Saturday, Jan 22, 2022
-->
jammu-kashmir-daily-newspaper-kashmir-times-office-seal-anuradha-bhasin-prsgnt

‘आजादी’ की आवाज के खिलाफ Action, श्रीनगर में Kashmir Times का ऑफिस किया गया सील

  • Updated on 10/20/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के बाद से हालात सामान्य नहीं हैं! इस बारे में कई अख़बारों और मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। हालांकि केंद्र सरकार इस दावे को सिरे से ख़ारिज करती आ रही है। लेकिन हाल ही में इस दावे को लेकर एक बड़ा वाकया सामने आया है। 

खबर है कि  जम्मू कश्मीर प्रशासन ने राज्य के प्रमुख अखबार कश्मीर टाइम्स ऑफिस को सील कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा आवंटित प्रेस एन्कलेव बिल्डिंग में कश्मीर टाइम्स का ऑफिस चल रहा था।

जम्मू-कश्मीर को ट्विटर ने बता डाला चीन का हिस्सा, सोशल मीडिया पर भड़के लोग

इस खबर की पुष्टि करते हुए कश्मीर टाइम्स अखबार के मालिक ने दावा किया है कि उनका ऑफिस जबरन खाली कराया गया, इसके लिए किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि ऑफिस खाली कराने का उन्हें कोई कारण भी नहीं बताया गया है।

इस मामले में कश्मीर टाइम्स की मालिक अनुराधा भसीन ने कहा कि ‘उन्हें ऐसी खबरें मिल रहीं थी कि सरकारी बिल्डिंग से उनके ऑफिस को खाली कराया जा सकता है। लेकिन एस्टेट विभाग द्वारा इस संबंध में हमसे कोई बातचीत नहीं की। हमने एस्टेट विभाग से बिल्डिंग खाली कराने के आदेश दिखाने को कहा लेकिन हमें कुछ नहीं दिया गया। इसके बाद हमने कोर्ट की शरण ली लेकिन वहां से भी इस संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया है।’

J&K बीजेपी अध्यक्ष बोले- अक्साई चीन और गिलगिट- बाल्टिस्तान को आजाद कराने का समय आ गया

वहीं इस मामले पर एस्टेट विभाग के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद असलम का कहना है कि अख़बार ने सरकारी बिल्डिंग प्रेस एन्कलेव के दो क्वार्टर घेरे हुए थे, जिसमें से एक क्वार्टर विभाग द्वारा पहले ही ले लिया गया था। यह क्वार्टर अनुराधा भसीन के पिता वेद भसीन को आवंटित हुआ था, जो कि कश्मीर टाइम्स पेपर के संस्थापक थे। अब उनकी मौत के बाद इस क्वार्टर के आवंटन को रद्द कर दिया गया था। 

370 की बहाली को लेकर कांग्रेस पर भड़की BJP, कहा- 'भारत को बांटो के हथकंडे' शुरू

कश्मीर टाइम्स के ऑफिस को सील किए जाने पर राज्य की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) और उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने सरकार के इस फैसले पर आलोचना की है। उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर लिखा कि ‘इससे पता चलता है कि क्यों हमारे ‘प्रतिष्ठित’ प्रकाशन सरकार के मुखपत्र बन गए हैं और सिर्फ सरकार द्वारा दिए गए प्रेस विज्ञप्ति को ही छाप रहे हैं। स्वतंत्र पत्रकारिता की कीमत ये है कि उसे बिना तय प्रक्रिया के निकाल बाहर किया जाता है।‘

महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट में लिखा कि अनुराधा उन स्थानीय संपादकों में से थीं, जो जम्मू कश्मीर के लिए भारत सरकार की अवैध कार्रवाई के खिलाफ खड़े हुए। श्रीनगर में उनका दफ्तर बंद करना सीधे तौर पर भाजपा की बदले की कार्रवाई है, जो उनके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत करते हैं।

comments

.
.
.
.
.