Saturday, Nov 16, 2019
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‘आयरन’ गर्भाधान के अवसर नहीं बढ़ाता

  • Updated on 6/25/2019

एक अध्ययन में पाया गया है कि जो महिलाएं आयरन (लौह) से भरपूर भोजन करती हैं उनमें गर्भ धारण करने की सम्भावना बढ़ती नहीं है। ‘द जर्नल आफ न्यूट्रिशन’ में प्रकाशित शोध में पाया गया है कि हीम आयरन, जो अधिकतर मांस से आता है, का इस बात पर कोई असर नहीं पड़ता कि किसी महिला को गर्भ धारण करने में इतना लम्बा समय लगेगा। अमरीका में बोस्टन विश्वविद्यालय के शोधकत्र्ताओं ने यह भी पाया कि नॉन-हीम आयरन, जो मुख्य रूप से सब्जियों तथा अनुपूरक आहार में पाया जाता है, उसका प्रभाव उन महिलाओं पर हल्का पडऩे की सम्भावना होती है जिनमें अत्यधिक मासिक स्राव अथवा पहले किसी बच्चे को जन्म देने के कारण आयरन की कमी होती है। 

बोस्टन विश्वविद्यालय की प्रो. एलिजाबेथ हैच ने बताया कि औसत गर्भाधान की योजना बनाने वाली महिलाओं को प्रीकंसैप्शन मल्टी विटामिन लेना लाभदायक होता है। उन्होंने बताया कि यदि आपको माहवारी के दौरान बहुत अधिक रक्तस्राव होता है तो आपको आयरन समृद्ध भोजन करना चाहिए और इस बारे में अपनी चिकित्सा सेवा प्रदाता से बात करनी चाहिए। 

शोधकत्र्ताओं की टीम ने 4600 से अधिक महिलाओं से मिले आंकड़ों का विश्लेषण किया, जिन्होंने एक वर्ष तक प्रत्येक 8 सप्ताहों अथवा जब तक गर्भधारण नहीं कर लिया, प्रश्नावलियों को पूरा किया था। शोधकत्र्ताओं ने हीम तथा नॉन-हीम आयरन के बीच के संबंध का पता लगाया तो पाया कि इन दोनों के बीच कोई विशेष संबंध नहीं है। 

हालांकि जो महिलाएं अनुपूरक आहार या किसी भोजन के जरिए अधिक नॉन-हीम आयरन ग्रहण करती हैं उनमें गर्भाधान की सम्भावना कुछ बढ़ जाती है, विशेषकर उन महिलाओं में जिन्होंने पहले भी बच्चे को जन्म दिया हो।   -मुमि

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