Thursday, Feb 27, 2020
international monetary fund imf indian economy financial sector reforms

बढ़ते राजकोषीय घाटे पर IMF ने भारत को दी ये राय

  • Updated on 2/14/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भारत में अर्थव्यवस्था अपने बूरे स्तर से गुजर रहा है। जिसमें जल्द सुधार लाने की जरूरत है, जिससे कि मध्यावधि में ही स्थिति में सुधार लाया जा सके।

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) ने हाल ही में पेश किए गए बजट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रवक्ता गेरी राइस (Gerry Rice) ने कहा कि भारत का मौजूदा आर्थिक माहौल हमारे पूर्वानुमान की तुलना में कमजोर है।

उन्होंने कहा कि, भारत की अर्थव्यवस्था हमारे पुर्वानुमान की तुलना में कमजोर है। भारत को जल्द ही महत्वाकांक्षी संरचनात्मक और वित्तीय सुधार करने की जरूरत है, जिससे कि मध्यावधि में राजकोष बढ़े। इसके लिए भारत को एक रणनीति के तहत काम करना होगा।

भारत की GDP पर IMF के अनुमान के बाद मोदी के मंत्री गोपीनाथ पर करेंगे हमला- कांग्रेस

अर्थव्यवस्था में सुधार की कोशिश
बता दें कि भारत सरकार को अर्थव्यवस्था को लेकर तेजी से काम करना होगा। वित्त मंत्री निर्मला सितारमण ने एक फरवरी को लोकसभा में बजट पेश किया था। केंद्र सरकार ने इस बजट को बढ़िया बताते हुए निकट भविष्य में बड़े सुधार की आशा व्यक्त की थी। 

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के इस बयान से साफ होता है कि अब तक भारत सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए किए गए सभा प्रयास माकाफी है। बता दें कि सरकार टैक्स के जरिए राजस्व कमाती है, साथ ही खर्च भी करती है। 

जब सरकार का खर्च, राजस्व से बढ़ जाता है, तो उसे बाजार से अतिरिक्त राशि उधार लेना पड़ता है। सरकार की कुल कमाई और खर्च के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। यानी कि सरकार जो राशि उधार लेगी उसे ही राजकोषीय घाटा कहेंगे।  

IMF ने घटाई भारत की विकास दर, कहा- 4.8 रहने की उम्मीद

अर्थव्यवस्था पर पी चिदंबरम
बता दें कि इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ बयान दिया था। जिसके बाद विपक्ष ने सरकार को धेरे में लिया था।

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा था कि, आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ नोटबंदी की सबसे पहले निंदा करने वालों में से एक थी। मुझे लगता है कि हमें आईएमएफ और डॉ. गीता गोपीनाथ पर सरकार के मंत्रियों के हमले के लिए खुद को तैयार कर लेना चाहिए।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा था, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का रियलिटी चेक। 2019-20 में वृद्धि दर पांच फीसदी से कम 4.8 फीसदी होगी। कुछ कदमों के बाद भी विकास दर 4.8 फीसदी है। अगर यह और भी कम हो जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा। 

SBI ने दी GDP को लेकर बुरी खबर, कहा- 5 फीसद से भी कम हो सकती हैं ग्रोथ

आईएमएफ का अनुमान अर्थव्यवस्था पर डालेगा प्रभाव
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा, 'आईएमएफ ने भारत की जीडीपी विकास दर के अनुमान को घटाकर 4.8 फीसदी कर दिया है। उसका कहना है कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। पूरे देश में लोगों का विरोध प्रदर्शन से यह दिखता है कि मोदी जी और अमित शाह भारतीय लोकतंत्र पर बोझ हैं।'

दरअसल, आईएमएफ ने सोमवार को भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिये वृद्धि परिदृश्य के अपने अनुमान को संशोधित किया। इसके साथ ही उसने व्यापार व्यवस्था में सुधार के बुनियादी मुद्दों को भी उठाया। 

आईएमएफ के ताजा अनुमान के अनुसार 2019 में वैश्विक वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत, 2020 में 3.3 प्रतिशत और 2021 में 3.4 प्रतिशत रहेगी। मुद्राकोष ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को कम करके 2019 के लिये 4.8 प्रतिशत कर दिया है। उसने 2020 और 2021 में इसके क्रमश: 5.8 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.