Monday, Jan 21, 2019

हिमाचल में टैक्स चोरों पर नकेल कसने की तैयारी में IT विभाग, यह सॉफ्टवेयर करेगा एलर्ट

  • Updated on 11/29/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। टैक्स चोरी से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया लेकिन इसके बावजूद भी सरकार टैक्स चोरी के मामलों पर रोक लगाने में नाकाम रही है। इस समस्या से निपटने के लिए अब आबकारी विभाग एक नए तरह के सॉफ्टवेयर की मदद लेने वाला है। इस सॉफ्टवेयर का प्रयोग सबसे पहले हिमाचल में किया जाएगा। 

विभाग का दावा है कि इस सॉफ्टवेयर की मदद से टैक्स चोरी पर लगाम लगाई जा सकेगी। इससे प्रदेश में ई वे बिल और स्टेट जीएसटी रिटर्न में अंतर खत्म हो जाएगा। साथ ही नए तकनीक के मदद से टैक्स चोरी रोकने में भी विभाग को मदद मिलेगी। बता दें पिछले साल कर्नाटक में उम्मीद जताई जा रही थी कि जीएसटी के आने के बाद से टैक्स चोरी पर लगाम लगाने में सफलता मिलेगी पर ऐसा हुआ नहीं। 

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सिर्फ कर्नाटक में ही नहीं देश के अन्य राज्यों में भी बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी करने के मामले सामने सामने आए हैं। अब विभाग ने इससे परेशान होकर नए सॉफ्टवेयर की मदद से टैक्स चोरी करने वालों की गर्दन पकड़ने की फिराक में है। विभाग के आला अधिकारियों की माने तो मानवीय तरीके से सभी रिटर्न को देखना संभव नहीं है लेकिन अब सॉफ्टवेयर की मदद से यह संभव हो पाएगा। 

मानवीय तरीके से आ रही दिक्कतों से भी इस सॉफ्टवेयर की मदद से निपटना आसान हो सकेगा। विभाग ने देशभर में चोरी हो रहे टैक्स पर रोक लगाने के लिए अब धीरे-धीरे सभी राज्यों में ऐसी ही तकनीकि के प्रयोग पर जोर दिया जाएगा। प्रमुख सचिव राज्य कर एवं आबकारी अधिकारी जेसी शर्मा ने बताया कि कर्नाटक एनआईसी ने एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है जिसमें ई वे बिल और जीएसटी के रिकॉर्ड का अपने आप संकलन हो जाता है।

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इससे जो टैक्स चोरी की जानकारी मानवीय तरीके से नहीं हो पता लग पा रही थी वह जानकारी यह सॉफ्टवेयर कुछ ही समय में पकड़ कर बता देता है। इससे टैक्स चोरी संभावना शून्य हो जाती है। शर्मा ने बताया कि कर्नाटक एनआईसी ने इस दिशा में प्रयोग के लिए हिमाचल एनआईसी के जरिए संपर्क कर रहा है। इस सॉफ्टवेयर को प्रयोग के लिए जल्द ही हिमाचल में शुरु किए जाने की कोशिश की जा रही है।

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