Saturday, Mar 23, 2019

Interview 2: महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर दिया गया विशेष ध्यान

  • Updated on 2/24/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बेटियों को बचाने एवं महिलाओं की रक्षा और सुरक्षा को लेकर लगातार आवाज बुलंद करने वाली केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने 5 साल में बेटियों को बचाने और महिलाओं के उत्थान के लिए अनेकों काम किए हैं। उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र पीलीभीत (यू.पी.) की सम्स्याओं के साथ-साथ देशभर की महिलाओं से जुड़े मसलों को बड़े ही बेबाकी से अमलीजामा पहनाया है। नवोदय टाइम्स/पंजाब केसरी  के विशेष संवाददाता सुनील पाण्डेय ने उनसे हर मुद्दे पर खास बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश...

राष्ट्रीय महिला कोष बैंक क्या है, कितनी महिलाओं को फायदा मिला? 
 गरीब महिलाओं को विभिन्न आजीविका सहायता एवं जीविकोपार्जन गतिविधियों के लिए रियासती दरों (मात्र 6 प्रतिशत ब्याज दर) पर लघु लोन दिया जाता है ताकि ऐसी महिलाओं का सामाजिक एवं आॢथक विकास किया जा सके। राष्ट्रीय महिला कोष ने 1522 से भी अधिक गैर-सरकारी संगठनों एवं लघु वित्त संगठनों के माध्यम से 7.37 लाख से भी अधिक निर्धन महिला लाभाॢथयों को कुल 366.77 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं और 304.10 करोड़ रुपए वितरित किए हैं। इसके तहत महिलाएं परंपरागत एवं आधुनिक हस्तशिल्प से लेकर छोटी-छोटी दुकानों आदि जैसा छोटा व्यवसाय करके विभिन्न आॢथक गतिविधियां शुरू कर सकती हैं। 
खास बात यह है कि पहले कांग्रेस की सरकार ने अपने चहेतों को 60 करोड़ रुपए लोन बांट रखा था। बहुत मुश्किल से इस पैसे को वसूला गया है। साथ ही फर्जीवाड़े को रोकने में सफलता मिली है। 
राष्ट्रीय महिला कोष (आर.एम.के.) एक सोसायटी है, जो कि सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के अंतर्गत पंजीकृत है और इसकी स्थापना 1993 में महिला और बाल विकास मंत्रालय (एम.डब्ल्यू.सी.डी.) के तत्वावधान में हुई थी। इसके द्वारा गरीबों के लिए कर्ज की व्यवस्था, अनौपचारिक क्षेत्रों की संपत्ति विहीन महिलाओं के लिए विभिन्न आजीविका सहायता और उनके सामाजिक-आॢथक विकास को एक ग्राहक-अनुकूल प्रक्रिया में रियायती शर्तों के माध्यम से आय पैदा करने वाली गतिविधियां प्रदान करना है।

मानव तस्करी रोकने के लिए क्या किया?  
यह बहुत बड़ी समस्या है लेकिन, किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। हालत यह थी कि मंत्रालय में इसको लेकर कोई एजैंडा ही नहीं था। चार्ज संभालने के बाद सबसे पहले एजैंडा बनाया और सिलसिलेवार तरीके से काम करना शुरू किया। मानव तस्करी को रोकने के लिए सख्त कानून की जरूरत थी, जिसको लेकर एक्ट में बदलाव करवाया गया। अभी हाल ही में भारी संख्या में नेपाली लड़कियों को पकड़ा गया, जिन्हें वापस नेपाल भेज दिया गया। भारत से भी नौकरी का झांसा देकर खाड़ी देशों में महिलाएं भेजी जाती थीं जिसे विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर रोकने की कोशिश की गई। 

