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फारूक, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती के लिए खामोशी में गुजरा ईद का त्योहार

  • Updated on 8/12/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों-फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के लिए इस बार ईद उल अजहा का त्योहार खामोशी भरा रहा क्योंकि पूर्व के वर्षों में उनके घरों में समर्थकों, दोस्तों, परिवार के सदस्यों की भीड़ लगी रहती थी। अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद तीनों नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था।

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सरकार की घोषणा के एक सप्ताह बाद सोमवार को शहर के पॉश गुपकर रोड पर उनके आवास सुनसान रहे। आवासों के आसपास केवल सुरक्षा गाडिय़ां ही नजर आ रही थी।  अधिकारियों ने बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला अपने आवास पर नजरबंद हैं, उनके बेटे और पार्टी के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला हरि निवास पैलेस में हैं। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पार्टी) प्रमुख महबूबा चश्मे शाही हट में हैं । 

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अधिकारियों ने बताया कि पांच अगस्त को जिन दूसरे नेताओं को पकड़ा गया था, उन्होंने यहां सेंटूर होटल में नमाज अदा की । सरकार ने उनके लिए एक मौलवी को भी भेजा था। घाटी में सोमवार की सुबह मस्जिदों में ईद-उल-अजहा की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से अदा की गई, लेकिन कफ्र्यू जैसे प्रतिबंध लगे होने के कारण सड़कों से त्योहार की रौनक गायब रही। 

एएमयू छात्रों ने ईद की ‘दावत’ का किया बहिष्कार 
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कश्मीरी छात्रों ने एएमयू गेस्ट हाउस में जम्मू कश्मीर के राज्यपाल की ओर से सोमवार को आयोजित ईद की ‘दावत’ का बहिष्कार किया। कश्मीरी युवकों ने कश्मीर घाटी में हाल के घटनाक्रम के प्रति विरोध दर्ज कराने के लिए यह बहिष्कार किया। उनका कहना है कि दावत पर बुलाना कश्मीरी लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। 

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एएमयू प्रशासन ने संपर्क करने पर बहिष्कार की पुष्टि करते हुए कहा कि कश्मीरी छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए हर कदम उठाए जा रहे हैं। केन्द्र सरकार की सलाह के अनुरूप उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के भी उपाय किए जा रहे हैं। कश्मीरी छात्रों ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईद की दावत पर बुलाना अंतरराष्ट्रीय जनमत को गुमराह करने और केन्द्र सरकार के असंवैधानिक कदम से उत्पन्न मानवीय संकट से ध्यान बांटने का खोखला प्रयास है। 

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कश्मीरी छात्रों का सोशल मीडिया पर लिखा गया यह पोस्ट वायरल हो गया है। इन छात्रों ने कहा कि कश्मीर घाटी में सप्ताह भर से अधिक समय हो गया, सभी संचार साधन बंद पड़े हैं। उन्हें घाटी में अपने परिवार वालों का हालचाल नहीं मिल पा रहा है इसलिए त्यौहार मनाने का सवाल नहीं उठता है।    एएमयू में लगभग 1300 कश्मीरी छात्र पढ़ रहे हैं।

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