Monday, Nov 29, 2021
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International webinar on the importance of teacher and literature, speakers shared views

शिक्षक और साहित्य की महत्ता पर हुआ अंतरराष्ट्रीय वेबीनार, वक्ताओं ने विचार  साझा किए

  • Updated on 9/6/2021


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक और साहित्य की महत्ता विषय को लेकर अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शिक्षक और साहित्य की भूमिका मानव जीवन में एक विशेष स्थान रखती है। शिक्षण और साहित्य देश, काल व वातावरण के साथ-साथ बदलता भी है। पर हर बदलाव बुरा नहीं कहा जा सकता। उत्थान फाउंडेशन के तत्वाधान में ऑनलाइन वेबिनार यूएसए से पूनम सिंघल ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि स्कूल चलाना एक बहुत अच्छा और सुखद अनुभव है। अलग-अलग राष्ट्रीयता के विद्यार्थियों के साथ शुरू-शुरू में कुछ समस्या तो आती ही है, परंतु धीरे-धीरे बच्चे घुलमिल जाते हैं।  
स्वीडन से इंडो-स्कैंडिक संस्थान के उपाध्यक्ष सुरेश पांडेय ने काव्य पाठ कर शिक्षकों को नमन किया।
वहीं यूके से अतिथि वक्ता शैल अग्रवाल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि शिक्षक ही उनकी प्रेरणा रहे हैं। कार्यक्रम संचालिका अरूणा घवाना ने नार्वे से साहित्यकार एम. शुक्ला जी का शुभकामना संदेश पढ़ा। साथ ही शिक्षक और साहित्य की महत्ता को स्वीकारा। कार्यक्रम में शामिल यूएसए से वक्ता श्रुप्ति पांड्या ने बतौर शिक्षिका अपने अनुभव साझा किए। दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डा जसवीर त्यागी ने काव्य पाठ कर कोविड के दौरान आनलाइन क्लास तथा छात्र और शिक्षक की मनोदशा का बखूबी वर्णन किया। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से असिस्टेंट प्रोफेसर एलआर नेगी ने साहित्य समाज की हर बुराई और समस्याओं पर अपने विचार साझा किये।
कार्यक्रम में मुंबई से असिस्टेंट डायरेक्टर विवेक शर्मा, देहरादून से सरोजिनी नौटियाल ने डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर अपना वक्तव्य पढ़कर गांधीजी को शिक्षक की भूमिका में रखकर कविता पाठ किया। दिल्ली से राहुल मित्तल कहा कि मीडिया एक प्रैक्टिकल विषय है इसलिए हमें विद्यार्थियों को कालेज के पहले वर्ष से ही अभ्यास शुरू कराना चाहिए। 

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