isro chairman''''''''''''''''s life is full of inspiration

गरीबी के संघर्ष से लेकर सफलता की बुलंदियों तक, पढ़ें... ISRO चीफ के जीवन के रोचक किस्से

  • Updated on 9/10/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कैलाशवडीवू सिवन (Kailasavadivoo Sivan ) एक लड़का जो तमिलनाडु (Tamilnadu) के कन्याकुमारी (kanyakumari) जिले सराक्कलविलाई गांव के एक किसान के घर में पैदा हुआ और स्कूली शिक्षा तमिल माध्यम में लेकर आज इसरो (ISRO) का अध्यक्ष बन गया। जिन्हें आज पूरी दुनिया के सिवन (K Sivan) नाम से जानती है। इसरो उध्यक्ष ( ISRO Chief) के सिवन का जीवन आज देश के सभी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। इन्होंने अपने जीवन में कई परेशानीयों और चुनौतिया का सामना करते हुए जमीन से आसमान तक का सफर पूरा किया।

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के सिवन का बचपन
खेतिहर किसान पिता कैलाशवडीवू और मां चेल्लम के घर 14 अप्रैल, 1957 को सिवन का जन्म हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल में तमिल माध्यम से हुई। पढ़ाई के साथ-साथ वह अपने भाई-बहनों के साथ खेतों में पिता के साथ काम करते थे। इनका बचपन बिना जूतों और चप्पल के गुजरा है। एमआइटी में पहली बार सिवन ने पैंट पहनी थी।

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100 प्रतिशत अंकों के साथ बीएससी में स्नातक
सिवन ने एक सरकारी स्कूल में तमिल माध्यम से पढ़ाई की है। फीर नागेरकोयल के एसटी हिंदू कॉलेज से उन्होंने 100 प्रतिशत अंकों के साथ बीएससी (गणित) में स्नातक की। सिवन ने 1980 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसिज (आईआईएससी) से इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। 2006 में उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। सिवन स्नातक करने वाले अपने परिवार के पहले सदस्य हैं। उनके भाई और बहन आर्थिक तंगी के कारण अपनी उच्च शिक्षा पूरी नहीं कर पाए।

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कॉलेज से इसरो के चीफ बनने तक का सफर
एमआइटी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद सिवन 1982 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़ गए। उन्होंने पोलर सेटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) परियोजना में अपना योगदान देना शुरू किया। 

इसके बाद अप्रैल 2011 में वह जीएसएलवी के परियोजना के निदेशक बने। सिवन के योगदान को देखते हुए जुलाई 2014 में उन्हें इसरो के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर का निदेशक नियुक्त किया गया। एक जून, 2015 को उन्हें विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के निदेशक बना दिया गया। 15 जनवरी, 2018 को सिवन ने इसरो के अध्यक्ष का पद संभाला।

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इसरो का रॉकेटमैन
सिवन ने 1982 में इसरो में शामिल होने के बाद  लगभग हर रॉकेट कार्यक्रम में काम किया। उन्हें साइक्रोजेनिक इंजन, पीएसएलवी, जीएसएलवी और रियूसेबल लांच व्हीकल कार्यक्रमों में योगदान देने के कारण इसरो का रॉकेटमैन कहा जाता है। 15 फरवरी, 2017 को भारत द्वारा एक साथ 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में अहम भूमिका निभाई थी। यह इसरो का विश्व रिकॉर्ड भी है। 

15 जुलाई, 2019 को जब चंद्रयान-2 अपने मिशन के लिए उड़ान भरने ही वाला था कि कुछ घंटों पहले तकनीकी कारणों से इसे रोकना पड़ा। इसके बाद सिवन ने एक उच्चस्तरीय टीम बनाई, ताकि दिक्कत का पता लगाया जा सके और इसे 24 घंटे के अंदर ठीक कर दिया। सात दिनों बाद चंद्रयान-2 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। जिसका जिक्र मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे में तकनीकी खामी को दूर करने के लिए इसरो के वैज्ञानिकों की प्रशंसा की थी।

 

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