महिला सुरक्षा को लेकर 112 पैनिक बटन शुरू किया, क्या होगा? 
महिलाओं की सुरक्षा के लिए यह अनोखा एप शुरू किया गया है, जो पूरे देश में काम करेगा। अगर महिलाएं मुसीबत में फंसी हैं, तो 112 बटन दबा देंगी तो फौरन पुलिस आ जाएगी। इसे पैनिक बटन के नाम से जाना जाएगा। अगर 112 नंबर भूल गई हैं तो 6 या 9 बटन को कुछ देर तक दबाए रखेंगी तो पुलिस तक सूचना पहुंच जाएगी। इसके लिए वह खुद 4 साल से काम कर रही थीं। इसके लिए कोई एजैंसी हाथ लगाने को पहले तैयार नहीं थी, बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सफलता मिल गई। इसका ट्रायल हिमाचल प्रदेश एवं नागालैंड में किया गया, सफल होने के बाद देशभर में लागू किया गया है। आजकल हर महिला के पास आधुनिक फोन और इंटरनैट है, लिहाजा, वे इस एप को मोबाइल में डाऊनलोड कर सकती हैं। 
बच्चों को बचाने के लिए चाइल्ड हैल्पलाइन 1098 कितनी कारगर? 
चाइल्ड हैल्पलाइन (1098) से बहुत बड़ी सफलता मिली है। वर्तमान में चाइल्ड लाइन के माध्यम से देश के लगभग 475 स्थानों और 65 प्रतिशत भाग को कवर किया जा रहा है। मंत्रालय, सिविल सोसायटी संगठनों की सहायता से 24&7 चाइल्ड हैल्पलाइन को चला रहा है। इस हैल्पलाइन में साल में औसतन 4 करोड़ फोन आते हैं। इनमें से 2 करोड़ फोन ऐसे होते हैं जिनमें मां ने थप्पड़ मारा है, उसकी भी शिकायत बच्चे करते हैं। इस हैल्पलाइन की निगरानी वह खुद करती हैं। यही कारण है कि इसके लिए उन्हें इंटरनैशनल अवार्ड भी मिल चुका है।

इसके तहत देशभर में करीब 800 एन.जी.ओ. को भी जोड़ा गया है। चाइल्ड लाइन इंडिया फाऊंडेशन (सी.आई.एफ.)-ए मदर एन.जी.ओ. द्वारा देशभर के अन्य नागरिक समाज संगठनों के साथ सांझेदारी में यह सेवा प्रदान की जा रही है। खास बात यह है कि रेलवे की मदद से यह हैल्पलाइन बहुत कारगर साबित हुई है। हर स्टेशन एवं हर ट्रेन में इसके स्टीकर लगाए गए हैं। नतीजन, कोई भी परेशान बच्चे एवं महिलाओं को बचा सकता है। मुम्बई के बी.टी. स्टेशन पर 1 महिला ने अब तक ट्रेन से 960 बच्चों को बचाया है। उसे सरकार ने सम्मानित भी किया है। 

कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीडऩ, सरकार ने अब तक क्या किया?
 यह बहुत बड़ी समस्या है, जिसमें महिलाएं परेशान तो होती हैं, लेकिन खुलकर बोल नहीं पाती थीं लेकिन सरकार के कई अभियानों के चलते अब महिलाएं खुलकर शिकायत करने लगी हैं। कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 में सभी महिलाओं को शामिल किया गया है, चाहे उनकी उम्र या रोजगार की स्थिति कैसी भी हो। इसमें सभी कार्यस्थलों पर यौन उत्पीडऩ के खिलाफ उनकी रक्षा करती है चाहे वह संगठित क्षेत्र से हों या असंगठित। छात्रों, प्रशिक्षुओं, मजदूरों, घरेलू कामगारों और यहां तक कि दौरा करने वाली एक महिला अधिकारी को भी इस अधिनियम में शामिल किया गया है।

इसके अलावा हर एक कार्यालय में शिकायत कमेटी बनाने का आदेश जारी किया गया। साथ ही वित्त मंत्रालय से मिलकर इस व्यवस्था को ऑडिट में शामिल करवाया गया।  इसके अलावा हर एक कंपनी में एक महिला निदेशक को रखने का प्रावधान रखा गया, ताकि महिला कर्मचारी बेझिझक अपनी बात रख सकें। इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ से संबंधित शिकायतों को दर्ज करने के लिए यौन उत्पीडऩ इलैक्ट्रॉनिक-बॉक्स (सी-बाक्स) नामक एक ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली को विकसित किया है। सी-बॉक्स पोर्टल देश में सभी महिला कर्मचारियों को कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ की शिकायत ऑनलाइन करने की सुविधा प्रदान करता है, जिसमें सभी सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारी शामिल हैं।

देश भर में इस अधिनियम के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिए संगठित और असंगठित क्षेत्र दोनों में, एम.डब्ल्यू.सी.डी. ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ के मुद्दे पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम, प्रशिक्षण, कार्यशालाएं चलाईं। पिछले साल वर्ष 2018 में, प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा 744 से अधिक क्षमता निर्माण अभ्यासों का 
आयोजन किया गया, जिसमें 50 हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.