताल के लिए भेजे जाने वाले चंद्रयान को लॉन्च करने में सफलता अर्जित की और चंद्रमा की मिट्टी में पानी के कणों की मौजूदगी की खोज भी की। घरेलू संचार के लिए उपग्रह विकसित करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया है। इन सभी कार्यों का श्रेय भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) को जाता है।

6. भारतीय सशस्त्र बलः आजादी के बाद हमने जिन क्षेत्रों में सबसे तेजी से विकास किया है, उनमें से एक है रक्षा क्षेत्र। भारत के पास दुनिया की सबसे चौथी ताकतवर सेना है। जिसमें 13 लाख से भी अधिक सैनिक है। जो किसी भी विषम परिस्थिति को भारत के अनुकूल कर सकती हैं। भारतीय सेना को जल, थल, वायु तीनों ही क्षेत्रों में महारथ हासिल है। इसके अलावा देश अपने बजट का बहुत बड़ा हिस्सा सेना के रख रखाव पर खर्च करता है, जो वर्ष 2018 में लगभग 2.3 लाख करोड़ के आस पास था। भारतीय सेना अपनी बहादुरी के अलावा अपनी दरियादिली के लिए भी जाती है और यही कारण है कि वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के शांति कार्यक्रम में सबसे ज्यादा भागीदारी भारतीय सेना की है।

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