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कश्मीर के रामायण का हनुमान साबित हो सकते हैं PM मोदी! लीक से हटकर करना होगा प्रयोग

  • Updated on 7/23/2019

नई दिल्ली/ सौरभ बघेल। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran khan) के अमेरिकी दौरे के बाद भारत अमेरिका एक- दूसरे के आमने- सामने खड़े हैं, भारत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप (Donald trump) कड़े शब्दों में उस बयान का खंडन किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि 2 हफ्तों पहले प्रधानमंत्री मोदी (prime minister modi) ने मुझसे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता को कहा था। भारत की तरफ से उनके इस बयान को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा कभी नहीं कहा, इसके अलावा वह साफ शब्दों में कहते हैं कि भारत पाकिस्तान के साथ इस मामले को दिपक्षीय बात चीत के जरिये ही सुलझायेगा।

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भारत की तरफ से आये इस बयान में मोदी सरकार ने उन्हीं बातों को दोहराया है जो कांग्रेस व अन्य गठबंधन दल की सरकार कहती थी। मोदी सरकार ने भी यहां  दिपक्षीय समझौते की बात कही है। जबकि पिछले इतने सालों से  पिछली सरकार भी तो यही कहती आयी हैं जिसका परिणाम आज तक नहीं निकला,लेकिन अगर सच में कश्मीर को इस समय  रामायण मान लिया जाये तो मोदी वह हनुमान हैं जो इस मसले को हल कर सकते हैं मगर इसके लिए उन्हें पहले की सरकारों से कुछ अलग करना होगा। जो परिस्थियों के लिहाज से सरकार के अनुकूल भी है। 

बता दें कि मोदी सरकार आजाद भारत की ऐसी दूसरी सरकार है जिसके पास लोकसभा में इतना बड़ा बहुमत है  
इससे पहले इतना बड़ा बहुमत केवल राजीव गांधी सरकार को ही मिला था। इस कारण वह अन्य सरकारों का तुलना में इस मसले पर ज्यादा स्वतंत्र निर्णय ले सकती हैं। 

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पूर्व की सरकारें इस मसले पर हाथ डालने से बचती रही हैं। कांग्रेस इस मुद्दे पर इसलिए भी पीछे हटती रही है क्योंकि उसके बाद बीजेपी की तरफ बहुसंख्यक हिदुंओं का समर्थन नहीं है। वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार के पास आरएसएस जैसे संगठन का साथ है जिसके पास देश में बहुसंख्यक हिंदूओं का पूरा सर्मथन है। और इस कारण अगर सरकार के निर्णय के गलत परिणाम निकलते हैं तब भी बीजेपी इस मसले पर नैतिकता को आगे करके बच सकती है।

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उदाहरण के तौर पर कुछ साल पहले प्रधानमंत्री मोदी बिना किसी न्यौते के भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के जन्मदिन में पहुंच गये थे जिसके बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, और उसने उसके बाद भी आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया। एक तरह से मोदी सरकार वहां पूरी तरह से फेल थी मगर देश के बहुसंख्यकों का सर्मथन होने के कारण उन्हें इसका कोई खास नुकसान नहीं हुआ। सोचो, अगर ऐसा कोई कांग्रेसी प्रधानमंत्री या अन्य कोई गठबंधन प्रधानमंत्री करने की हिम्मत करता तो निश्चित तौर पर उसे इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता था।

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 इसके अलावा, इस बात से भला कौन मना कर सकता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि एक वैश्विक नेता के तौर पर ज्यादा स्वीकार्य है। और उन्हें मनमोहन सिंह व अन्य नेताओं की तुलना में ज्यादा सर्मथन मिला है। उदाहरण के तौर से सालों से लटके मसूद अहजर को वैश्विक आंतकी घोषित करवाना हो या कुलभूषण जाधव और अभिनंदन के मामले में अपने पक्ष में निर्णय लाना हो यह बातें यह साबित करती हैं कि यह सरकार की विदेश नीति पिछली सरकार की तुलना में मजबूत है। प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का अंदाजा टाईम जैसी मैग्जीन द्वारा उन्हें जगह देने से लगाई जा सकती है। वह इस मामले में भी अन्य नेताओं से आगे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी जिस राजनीतिक दल से आते उस दल के लिए कश्मीर हमेशा प्राथमिकता रहा है जो किसी अन्य दल की तुलना में प्रधानमंत्री मोदी के लिए अति महत्वपूर्ण हो जाता है। इसलिए अगर इस मसले पर अगर प्रधानमंत्री मोदी पहले की सरकारों के रास्ते पर ना चलके खुद कोई बड़ा निर्णय ले तो निश्चित तौर पर इसका समाधान हो सकता है।    

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