Sunday, Nov 28, 2021
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isro top scientist tapan misra claimed tried to kill by giving poison bengaluru pragnt

ISRO के टॉप वैज्ञानिक का सनसनीखेज खुलासा- जहर देकर हुई थी मारने की कोशिश

  • Updated on 1/6/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के एक टॉप वैज्ञानिक ने सनसनीखेज खुलासा किया है। इसरो वैज्ञानिक और अहमदाबाद स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के पूर्व निदेशक तपन मिश्रा (Tapan Misra) ने दावा किया है कि उन्हें तीन साल से अधिक समय पहले यानी साल 2017 में जहर देकर मारने की कोशिश की गई थी। तपन मिश्रा ने अपने फेसबुक पोस्ट में इस दावे का खुलासा किया है। 

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प्रमोशन इंटरव्यू के दौरान दिया गया जहर
इसरो वैज्ञानिक के फेसबुक पोस्ट के मुताबिक उन्हें 23 मई, 2017 को बेंगलुरु में इसरो हेडक्वार्टर में प्रमोशन इंटरव्यू के दौरान उन्हें खतरनाक आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड दिया गया था। उन्हें यह जहर दोपहर बाद के नाश्ते में डोसे के साथ दी गई चटनी के साथ मिलाकर दिया गया था। हालांकि तपन को इस बारे में कोई आइडिया नहीं है कि उन्हें ये जहर किसने और क्यों दिया था? मिश्रा फिलहाल इसरो में वरिष्ठ सलाहकार के तौर पर काम कर रहे हैं और इस महीने के अंत में सेवानिवृत होने वाले हैं।

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फेसबुक पोस्ट के जरिए बताई अपनी आपबीती
तपन मिश्रा ने इस मामले में सिक्योरिटी एजेंसियों से जांच करने की अपील की है। उन्होंने कहा है एजेंसियां यह पता लगाएं कि उन्हें जहर किसने और क्यों दिया था। बता दें कि तपन को जो जहर दिया गया था वो एक इनऑर्गेनिक ऑर्सेनिक था। तपन ने खुद बताया कि इसकी एक मात्रा किसी भी इंसान को मारने के लिए काफी होती है। बता दें कि उन्होंने अपने फेसबुक पर 'लॉन्ग केप्ट सीक्रेट' नाम से एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा है। पोस्ट में उन्होंने यह दावा किया कि जुलाई, 2017 में गृह मामलों के सुरक्षाकर्मियों ने उनसे मुलाकात कर आर्सेनिक जहर दिए जाने के प्रति उन्हें सावधान किया था।

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इमरो में एक के बाद एक संदिग्ध मौत
उन्होंने लिखा, 'इसरो में हमें बड़े वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौत की खबर मिलती रही है। साल 1971 में प्रोफेसर विक्रम साराभाई की मौत संदिग्ध थी। उसके बाद 1999 में वीएसएससी के निदेशक डॉ. एस. श्रीनिवासन की अचानक मौत पर भी सवाल उठे थे। वहीं 1994 में श्री नांबीनारायण का केस भी सबके सामने आया था। लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं इस रहस्य का हिस्सा बनूंगा।'

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स्नैक्स में मिलाकर दिया जहर
मुझे 23 मई 2017 को बेंगलुरु में इसरो मुख्यालय में पदोन्नति साक्षात्कार के दौरान घातक आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड जहर दिया गया था। लंच के बाद स्नैक्स में शायद डोसे की चटनी के साथ मिलाकर जहर दिया गया था। गुदा रक्तस्राव के माध्यम से 30-40% तक रक्त के गंभीर नुकसान के लिए लगभग दो वर्षों तक दुःस्वप्न का पालन किया गया। 

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इन परेशानियां का किया सामना
तपन ने आगे लिखा, 'मैं बड़ी मुश्किल से बेंगलुरु से वापस आ सका। इसके बाद मुझे अहमदाबाद के जाइडस कैडिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद सांस लेने में परेशानी, असामान्य त्वचा का फटना और त्वचा का छिलना, पैरों और हाथों पर नाखूनों का टूटना, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं जैसे हापोक्सिया, हड्डियों में दर्द, सेंसेशन, एक बार हल्का दिल का दौरा, आर्सेनिक डिपोजिशन और शरीर के बाहरी और अंदरूनी अंगों पर फंगल इंफेक्शन हो रहा था।' इसरो वैज्ञानिक ने बताया कि उन्होंने दो साल में जायडस कैडिला अहमदाबाद, टाटा मेमोरियल अस्पताल मुबंई और एम्स दिल्ली में अपना इलाज करवाया। 

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अपने सहकर्मी का व्यक्त किया आभार
मैं अपने एक निदेशक सहकर्मी का आभारी हूं, जो उसी बैठक में मौजूद था, जिसने 5 जून 2017 को मुझे जहर दिए जाने की संभावना के बारे में चेतावनी दी थी। शायद मुझे लगता है कि उसने मेरे खाने में जहर मिलाते हुए देखा होगा। 7 जून को, MHA सुरक्षा एजेंसी के सुरक्षाकर्मियों ने मुझसे मुलाकात कर आर्सेनिक जहर दिए जाने को लेकर सावधान किया था। मैं उनका आभारी हूं, क्योंकि उनकी जानकारी से डॉक्टरों को मेरी बीमारी के सटीक उपाय पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली। 

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मैं भाग्यशाली हूं- तपन मिश्रा
उन्होंने कहा कि लगातार दो साल तक चले इलाज के दौरान उन्होंने किसी से भी बात नहीं की। तपन मिश्रा ने खुदको भाग्यशाली बताते हुए कहा कि इस खतरनाक जहर लेने के बाद कोई भी नहीं बचता है। बता दें कि तपन इस जनवरी में रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में वह चाहते हैं कि उनके साथ हुए इस घटना के बारे में बाकी लोगों को भी पता चले सके, जिससे अगर उनकी जान भी जाती है तो सबको पता हो कि उनके साथ क्या-क्या हुआ था।

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