Sunday, Jun 16, 2019

INTERVIEW 2 : जनता देश में वंशवाद नहीं, विकासवाद चाहती है- नरेंद्र मोदी

  • Updated on 5/17/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। लोकतंत्र के महाउत्सव का आखिरी चरण चल रहा है। 7वें चरण के तहत 8 राज्यों के 59 लोकसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। अब तक कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कोहिमा तक हर कोने में चुनाव प्रचार कर चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी और भारतीय जनता पार्टी की भावी योजनाओं संबंधी पंजाब केसरी/नवोदय टाइम्स/ जग बाणी/हिंद समाचार के नैशनल ब्यूरो से खास बातचीत की।

'मैं पूरी तरह आश्वस्त होकर कह सकता हूं कि देश ने एक मजबूत सरकार के लिए निर्णायक रूप से वोट दिया है और आगे भी देगा। जनता का मूड साफ है और उसका मैंडेट भी कई पार्टियों को साफ कर देगा। भारत की जनता देश में वंशवाद नहीं, विकासवाद चाहती है। बांटो और राज करो का नहीं, सबका साथ सबका विकास का विजन चाहती है। लोग इंडिया फस्र्ट की सरकार चाहते हैं, फैमिली फस्र्ट की नहीं। लोग टेपरिकार्डर की नहीं, ट्रैक रिकार्ड की सरकार चाहते हैं। लोग राजनीति नहीं, राष्ट्रनीति चाहते हैं।' 

2014 की तुलना में 2019 का चुनाव कितना मुश्किल है?
आप चुनावों को मुश्किल क्यों कह रहे हैं? चुनाव तो लोकतंत्र का महोत्सव होता है और कोई भी उत्सव खुशियों के साथ मनाया जाता है। मैं हमेशा अपने युवा मित्रों से कहता हूं कि एग्जाम को फैस्टीवल की तरह लेना चाहिए वैसे ही चुनाव भी एक महोत्सव है। अगर छात्र ने सालभर पढ़ाई की है, मेहनत की है तो वो जैसे कांफिडैंट होता है ठीक वैसे ही 5 साल हमने भी काम किया है, जनता के बीच रहकर उनके बेहतर जीवन के लिए, देश के सम्मान के लिए, सभी जरूरी कदम उठाए हैं। 
हर चुनाव की स्थिति-परिस्थिति अलग होती है। फिर भी हम थोड़ी-बहुत तुलना तो कर ही सकते हैं।  2019 के चुनाव में हमें एक-दो फायदे जरूर मिले हैं 2014 की तुलना में। 2014 में मैं एक राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यरत था। पहले लोग मुझे सिर्फ जानते थे लेकिन अब करीब से पहचानने लगे हैं। मोदी की नीति, राजनीति, फैसले सब लोगों ने बारीकी से देखे हैं। 5 साल के दौरान लोगों ने मेरी कार्यशैली, प्राथमिकताएं, कार्य क्षमता को देखा है इसलिए मैं कहूंगा कि 5 साल में लोग मोदी को और भी नजदीक से जान पाए हैं। 
रही बात चुनाव की तो हम परफॉर्मैंस के आधार पर चुनाव लड़ रहे हैं और विकास के आधार पर चुनाव ने देश में नया आत्मविश्वास पैदा किया है और यह अनुभव वाकई नया है। 2014 और 2019 के चुनावों के बीच एक अंतर और है। 2014 में हमने लोगों की आशाओं को जगाया था, 2019 में उन आशाओं - आवश्यकताओं को पूरा कर नई आकांक्षाओं को जगाकर उन्हें पूरा करने की ओर बढ़ रहे हैं।

चुनाव लगभग खत्म होने को हैं, आप भाजपा को किस जगह देख पा रहे हैं?
विकास और विश्वास मैं लोगों की आंखों में देख रहा हूं। चुनाव के 6 चरण बीत चुके हैं और इस बीच मैंने रोजाना 3-4 रैलियां की हैं, कई जनसभाएं की, हर राज्य में गया। कच्छ से कोहिमा तक, कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर जगह लोगों की आंखों में  विकास और विश्वास देखा है। लोगों को समझ आ चुका है कि ये उनका समय है, ये 21वीं सदी के नए भारत का समय है। भाजपा की विकासवादी राजनीति, देशहित की राजनीति में जनता विश्वास करती है, विकास में विश्वास करती है। देश बोल रहा है कि भाजपा-एन.डी.ए. सरकार ही उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने की ईमानदार नीयत रखती है, पूरा प्रयास करती है, इसलिए हम भाजपा को लोगों के दिल में देखते हैं।
 

