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जामिया हिंसा मामले में क्या दिल्ली पुलिस के खिलाफ दर्ज है FIR? - हाईकोर्ट का सवाल

  • Updated on 9/19/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जामिया हिंसा (Jamia Violence) से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में एडिशनल सॉलिसिटर अमन लेखी ने दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की तरफ से बहस पूरी कर ली है। दिल्ली दंगों और जामिया में हिंसा से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट अब 1 अक्टूबर को करेगा। 

जामिया में हिंसा मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार को हुई। सुनवाई में दिल्ली पुलिस की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर अमन लेखी ने कहा कि यह मामला रूटीन का है इसीलिए इस केस का ट्रांसफर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा एक-एक मामले पर इंक्वायरी चल रही है।

जहां भी बात हुई है कि पुलिस ने ज्यादा फोर्स लगाई उस पर भी जांच हो रही है। गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट जामिया हिंसा मामले में दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है। जिसमें स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। याचिका में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं।

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पुलिस के खिलाफ क्या इंक्वायरी चल रही है- HC
सुनवाई के दौरान शुक्रवार को हाईकोर्ट ने कहा कि आपको हमें बताना होगा कि पुलिस के जवानों के खिलाफ क्या क्या इंक्वायरी चल रही है? क्या कोई एफ आई आर भी दर्ज हुई है? सीआरपीसी का हवाला देते हुए अमन लेखी ने कहा कि पुलिस ने जो कुछ किया भीड़ को हटाने के लिए किया और कानून के दायरे में किया। पुलिस ने कई चेतावनी भी दी। वहां वार्निंग के बावजूद भी भीड़ हटी नहीं, बल्कि पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने और कानून को अपने हाथ में लेने का प्रयास किया गया।

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पुलिस के खिलाफ FIR से पहले लेनी पड़ती है केंद्र की अनुमति
लेखी ने कहा कि प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए एंटी रॉयट इक्विपमेंट को वहां लगाया गया था। पुलिस पर पत्थरबाजी की गई और डीटीसी बस को आग के हवाले कर दिया गया। लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखने के लिए यूनिवर्सिटी में दाखिल हुई। सीआरपीसी की धारा 138 के तहत पुलिस की कार्रवाई बिल्कुल सही है। जबकि पुलिस के खिलाफ कार्रवाई एक्शन लेने के लिए सीआरपीसी की धारा 132 के मुताबिक केंद्र सरकार से इजाजत लेनी पड़ती है। याचिकाकर्ता ने खुद पुलिस के खिलाफ मामला चलाने के लिए केंद्र से कोई जात नहीं मांगी तो किस बात की एफ आई आर?

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