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ये है भारत का ऐसा मंदिर जहां आज भी धड़कता है भगवान श्रीकृष्ण का दिल

  • Updated on 9/3/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जन्माष्टमी का त्योहार अब बस आने ही वाला है। देश भर में इस त्योहार की धूम मची हुई है। भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी जन्माष्टमी को पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। 

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श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रुप में मनाते हैं। 

हिन्दू धर्म के बेहद पवित्र स्थल और चार धामों में से एक जगन्नाथ पुरी की धरती को भगवान विष्णु का स्थल माना जाता है। यह दुनिया का सबसे भव्य और ऊंचा मंदिर है। मंदिर के पास रहकर इसका गुंबद देख पाना असंभव है। यह मंदिर हिंदुओं की प्राचीन और पवित्र 7 नगरियों में पुरी उड़ीसा राज्य के समुद्री तट पर बसा है।

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जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी एक बेहद रहस्मय कहानी प्रचलित है। इस मंदिर का सबसे पहला प्रमाण महाभारत के वनपर्व में मिलता है। कहा जाता है किसबसे पहले सबर आदिवासी विश्ववसु ने नीलमाधव के रुप में इनकी पूजा की थी। 

वहीं बात करें इस मंदिर की तो स्थानीय मान्यताओं अनुसार कहते हैं कि इस मूर्ति के भीतर भगवान कृष्ण का दिल का एक पिंड रखा हुआ है, जिसमें ब्रह्मा विराजमान है। 

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दरअसल, जनश्रुति के अनुसार जब श्रीकृष्ण की मृत्यु हुई तब पांडवो ने उसके शरीर का दाह-संस्कार कर दिया लेकिन कृष्ण का दिल जलता ही रहा। ईश्वर के आदेशानुसार पिंड को पांडवों ने जल में प्रवाहित कर दिया। उस पिंड ने लट्ठे का रुप ले लिया। 

स्थानीय मान्यता अनुसार राजा इन्द्रघुम्न, जो कि भगवान जगन्नाथ के भक्त थे, को यह लट्ठा मिला तो उन्होंने इसे जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर स्थापित कर दिया। उस दिन से लेकर आज तक वह लट्ठा भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर है। हर 12 वर्ष के अंतराल के बाद जगन्नाथ की मूर्ति बदलती है, लेकिन यह लट्ठा उसी में रहता है।

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