जाब और हरियाणा को लेकर अपनी समस्याएं हैं। पंजाब में एक तरफ खालिस्तानी कभी - कभी मुंह उठाते दिखते हैं, खास तौर पर विदेशों की धरती पर शह मिलने पर। ऐसे में केंद्र सरकार की क्या योजना है?
भारत विरोधी गतिविधियों के लिए आतंकवाद और पृथकतावादी तत्वों का इस्तेमाल पाकिस्तान की पुरानी नीति रही है। आज भी हमारा पड़ोसी अपनी धरती पर ही नहीं,बल्कि बहुत से दूसरे देशों में, खासकर पश्चिमी देशों में, भारत विरोधी तत्वों को बढ़ावा दे रहा है। यह और भी दुर्भाग्य का विषय है कि भारत को कमजोर करने के इरादे से कुछ देशों के राजनेताओं को भी गुमराह करने की कोशिश की जाती है। हमने पाकिस्तान से बार-बार कहा है कि वह इन गतिविधियों से बाज आए। दूसरे देशों में, जहां ये तत्व हरकत में आते हैं, हम उन सरकारों को इस बारे में सचेत करते हैं और हमें उनका सहयोग मिलता है।
सिख समुदाय की बहादुरी और देशभक्ति की परंपरा हमारी विरासत का एक अटूट हिस्सा है। इतिहास में इस वर्ष का विशेष महत्व है क्योंकि यह श्री गुरु नानक देव जी के जन्म की 550वीं सालगिरह है। मुझे ख़ुशी है कि हमारी सरकार ने सिख समुदाय की एक बहुत पुरानी मांग, यानी करतारपुर कॉरीडोर पर पूरी तत्परता से काम शुरू किया है और इस बारे में पाकिस्तान से विशेषज्ञों के स्तर पर बातचीत की जा रही है। आशा की जानी चाहिए कि सिख धर्म के अनुयायियों  की भावनाओं का ध्यान रखते हुए पाकिस्तान करतारपुर के विषय में सही मायनों में सकारात्मक कदम उठाएगा।

वाराणसी में आपने ऐतिहासिक रोड शो एवं शक्ति प्रदर्शन किया, इसका कितनी सीटों पर फर्क पड़ेगा। क्या पूर्वांचल की 26 सीटें भाजपा की झोली में आएंगी?
वाराणसी में रोड शो शहर के लोगों को उनके अभूतपूर्व समर्थन के लिए धन्यवाद देने का एक माध्यम था। रोड शो में न केवल अभूतपूर्व संख्या में लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि ऐसा लग रहा था कि पूरी काशी अपना प्यार और स्नेह दिखाने के लिए सड़कों पर थी। 
अगर सीटों के लिहाज से बात करें तो निश्चित रूप से पूर्वांचल में भाजपा क्लीन स्वीप करेगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि किसी भी अन्य पार्टी ने कभी भी पूर्वांचल की आकांक्षाओं को नहीं समझा। यह भाजपा ही है जिसने न केवल तेजी से पूर्वांचल का विकास सुनिश्चित किया है, उसके साथ-साथ बुनियादी ढांचे और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में भी सुधार करने का काम किया है। हमने अपनी सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में भी काफी कार्य किए हैं।
दूसरी ओर विपक्ष को विकास में कोई दिलचस्पी नहीं है। जब उनके कार्यकत्र्ता ही एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते और कई बार तो ऐसा देखा गया है कि जब उनमें आपस में ही हाथापाई की नौबत तक आ गई, तो लोग उन पर कैसे भरोसा कर सकते हैं?

