Tuesday, Oct 04, 2022
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it is impossible to stop rising temperature without reducing carbon emissions: sunita narayan

कार्बन उत्सर्जन में कमी के बिना बढ़ता तापमान रोकना असंभव : सुनीता नारायण

  • Updated on 3/2/2022

नई दिल्ली/पुष्पेंद्र मिश्र। आपीसीसी रिपोर्ट 2022 जारी होने के बाद ये तय है कि आने वाले दो दशकों में भारत पर जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणाम सामने आने वाले हैं। इसी मुद्दे पर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की अध्यक्ष और पर्यावरणविद् सुनीता नारायण ने कहा कि आईपीसीसी की हर रिपोर्ट हमें आगाह कर रही है कि हमारे पास समय नहीं है। चेतावनियां अब अधिक से अधिक भयानक होती जा रहीं हैं।

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चेतावनियां अब अधिक भयानक होती जा रहीं हैं, हमारे पास समय नहीं है
पिछली रिपोर्ट्स में हमें पता था कि ये होने वाला है। लेकिन आज यह निश्चित हो गया है। कि अगर हमने जलवायु परिवर्तन को रोकने के उपायों पर काम नहीं किया तो यह होना निश्चित है। क्योंकि कार्बन उत्सर्जन में कमी के बिना हम बढ़ते तापमान और उमस को कम नहीं कर सकते। आईपीसीसी रिपोर्ट बता रही है कि जलवायु परिवर्तन का हमारे मानसून पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

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जलवायु परिवर्तन से अंसतुलित मानसून पैदा करेगा समस्याएं
कृषि प्रधान देश में मानसून की बहुत महत्ता है ये किसानों के लिए वित्त मंत्री की तरह ही है। बीते वर्ष में देश में कई रा'यों में सघन बर्षा हुई है। रिपोर्ट में स्पष्ट है कि आने वाले समय में भी भारी वर्षा, बाढ़, सूखा, पानी की किल्लत जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होंगी। वहीं अगले दशकों में तापमान बढऩे से वाष्पीकरण दर बढ़ेगी, जमीन में नमी खत्म होगी। सिंचाई और पीने के पानी की किल्लत बढ़ेगी। गर्मी के कारण राजस्थान के लोग पानी की कमी से लंबे वक्त से जूझ रहे हैं। वैश्विक प्रदूषण में भारत केवल 4.4 फीसद का योगदान करता है। फिर भी वातावरण में गैसों का प्रभाव भी बढ़ रहा है। फॉसिल फ्यूल, पॉवर प्लांट्स, वाहन, उद्योग-धंधे, कचरा प्रबंधन, कमर्शियल संस्थान, कृषि व घरों में ईंधन के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन हो रहा है।

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पर्यावरण अनुकूल कार्य करने होंगे
हमें वनीकरण पर रणनीति बनानी होगी। पेड़ लगाना, काटना और नए पेड़ लगाने पर भी काम करना होगा। हमें पर्यावरण के अनुकूल उपाय करने होंगे। जैसे अगर हम बांस की खेती चुनते हैं तो पर्यावरण को कोई हानि नहीं है और बांस आय का भी स्त्रोत है। नारायण ने कहा कि देश में नदियां सूख रहीं हैं उनकी जो हालत है उसे सुधारने की जरूरत है। विश्व में जो गरीब तबका है जलवायु परिवर्तन का उस पर सीधा असर है। क्योंकि वह जलवायु को परिवर्तित करने का कोई भी कार्य नहीं कर रहा है।

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विश्व को जलवायु परिवर्तन पर एक साथ काम करने की जरूरत है 
इसलिए विश्व को इस जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक साथ काम करने की जरूरत है। जिसमें अमीर गरीबों द्वारा भुगती जाने वाली परेशानियों के लिए भुगतान करे। आईपीसीसी ने भारत में एक स्थान छोडक़र दूसरे स्थानों की ओर जा रहे विस्थापितों के आंकड़े भी जारी किए हैं। यह राजनीतिक रूप से बहुत ही गंभीर विषय है। क्योंकि ये विस्थापन करने वाले लोग पहले अपने गांव से शहर आ रहे हैं और उसके बाद इनमें से कई देश भी छोड़ रहे हैं। अगर सरकार इस पर जल्द को निर्णय नहीं लेगी तो हम अधिक असुरक्षित जलवायु क ी ओर बढ़ेंगे।

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