Monday, Jan 21, 2019

Interview 1: पार्टी मोदी के साथ, भले चर्चा गडकरी पर हो-राजीव प्रताप रूडी

  • Updated on 1/11/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भाजपा चंडीगढ़ से छात्र राजनीति शुरू करने वाले और छपरा से लालू यादव को हराने वाले राजीव प्रताप रूडी अटल और मोदी सरकार में मंत्री रहे हैं और कॉमर्शियल जहाज उड़ाने वाले अकेले राजनेता हैं।लोकसभा चुनाव पर इसी बीच नवोदय टाइम्स/पंजाब केसरी से उन्होंने खास बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश:

लोकसभा चुनाव जो इस साल होने वाले हैं, अलग क्यों लग रहे हैं?
चुनाव आते ही पक्ष अपनी बात कहता है और विपक्ष अपनी बात कहता है। दबाव बढऩे लगता है। हम लोगों ने देश में सरकार बनाने के बाद बहुत काम किया और उसको लेकर ही आगे बढ़ रहे हैं। अभी तक सभी पार्टियां मिलकर कांग्रेस को हराती थीं। पहली बार सभी पार्टियां मिलकर भाजपा को हराने में लगी हैं। सभी को पता है कि अगर इस बार वो चूक गए तो फिर पता नहीं कब मौका मिले।

सरकार के आने के बाद बहुत सारी योजनाएं शुरू की गईं। योजनाओं का लाभ तो अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा भी। दरअसल केन्द्र की योजनाओं का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना कठिन काम है। हमारी सरकार ने बहुत सारी योजनाओं को सीधे व्यक्ति तक पहुंचाया। उज्ज्वला योजना में सबसे ज्यादा वितरण मेरे संसदीय क्षेत्र सारण में हुआ।

सब जगह बिजली पहुंचाई गई। ऐसी बहुत सारी योजनाएं फलीभूत हुईं हैं। लेकिन, जो गेम चेंजर योजना है, वह पांच लाख रुपए तक का नि:शुल्क इलाज। लोगों का इलाज हो रहा है उसका खर्च अस्पताल को सरकार की तरफ से दिया जा रहा है। इससे मरीजों को बड़ी राहत है और अस्पतालों की माली हालत भी सुधर रही है।

अमित शाह कहते हैं  कि केंद्रीय योजनाओं का लाभ 22 करोड़ लोगों तक पहुंचा है। लेकिन, बीते विधानसभा चुनावों के परिणाम विपरीत रहे?
परिणाम चकित करने वाले रहे, इसमें कोई दो राय नहीं। एमपी में पंद्रह साल से सरकार थी और कुछ सीटों से हम सरकार बनाने से रह गए। राजस्थान में जितना खराब कहा जा रहा था, परिणाम उससे बहुत अच्छे रहे। कांग्रेस की जीत भाजपा के लिए एलार्म की तरह है।

राज्यों के परिणामों से जो झटका लगा है, उससे हम फिर से एकाग्र होकर लग गए हैं। लेकिन, जिन राज्यों में कांग्रेस से सीधी टक्कर है, वहीं पर इस तरह के परिणाम सामने आए हैं। बाकी जगहों पर टक्कर अलग-अलग पार्टियों से है। 

यूपी के उपचुनावों के बाद भी खतरे की घंटी नहीं सुनाई दी थी?
दरअसल जिस तरह से देश की जनता ने भाजपा को भारी बहुमत देकर सरकार में भेजा था, वैसा जनादेश बहुत कम देखने को मिलता है। राजीव गांधी की मृत्यु के बाद वैसा जनादेश देखने को मिला था। इस तरह के जनादेश से बेहतर जनादेश मिले, ऐसा मुश्किल से होता है।

लेकिन, पार्टी स्तर पर तो पहले से बेहतर परिणामों के लिए ही प्रयास किए जाएंगे, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर ऐसा दावा तर्कसंगत नहीं है। फिर भी आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 2014 के मुकाबले इतनी कम नहीं होंगी कि सरकार न बनाई जा सके।

व्यावहारिक तौर पर मुझे लगता है कि 250 से 260 सीटें आसानी से आ जाएंगी और राजनीतिक रूप से हम 300 सीटों की उम्मीद रखकर चल रहे हैं।

कहा जा रहा है कि इस बार कमजोर सरकार बनेगी और मायावती किंग मेकर की भूमिका में होंगी।
मैं असहमत हूं। इस तरह की बातें भाजपा को हटाने के लिए झूठ का सहारा लेकर फैलाई जा रही हैं। 

सपा-बसपा मिलकर मोदी को पीएम बनने से रोक सकती हैं। यूपी से 72 सीटें तो नहीं आएंगी। इस पर क्या कहेंगे?
इसे सही मानें तो भी लोकसभा चुनाव में सीटें जीतने के मामले में भाजपा से बड़ा कोई दल नहीं होगा। हम देश की सबसे बड़ी पार्टी हैं और  रहेंगे भी। 

जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा में भाजपा विरोधी माहौल है। दिल्ली-बिहार आप देख ही रहे हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ हार गए। फिर 250 सीटें कैसे कह रहे हैं?
केरल, कर्नाटक, उड़ीसा हमारे लिए हैं और जिन राज्यों में हमारी हार हुई है, उसमें भी हम पिछली बार की तरह ही सीटें जीतकर आएंगे। सर्वे कराकर देखा जा सकता है। जिस दिन से सारी पार्टियों ने मिलकर मोदी को हराने की बात कही है, उसी दिन से हमारी सीटों की संख्या बढऩे लगी हैं।  

मध्य प्रदेश, राजस्थान में काम हुआ फिर भी भाजपा हार गई। यूपी में भी योगी विकास का दावा कर रहे हैं। ऐसे में हार के पीछे क्या अतिविश्वास कारण है या कुछ और?
देखिए 25 प्रतिशत वोट तो पार्टी के होते हैं, 25 प्रतिशत वोट पार्टी के प्रबंधन का वोट होता है। बाकी 50 प्रतिशत वोट विभिन्न कारणों और सेंटीमेंट्स से होता है। हार-जीत इस पर बहुत ज्यादा निर्भर होती है। 

आप कह रहे हैं कि भाजपा बनाम बाकी पार्टियों की लड़ाई है। लेकिन, आगामी चुनाव बीजेपी बनाम बीजेपी जैसा लग रहा है। जिसमें नितिन गडकरी उभरकर प्रधानमंत्री के दावेदार दिख रहे हैं, इस पर क्या कहेंगे?
यह तो बहुत ही अच्छा सवाल आपने किया। हमारे लिए लीडरशिप एक है, आस्था एक है। वह पीएम मोदी हैं। यह चुनाव उनके नेतृत्व का है, इसमें डगमगाने की गुंजाइश है ही नहीं। 

तो क्या नितिन गडकरी का कोई चांस नहीं है? 
हम अटकलों में नहीं जाना चाहते। ऐसी बातों से हम पार्टी की नींव कमजोर नहीं करेंगे। हमने पांच साल तक पीएम मोदी के नेतृत्व में काम किया है। वह हमारी पूंजी हैं। पार्टी और कार्यकर्ता पूरे तौर पर मोदी के साथ हैं,भले ही कुछ लोग गडकरी पर चर्चा कर रहे हों। 

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