क्या कैग अपने कर्तव्य से पीछे हट रहा है

  • Updated on 12/3/2018

क्या नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सी.ए.जी.) ने आम चुनाव से पहले मोदी सरकार को संभावित विवादों से बचाने के लिए नोटबंदी और  राफेल करार की अपनी लेखापरीक्षा रिपोर्टों पर अपने कदम पीछे खींच लिए हैं? कई सेवानिवृत्त नौकरशाह ऐसा सोचते हैं और उन्होंने सी.ए.जी. राजीव महर्ष को इस संबंध में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए पत्र लिखा है। 

सूत्रों के मुताबिक, पत्र के हस्ताक्षरकर्ताओं में पंजाब के पूर्व आई.पी.एस. अधिकारी और पूर्व डी.जी.पी. जूलियो रिबेरो भी हैं। उनके साथ ही पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी और सामाजिक कार्यकत्र्ता अरुणा रॉय, पूर्व पुणे पुलिस आयुक्त मीरन बोरवंकर, प्रसार भारती के पूर्व सी.ई.ओ. जवाहर सिरकार, इटली में भारत के पूर्व  प्रतिनिधि रहे के.पी. फैबियन, वरिष्ठ नौकरशाह वी.रमानी, और 

केन्द्रीय और अखिल भारतीय सेवाओं के  कई अधिकारी भी शामिल हैं। उन्होंने सी.ए.जी. से संसद के शीतकालीन सत्र  में नोटबंदी और राफेल सौदे पर रिपोर्ट पेश करने का आग्रह किया है। हालांकि, कुछ सरगोशियां हवा में तारी हैं कि सी.ए.जी. दिसंबर में राफेल रिपोर्ट जारी करेगा, लेकिन आधिकारिक तौर पर इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि रिपोर्ट वास्तव में कब जारी की जाएगी।

बेहतर शासन के लिए
शासन को जनता के करीब ले जाने के लिए, जिसको लेकर कुछ लोग संघीयवाद पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन मोदी सरकार सभी राज्य राजधानियों में अपने कार्यालय खोलने के लिए केन्द्रीय सचिवालय स्थापित करने की योजना बना रही है। ये सचिवालय विभागों और मंत्रालयों के बीच सार्वजनिक और तेजी से बातचीत के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आसानी सुनिश्चित करेंगे।

आम तौर पर, राज्य सरकारों के पास अपने स्वयं के सचिवालय होते हैं जहां विभिन्न विभागों के कार्यालयों को संचालित किया जाता है, लेकिन राज्यों में केन्द्र सरकार के कार्यालयों के लिए कोई केन्द्रीयकृत स्थान नहीं है। यह योजना दिल्ली के केन्द्रीय सचिवालय और सी.जी.ओ. परिसर की तर्ज पर केंद्र सरकार के कार्यालयों के लिए राज्य राजधानियों में समॢपत क्षेत्रों को विकसित करने के लिए है। प्रस्तावित केन्द्रीयकृत कार्यालय परिसरों में उच्च स्तरीय सुरक्षा और नवीनतम सुविधाएं होंगी।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार प्रस्ताव पर तेज गति से आगे बढ़ रही है। कैबिनेट में चर्चा के बाद, प्रधानमंत्री कार्यालय (पी.एम.ओ.) द्वारा केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (सी.पी.डब्ल्यू. डी.) को औपचारिक प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे इस्तेमाल किया जा सकता है और भूमि की पहचान के साथ उस पर काम शुरू किया जा सकता है।

केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (सी.पी.डब्ल्यू.डी.) के महाप्रबंधक प्रभाकर  सिंह ने अब क्षेत्रीय अधिकारियों से कार्यालय की जगह के लिए उपलब्ध भूमि की आवश्यकता और विभिन्न राज्य राजधानियों में अन्य केन्द्र सरकार के विभागों के बारे में जानकारी मांगी है। 

अलग-अलग अफसरों के लिए अलग-अलग मानक
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस की सरकार अपने बाबुओं के साथ सख्ती बरतती नजर आ रही है, जो कि उन लोगों को दंडित करती है जो अपने सरकारी आवास में अधिक समय तक कब्जा किए हुए हैं। लेकिन नियम सभी बाबुओं के लिए बाध्यकारी नहीं है, ऐसा प्रतीत होता है।

यह सामने आया है कि फड़णवीस सरकार 15 नौकरशाहों के लिए उदार रही है, जिनमें 12 आई.ए.एस. और 3 आई.पी.एस. अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें अपने साथियों पर लागू किए गए नियमों से छूट मिली है और उन्हें लंबे समय तक सरकारी निवास में टिके रहने की अनुमति मिली हुई है। 

आई.पी.एस. अधिकारी रश्मि शुक्ला और सुरेंद्र बागदे समेत कुछ वरिष्ठ बाबुओं को सरकार से बाहर कर दिया गया है, लेकिन उन्हें अपना आवास बरकरार रखने की इजाजत है। इसी प्रकार, विनीत अग्रवाल, बलदेव सिंह और संजय चहांदे को केंद्रीय आधिकारिक अवस्था में रहने के बावजूद अपने आधिकारिक निवास बनाए रखने की अनुमति दी गई है।

वहीं जे.पी. डेंगे और वी.गिरिराज जैसे कुछ अधिकारियों ने सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने घर खाली नहीं किए हैं। के.पी.बख्शी और दिलीप जादव जैसे अधिकारी भी हैं, जिनको सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा नियुक्ति मिली है और इसलिए उन्हें अपने आधिकारिक निवास बनाए रखने की इजाजत है।                                                         ---दिलीप चेरियन

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