यू.पी. में सपा-बसपा गठबंधन का कितना असर पड़ेगा?
हां, लोगों पर इस गठबंधन का असर पड़ रहा है। लोगों ने अब मन बना लिया है कि ऐसे दल जो अब तक जातिवाद के नाम पर राजनीति करते आए हैं उन्हें सबक सिखाना है। लोगों ने अब मन बना लिया है कि जिन लोगों ने गरीबों के नाम पर राजनीति करके अपने महल बनाए हैं उन्हें सबक सिखाना है। लोगों ने अब मन बना लिया है कि जो लोग एक-दूसरे के विरुद्ध लड़ते थे, अब अपनी हार देखकर उन्होंने गठबंधन कर लिया, ऐसे अवसरवादी लोगों को सबक सिखाना है। लोगों ने अब मन बना लिया है कि जिन लोगों ने कभी विकास नहीं किया उन्हें सबक सिखाना है।

केंद्र सरकार ने 5 साल में जमीनी स्तर पर कई काम किए। उज्ज्वला, शौचालय, सबके लिए आवास, किसानों के लिए 6000 रुपए की मदद जैसी सुविधाएं दीं लेकिन ये चुनावी मुद्दे नहीं बन पाए। ऐसा क्यों?
चुनावी मुद्दे कोई टी.वी. स्टूडियो या ए.सी. कमरे में तय नहीं किए जाते। मुद्दे जमीन पर और लोगों के बीच तय होते हैं। आप मुझसे नहीं जनता से पूछिए कि वे मोदी सरकार को दोबारा क्यों लाना चाहते हैं? आपको लोग जवाब दे देंगे। वे बताएंगे कि गरीबों को कितना आवास मिला, कितने शौचालय बने, किस तरह गरीब के घरों में मुफ्त गैस का कनैक्शन पहुंच गया, लगभग सभी घरों में बिजली पहुंच गई। मैंने अपनी हर रैली में इन बुनियादी सुविधाओं के बारे में लोगों को बताया है। मेरा कोई भी भाषण आप उठा कर देख लीजिए। यह विपक्ष है जो इन मुद्दों पर बात नहीं करता। वे जानते हैं कि इन मुद्दों पर उनके पास कुछ भी बोलने के लिए नहीं है। जब वे इन मुद्दों पर कुछ बात ही नहीं करते, तो ये मान रहे हैं कि गरीबों के लिए हमारे काम अविवादित हैं। जब इन पर विवाद नहीं पैदा होते तो ये हैडलाइन भी नहीं बनते। इसलिए आपको लगता होगा कि हमारे विकास के काम चुनावी मुद्दे नहीं बने हैं।

इस चुनाव में डिवैल्पमैंट जैसे अहम मुद्दे मुख्य लीड से गायब हैं, जो भाजपा के मुख्य एजैंडा में शामिल होता रहा है। क्या अब उस पर भरोसा नहीं रहा?
केवल भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। कोई अन्य पार्टी विकास की बात ही नहीं कर रही है। क्या किसी विपक्षी दल ने किसानों के लिए अपना विजन सांझा किया है, क्या किसी विपक्षी दल ने इंडस्ट्री के लिए अपना विजन सांझा किया है, क्या किसी विपक्षी दल ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपना विजन सांझा किया है? 
वहीं दूसरी ओर, हमारे साथ विकास का पिछला ट्रैक-रिकॉर्ड तो है ही जबकि साथ ही साथ हम भविष्य के लिए अपने विजन के साथ लोगों के बीच जा रहे हैं। आज मैं आपको ऐसे आंकड़े दे रहा हूं, जिन्हें देख आपको मेरी सरकार के काम करने की गति के बारे में पता चलेगा। हर रोज प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत लगभग 70 हजार माताओं-बहनों को मुफ्त गैस कनैक्शन मिल रहे हैं। हर रोज सौभाग्य योजना के तहत लगभग 50 हजार घरों को बिजली कनैक्शन दिए जा रहे हैं। हर रोज जन धन योजना के तहत करीब 2 लाख 10 हजार गरीबों के बैंक अकाऊंट खुल रहे हैं। हर रोज मुद्रा योजना के तहत लगभग 1 लाख 15 हजार उद्यमियों को लोन दिए गए हैं।
हर रोज प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 11 हजार से अधिक घर बन रहे हैं और उसकी चाबी सौंपी जा रही है। हर रोज स्वच्छ भारत मिशन के तहत 60 हजार से अधिक शौचालयों का निर्माण हो रहा है। हर रोज करीब 1 लाख 30 हजार किसानों को सॉयल हैल्थ कार्ड दिए गए हैं। हर रोज आयुष्मान भारत योजना के तहत 9 हजार से अधिक लोगों का मुफ्त इलाज हो रहा है।
हर रोज डी.बी.टी. के तहत 400 करोड़ रुपए से अधिक की रकम सीधे गरीबों के बैंक खातों में ट्रांसफर हो रही है। हर रोज प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से करीब-करीब एक लाख 5 हजार लोगों को लाभ मिल रहा है।
 

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