Wednesday, Dec 01, 2021
-->
isro-chandrayaan-2-orbiter-high-resolution-camera-images

Chandrayaan-2 को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, ऑर्बिटर ने भेजी कुछ हैरतअंगेज तस्वीरें

  • Updated on 10/5/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत का मिशन  चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2)भले ही 100 फीसदी सफल नहीं हुआ हो लेकिन आज एक बार फिर से इसरो ने चांद की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। ये तस्वीरें  चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर के कैमरे से ली गई है। इन सभी तस्वीरो में चांद की एक अलग ही झलक दिखाई दे रही है। 

इसरो ने जिन सभी तस्वीरों को अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया है उन सभी में चांद की सतह पर छोटे बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। 

नासा ने भी जारी की थी तस्वीरें

‘लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर कैमरा’ से ली गईं उस क्षेत्र की ‘हाई रेजोल्यूशन’ तस्वीरें शुक्रवार को जारी कीं  जहां भारत ने अपने महत्वाकांक्षी ‘चंद्रयान-2’ (Chandrayaan-2) मिशन के तहत लैंडर विक्रम (Lander Vikram) की ‘सॉफ्ट लैंडिग’ कराने की कोशिश की थी। नासा (Nasa) ने इन तस्वीरों के आधार पर बताया कि नासा की ‘हार्ड लैंडिग’ हुई।   

नासा के लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर (एलआरओ) अंतरिक्षयान ने 17 सितंबर को चंद्रमा के अनछुए दक्षिणी ध्रुव के पास से गुजरने के दौरान उस जगह की कई तस्वीरें ली, जहां विक्रम ने सॉफ्ट लैंडिग के जरिए उतरने का प्रयास किया था लेकिन एलआरओसी की टीम लैंडर के स्थान या उसकी तस्वीर का पता नहीं लगा पाई है।

विक्रम लैंडर की हुई थी हार्ड लैंडिग

नासा ने कहा कि विक्रम की हार्ड लैंडिग हुई और अंतरिक्ष यान के सटीक स्थान का पता अभी तक नहीं चला है। नासा ने बताया कि इस ²श्यों की तस्वीरें लूनर रिकॉनिसंस ऑॢबटर कैमरा क्विकमैप ने लक्षित स्थल से ऊपर उड़ान भरने के दौरान ली। चंद्रयान-2 के विक्रम मॉड्यूल की सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिग कराने का भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की कोशिश नाकाम रही थी और विक्रम लैंडर का लैंङ्क्षडग से चंद मिनटों पहले जमीनी केंद्रों से संपर्क टूट गया था।   

 ‘गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर’ के एलआरओ मिशन के डिप्टी प्रोजेक्ट साइंटिस्ट जॉन कैलर ने एक बयान में कहा कि एलआरओ 14 अक्टूबर को दोबारा उस समय संबंधित स्थल के ऊपर से उड़ान भरेगा जब वहां रोशनी बेहतर होगी।  

 

क्या है पूरा मामला

बता दें  सात सितंबर को चंद्रयान-2' (Chandrayaan-2) के रोवर प्रज्ञान से लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी लेकिन अंतिम चरण में चंद्रमा की सतह से महज 2.1 किलोमीटर ऊपर इसका  इसरो (ISRO)से संपर्क टूट गया। तभी से लैंडर से संपर्क साधने के प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन कोई सफलता मिलती नहीं दिख रही। इसरो ने आठ सितंबर को कहा था कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे कैमरे से चंद्रमा की सतह पर लैंडर देखा गया है। विक्रम की हार्ड लैंडिंग हुई थी।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.