Wednesday, Nov 20, 2019
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जयशंकर का PAK पर हमला, कहा- ऐसे देश से कैसे बात करें जो आतंकवाद फैलाता है?

  • Updated on 9/27/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने पाकिस्तान (PAKISTAN) पर हमला बोलते हुए उसे एक ‘‘बेहद चुनौतीपूर्ण’’ पड़ोसी बताया और कहा कि भारत (India) एक ऐसे पड़ोसी से बात नहीं कर सकता है जो नई दिल्ली को बातचीत के मंच तक लाने का दबाव बनाने के लिए आतंकवाद (Terrorism) का इस्तेमाल एक कानूनी हथियार के रूप में करता है और हकीकत से रूबरू कराने पर भी उससे मुकर जाने की नीति पर अमल करता है।    

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ऐसे देश से बात कैसे कर सकता हूं जो आतंकवाद फैलाता है

जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए मुद्दा यह नहीं है कि वह पाकिस्तान से बात करेगा या नहीं लेकिन मुद्दा यह है कि भारत एक ऐसे देश से बात कैसे कर सकता है जो आतंकवाद फैलाता है। उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित ही हर कोई अपने पड़ोसी से बात करना चाहता है। मुद्दा यह है कि मैं एक ऐसे देश से बात कैसे कर सकता हूं जो आतंकवाद फैलाता है और साफ-साफ कहा जाए तो हकीकत से रूबरू कराने पर उससे इनकार करने की नीति अपनाता है।   

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भारत-पाक का इतिहास कोई सामान्य इतिहास नहीं

जयशंकर ने सीमापार से रची साजिश और वहीं से भारत में अंजाम दिए गए आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि मुंबई जहां नवंबर 2008 में हमला हुआ था, वह कश्मीर से कुछ हजार मील दूर है।  उन्होंने कहा, ‘‘आपने भारत की संसद पर विफल हमला किया। इसलिए मुझे लगता है कि हमें दुर्भावना में फर्क करना होगा, वह गहरी विद्वेष की भावना जो कश्मीर के लालच में पाकिस्तान के कुछ हलकों में भारत के प्रति है। मेरे खयाल से ये स्वायत्त मुद्दे हैं। विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत और पाकिस्तान का इतिहास कोई सामान्य इतिहास नहीं है।  

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पाकिस्तान भारत के साथ व्यापार नहीं करेगा

विदेश मंत्री ने कहा कि पड़ोसी होने के बावजूद पाकिस्तान भारत के साथ व्यापार नहीं करेगा। वह विश्व व्यापार संगठन का सदस्य है और उसे कानूनी तौर पर विशेष तरजीही राष्ट्र का दर्जा हमें देना चाहिए लेकिन वह ऐसा नहीं करेगा जबकि नयी दिल्ली ने ऐसा किया है।  उन्होंने कहा, ‘‘आपके पास ऐसा पड़ोसी है जो आपको कनेक्टिविटी की अनुमति नहीं दे रहा। उदाहरण के लिए हममें इतनी क्षमता है कि हम अफगानिस्तान और ईरान जाने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बावजूद वह हमें यह कनेक्टिविटी नहीं दे रहा।     

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जयशंकर ने कहा, ‘‘ आप इस सबसे फिर भी निपट सकते हैं बशर्त की वे वह एक चीज नहीं करें जो कि आज दुनिया में वास्तव में अस्वीकार्य हो चुकी है। यह है आतंकवाद को फैलाना, उनकी नजरों में यह भारत को बातचीत की मेज तक लाने का दबाव बनाने वाला एक कानूनी औजार है।उन्होंने कहा,‘‘ आज अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यह एक नियम की तरह स्वीकार्य नहीं रह गया है। दुनिया के कई हिस्सों में आतंकवाद का प्रभाव है लेकिन दुनिया के किसी भी कोने में ऐसा कोई देश नहीं है जो इसका इस्तेमाल जानते-समझते हुए अपने पड़ोसी के खिलाफ एक बड़े उद्योग के रूप में करता हो। 

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क्रिकेटे खेलना बंद करने पर विदेश मंत्री यह जवाब

विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत और पाकिस्तान का इतिहास कोई सामान्य इतिहास नहीं है। दोनों देशों ने साथ में क्रिकेट खेलना क्यों बंद कर दिया। इस सवाल के जवाब में उन्होंने उरी, पठानकोट और पुलवामा का हवाला देते हुए कहा, ‘यदि किसी संबंध पर आतंकवाद, आत्मघाती हमले, हिंसा का विमर्श हावी हो और फिर आप कहें, ‘अच्छा चलिए, अब साथ में चाय पीते हैं, चलो क्रिकेट खेलते हैं। लोगों को बताने के लिहाज से यह बहुत ही कठिन बात होगी।’

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कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की पुरजोर कोशिश

भारत सरकार ने पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 (article 370) के कई प्रावधानों को समाप्त कर दिया था जिसके बाद से पाकिस्तान के साथ उसका तनाव बढ़ गया है। कश्मीर मुद्दे पर भारत के फैसलों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पाकिस्तान ने नई दिल्ली के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को कमतर किया तथा भारतीय उच्चायुक्त को हटा दिया था। पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की पुरजोर कोशिश में लगा है जबकि भारत ने साफ कर दिया है कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करना उसका आंतरिक मामला है। नयी दिल्ली ने इस्लामाबाद से हकीकत को कबूलने तथा भारत विरोधी बयानों पर रोक लगाने को भी कहा।   

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