Tuesday, Nov 29, 2022
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भगवान जगन्नाथ की क्या है कहानी, कौन खींचता है रथ, जानें मंदिर से जुड़ी अद्भुत बातें

  • Updated on 6/23/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पुरी की मशहूर जगन्नाथ रथ यात्रा आज से शुरू हो गई है। धरती का बैकुंठ धाम कहे जाने वाले जगन्नाथ धाम की यह रथ यात्रा 7 दिनों तक चलेगी। इस दौरान कोरोना संकट को देखते हुए कम लोगों को यात्रा में हिस्सा लेने के लिए कहा गया है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने कुछ नियमों के साथ रथयात्रा जो अनुमति दे दी थी। सुप्रीमकोर्ट ने रथ यात्रा के दौरान राज्य में सावधानियां बरतने को कहा है।

क्या है ये रथ यात्रा
रथ यात्रा एक पर्व की तरह मनाया जाता है। बताया जाता है कि जगन्नाथ धाम में भगवान श्रीकृष्ण के भाई-बहन यानी बहन सुभद्रा और उनके बड़े भाई बलराम की मूर्ति की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं में कहा गया है कि स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ का जन्मदिवस होता है। इसी दिन उनके भाई और बहन को मंदिर के पास ही एक मंडप में ले जाकर नहलाया जाता है। इस दौरान 108 कलश पानी और दूध का इस्तेमाल किया जाता है।

माना जाता है कि जब भगवान बीमार हो जाते हैं तो उन्हें एक अलग कमरे में रखा जाता है जहां वो 15 दिन तक रहते हैं। इस दौरान उनके कमरे में कुछ खास सेवकों को ही जाने की अनुमति रहती है। जबकि इस दौरान भगवान जगन्नाथ के प्रतिनिधि अलारनाथ की प्रतिमा स्थापित की जाती है और उनकी पूजा शुरू कर दी जाती है।

15 दिन के बाद जब भगवान स्वस्थ हो कर निकलते हैं तब उनका स्नान कराया जाता है इसे नव यौवन नैत्र उत्सव कहा जाता है। इसके बाद भगवान अपने भाई-बहन के साथ अपने रथ पर बैठ कर भ्रमण के लिए निकते हैं। यही जगन्नाथ की रथ यात्रा कहलाती है।

रथ खींचने के अधिकार
भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने को लेकर कोई नियम नहीं है। इसे कोई भी व्यक्ति खींच सकता है। माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने वाला जीवन काल के चक्र से मुक्त हो जाता है। इस दौरान किसी भी धर्म, जाति का व्यक्ति रथ खींच सकता है। इस तरह का कोई नियम यहां लागू नहीं होता।

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मंदिर से जुड़ी अद्भुत बातें
- इस मंदिर की शैली कमाल की है। इसका मंदिर का निर्माण कलिंग शैली में हुआ है। ये आश्चर्य ही है कि मंदिर के ऊपर लगा लाल ध्वज हमेशा हवा के विपरीत ही लहराता है।

-इस मंदिर शीर्ष पर लगे सुदर्शन चक्र को कोई भी कहीं से भी देख सकता है। ये एक समान ही नजर आता है।

- ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर के ऊपर से कभी कोई भी पक्षी या प्लेन उड़ान नहीं उड़ पाता।

-सिर्फ मंदिर ही नहीं बल्कि इस मंदिर का रसोईघर भी कम चमत्कारी नहीं है। इस मंदिर के रसोईघर में चूल्हे पर एक के ऊपर एक करते हुए 7 बर्तन रख कर प्रसाद बनाया जाता है और कमाल की बता ये है कि प्रसाद सबसे ऊपर वाले बर्तन में जल्दी तैयार होता है।

- इस मंदिर का यह भी रहस्य है कि यहां कभी भक्तों के लिए बनने वाला प्रसाद कम नहीं पड़ता, जबकि मंदिर में हमेशा सामान्य मात्रा में ही प्रसाद बनाया जाता है, लेकिन भक्तों की संख्या हजार से लाख होने पर भी कभी प्रसाद कम नहीं पड़ता।  

बताते चले कि भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा, इस मंदिर के मुख्य देव हैं। ये मूर्तियां गर्भ गृह में स्थापित हैं। अनुमान है कि इन मूर्तियों की पूजा मंदिर निर्माण से पहले से ही होती आ रही है।

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